बलिया के बाबू साहब का सियासी जादू खत्म, चुनावी नतीजों ने बिगाड़ा नीरज शेखर का खेल? 37 साल बाद शेखर परिवार सदन से अब्सेंट

बलिया के बाबू साहब का सियासी जादू खत्म, चुनावी नतीजों ने बिगाड़ा नीरज शेखर का खेल? 37 साल बाद शेखर परिवार सदन से अब्सेंट


Last Updated:

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव-2026 के लिए अपने आठ प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान तथा श्रुति गंगवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी बनाया है, यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा अपना नौवां उम्‍मीदवार भी उतार सकती है.

Zoom

भारतीय जनता पार्टी ने नीरज शेखर का काटा राज्यसभा टिकट.

बलियाः पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे और तीन बार से राज्यसभा के सांसद रहे नीरज शेखर का इस बार भारतीय जनता पार्टी ने टिकट काट दिया है. सोमवार को बीजेपी ने जिन 8 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, उसमें नीरज शेखर का नाम शामिल नहीं था और केवल नीरज शेखर ही नहीं, पार्टी ने जिन 8 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उसमें से किसी एक को भी टिकट नहीं दिया है. यानी कि बीजेपी ने अपने उम्मीदवार दोहराए नहीं हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर किस वजह से नीरज शेखर का टिकट कटा है? क्योंकि नीरज शेखर ने समाजवादी पार्टी में बहुत कुछ त्याग कर बीजेपी में शामिल हुए थे और टिकट कट जाना उनके और समर्थकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

37 साल बाद किसी भी सदन में नहीं होगा शेखर परिवार
पिता के निधन के बाद नीरज शेखर साल 2007 के लोकसभा उपचुनाव में सपा के टिकट पर जीत हासिल किए थे और फिर 2009 में भी लोकसभा का चुनाव जीते थे. हालांकि 2014 की मोदी लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. फिर सपा ने उनको राज्यसभा भेजा. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था और अब उनका हाथ एक बार फिर खाली है. राजनीति के इतिहास में 37 साल बाद पहली बार ऐसा होगा, जब शेखर परिवार से एक भी शख्स न तो लोकसभा में होगा और न राज्यसभा में होगा.

क्या 2022 और 2024 के चुनावी नतीजों ने बदला सियासी समीकरण
बता दें कि बलिया में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं. जिसमें से सपा गठबंधन को 4, भाजपा को 2 और बसपा को एक सीट मिली थी. बलिया नगर विधानसभा सीट से बीजेपी के दयाशंकर सिंह, फेफना विधानसभा से सपा के संग्राम सिंह यादव, बैरिया विधानसभा से सपा के जयप्रकाश चंचल, बांसडीह विधानसभा से बीजेपी की केतकी सिंह, सिकंदरपुर से सपा के जियाउद्दीन रिजवी, बेल्थरा रोड विधानसभा सीट से सुभासपा के हंसुराम और रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा के उमाशंकर सिंह चुनाव जीते थे. वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सनातन पांडे 4 लाख 67 हजार 068 वोट पाकर विजयी बने थे. जबकि खुद नीरज शेखर, जो कि भाजपा के उम्मीदवार थे, उनको 4 लाख 23 हजार 684 वोट मिले थे. नीरज शेखर को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.

क्या बलिया में खत्म हो रहा शेखर परिवार का जादू?
बलिया लोकसभा सीट पर शेखर परिवार का एकक्षत्र राज था. दिवंगत प्रधानमंत्री चंद्रशेखर 1977 से लेकर 2007 तक 8 बार बलिया के संसदीय सीट से चुनाव जीते थे. हालांकि 1984 में इंदिरा गांधी के निधन के बाद हुए चुनाव में एकमात्र हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन फिर 1989 से लेकर 2007 तक वह लगातार सांसद रहे. उनके निधन के बाद भी जो 2007 में लोकसभा का उपचुनाव हुआ था, उसमें चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को जीत मिली थी. फिर 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल किए. लेकिन इसके बाद शेखर परिवार बलिया के लोकसभा सीट पर अपना राज स्थापित करने के लिए पिछले 12 साल से संघर्ष कर रहा है.

नीरज शेखर के सामने अब क्या विकल्प?
राज्यसभा चुनाव के बाद अब सीधा 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाला है तो ऐसे में अभी नीरज शेखर के सामने कोई सियासी विकल्प नजर नहीं आ रहा है. यानी कि नीरज शेखर को लोकसभा चुनाव का इंतजार करना पड़ेगा. लेकिन लोकसभा चुनाव में भी दो-ढाई साल से ज्यादा का वक्त है. अब नीरज शेखर के सामने इंतजार के अलावा कोई और विकल्प नहीं है. हां ये अलग बात है कि विधानसभा चुनाव में जीत मिलने पर सरकार बनाने के बाद कोई मंत्री पद पार्टी की तरफ से मिल जाए या फिर संगठन में कोई बड़ा मौका मिल जाए.



Source link