पटना: दुर्गा पूजा आते ही पटना का डाकबंगला चौराहा एक बार फिर रोशनी, भव्यता और आस्था के रंग में रंगने को तैयार है. हर साल अपनी अलग थीम और भव्य पूजा पंडाल के लिए चर्चा में रहने वाली नवयुवक संघ श्री दुर्गा पूजा समिति ट्रस्ट इस बार श्रद्धालुओं को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर का अद्भुत स्वरूप दिखाने जा रही है.
1964 से लगातार पूजा का आयोजन कर रही यह संस्था इस बार अपने 63वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. हर साल की तरह इस बार भी यहां कुछ ऐसा तैयार किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचेंगे.
80 फीट ऊंचा होगा खजुराहो मंदिर जैसा पंडाल
इस वर्ष पंडाल का निर्माण मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर की तर्ज पर किया जा रहा है. करीब 80 फीट ऊंचे और 55 फीट चौड़े इस पंडाल को वास्तविक मंदिर जैसा स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है. पंडाल निर्माण की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल के कॉथी के बारीक डेकोरेटर को दी गई है, जबकि इसका डिजाइन कोलकाता आर्ट कॉलेज के कलाकार रितेश चटर्जी ने तैयार किया है.
भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से मंगाए गए हुगला पत्ते से निर्माण
समिति के महासचिव डॉ पुरुषोत्तम मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि इस पंडाल को तैयार करने में सामान्य सजावटी सामग्री के साथ-साथ जूट के बोरे, फाइबर की मूर्तियां, रंगीन स्टोन, रेशम के धागे और भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से मंगाए गए हुगला पत्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है.
हुगला पत्तों से पंडाल की सजावट अपने आप में खास है. इसे तैयार करने में पत्तों को तोड़ने से लेकर सुखाने, डिजाइन तैयार करने, वार्निश करने और फिर पंडाल पर पेस्ट करने तक की लंबी प्रक्रिया चली. इस पूरे काम में करीब छह महीने का समय लगा है.
डाकबंगला से कोतवाली तक है 12 भव्य LED गेट
पंडाल ही नहीं, डाकबंगला चौराहे से लेकर कोतवाली थाना तक का पूरा रास्ता भी इस बार रोशनी से जगमगाने वाला है. समिति के महासचिव डॉ. पुरुषोत्तम मिश्रा की मानें तो बिजली और लाइटिंग का काम पश्चिम बंगाल के चंदननगर की बापन इलेक्ट्रॉनिक्स टीम कर रही है. इस रास्ते पर करीब 12 भव्य LED तोरण द्वार बनाए जा रहे हैं. इनमें जगन्नाथ पुरी मंदिर, पीकॉक गेट, नियॉन गेट, बटरफ्लाई गेट, वॉर्म व्हाइट डिजाइन गेट और त्रिशूल गेट जैसे आकर्षण शामिल हैं.
सबसे खास आकर्षण मैकेनिकल लाइटिंग और मूविंग स्ट्रक्चर होंगे. इनमें भगवान शिव और विश्वकर्मा को हाथी पर सवार, भगवान गणेश को डमरू पर बैठे हुए और भूत के हाथों में रोते हुए बच्चे जैसे दृश्य दिखाए जाएंगे. यही वजह है कि इस बार पूजा पंडाल के साथ-साथ लाइटिंग बच्चों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र बनने वाली है.
मिट्टी और जल से बनेगी मां की प्रतिमा
इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा भी खास होगी. कोलकाता के प्रसिद्ध मूर्तिकार जगन्नाथ पाल पिछले 31 वर्षों से समिति के लिए प्रतिमा निर्माण का काम करते आ रहे हैं. मां का आशीर्वादी स्वरूप तैयार किया जा रहा है. प्रतिमा निर्माण में बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेश और कोलकाता की हुगली नदी से मिट्टी और जल मंगाया गया है. वहीं मां के श्रृंगार की सामग्री पश्चिम बंगाल के नौहाटी और बनारस से मंगाई जा रही है.
मां के अलग-अलग रूप दिखाएंगी छोटी कन्याएं
पूजा परिसर में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को छोटी कन्याओं के माध्यम से भी प्रस्तुत किया जाएगा. ब्रह्मकुमारी संस्था के सहयोग से राजकीय कन्या उच्च विद्यालय के पास यह आयोजन किया जाएगा, जहां धार्मिक संगीत के साथ मां के विभिन्न रूपों का प्रदर्शन श्रद्धालुओं को देखने को मिलेगा.
500 से ज्यादा सदस्य संभालेंगे सुरक्षा
डाकबंगला की पूजा में हर साल भारी भीड़ उमड़ती है. समिति के मुताबिक, यहां 10 से 20 लाख तक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी व्यापक तैयारी की गई है.
कोतवाली थाना चौराहे से डाकबंगला चौराहे तक 500 से अधिक सदस्यों की कमिटी गठित की गई है. ये सदस्य अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहकर भीड़ और असामाजिक तत्वों पर नजर रखेंगे. इसके साथ ही जिला प्रशासन का सहयोग भी रहेगा. सुरक्षा के लिए वॉच टावर और CCTV कैमरों की व्यवस्था की जा रही है.
पूजा का घर बैठे देख सकेंगे लाइव प्रसारण
जो लोग डाकबंगला की भव्य पूजा में नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए भी व्यवस्था की गई है. समिति की वेबसाइट dakbunglowdurgapuja.in के माध्यम से पूजा का सीधा प्रसारण देखा जा सकेगा. इसके अलावा परिसर में 10×10 फीट के दो LED वॉल भी लगाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं को पूजा और अन्य कार्यक्रमों की जानकारी एवं प्रसारण देखने को मिलेगा.
सप्तमी से नवमी तक लगातार बंटेगा प्रसाद
डाकबंगला की पूजा सिर्फ भव्य पंडाल और लाइटिंग तक सीमित नहीं है. समिति की ओर से तीनों प्रमुख पूजा दिनों में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था रहेगी. सप्तमी को हलवा, अष्टमी को खीर और नवमी को खिचड़ी का वितरण किया जाएगा. समिति के सदस्य, सुरक्षा कर्मी और प्रशासन के सहयोग से प्रसाद वितरण की व्यवस्था संचालित होगी.
1964 से जारी है परंपरा
डॉ. पुरुषोत्तम मिश्रा ने आगे बताया कि डाकबंगला चौराहा दशहरा के दौरान बिहारवासियों के लिए लंबे समय से आकर्षण का केंद्र रहा है. समिति का उद्देश्य सिर्फ भव्य पंडाल बनाना नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद प्रसिद्ध मंदिरों और स्थापत्य को पटना में इस तरह प्रस्तुत करना है कि आर्थिक या अन्य कारणों से वहां नहीं पहुंच पाने वाले लोग भी उसका स्वरूप यहां देख सकें.