8,50,000 किताबें-135 साल की विरासत… क्यों बेघर हुई दिल्ली की सेंट्रल लाइब्रेरी?

8,50,000 किताबें-135 साल की विरासत… क्यों बेघर हुई दिल्ली की सेंट्रल लाइब्रेरी?


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8,50,000 किताबें-135 साल की विरासत, क्यों बेघर हुई दिल्ली की सेंट्रल लाइब्रेरी

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कोलकाता से दिल्ली तक 135 साल का सफर तय करने वाली केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी पर संकट है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर केंद्र सरकार से तीन सप्ताह में जवाब में मांगा है. लाइब्रेरी को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत शिफ्ट किया जाना है. लाइब्रेरी में 8.5 लाख किताबें और दुर्लभ दस्तावेज हैं.

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केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (फोटो-कल्चरल मिनिस्ट्री)

कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग के कमरों में रखी सरकारी फाइलें धूल खा रही थीं. यहां एक हजार से ज्यादा किताबें भी थीं, जो सिर्फ किताबें नहीं बल्कि भारत को जानने, समझने और परखने का दस्तावेज थीं. इंपीरियर रिकॉर्ड ऑफिस के क्यूरेटर एफ डब्ल्यू फॉरेस्टर ने बिखरी किताबों को जुटाया. धीरे-धीरे अलग-अलग सरकारी विभागों की लाइब्रेरियों का संग्रह भी इसमें जुड़ा और 1981 में यह इंपीरियल लाइब्रेरी बन गई. यह कोई साधारण लाइब्रेरी नहीं थी, इसके लिए ब्रिटिश शासन ने 1901में बाकायदा इंपीरियल पुस्तकालय अधिनियम पास किया था.

इस अधिनियम में लाइब्रेरी में मौजूद दस्तावेजों, पुस्तकों और सरकारी गजटों को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी. समय के साथ इस लाइब्रेरी ने दिल्ली तक का सफर तय किया और केंद्रीय सचिवालय लाइब्रेरी बन गई. वही लाइब्रेरी जो अब बेघर होने की कगार पर है. इसे शिफ्ट किया जाना है, मगर इसके लिए जगह ही नहीं है. 8.5 लाख किताबों से सजी इस  लाइब्रेरी को बचाने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट आगे आया है.

135 साल का इतिहास अपने आप में समेटे लाइब्रेरी को रीलोकेट करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. जस्टिस पीवी संजय कुमार तथा जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सोमवार को स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई की. शीर्ष अदालत ने सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत इस लाइब्रेरी को जगह नहीं मिलने के मामले में केंद्र सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की गई है. दरअसल ऐसी जानकारी सामने आई थी कि मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स और सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट सेंट्रल विस्टा प्लान के बीच लाइब्रेरी को शास्त्री भवन से किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए जगह ढूंढ रहे हैं. कोर्ट ने प्रस्तावित जगह और उसका पूरा लेआउट प्लान भी देने को कहा है.

भारत की सबसे पुरानी लाइब्रेरी

केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय भारत के सबसे पुराने ज्ञान के भंडारों में से एक है. लाइब्रेरी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक कोलकाता की राष्ट्रीय पुस्तकालय के बाद यह देश की दूसरी सबसे पुरानी लाइब्रेरी है, जो कई संस्थाओं की किताबों और दस्तावेजों से मिलकर 1891 में स्थापित हुई थी. वेबसाइट के मुताबिक जब इंपीरियल लाइब्रेरी अधिनियम के तहत 1901 में इसे मान्यता दी गई तो कोलकाता पब्लिक लाइब्रेरी के साथ मिलाकर इसे एक सेंट्रल लाइब्रेरी नाम दिया गया. हालांकि विलय होने के बावजूद इंपीरियल लाइब्रेरी के संग्रह को अलग रखा गया और इसे इंपीरियल सचिवालय पुस्तकालय नाम दिया गया.

1911 में जब देश की राजधानी दिल्ली में ट्रांसफर हुई तो फिर इंपीरियल सचिवालय पुस्तकालय के रिकॉर्ड को दिल्ली में पुराने सचिवालय की बिल्डिंग में रखा गया. 1913 में इसका एक हिस्सा शिमला भेजा गया और 10 फरवरी 1931 को नए सचिवालय के उद्घाटन के साथ ही इसे नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया. किताबों और दस्तावेजों का जो हिस्सा शिमला भेजा गया था. उसे भी वापस लाया गया.

ऐसा पड़ा केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय नाम

1 अप्रैल 1948 को पुस्तकालय का नाम बदलकर केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय CSL कर दिया गया. 1969 में पुस्तकालय को नॉर्थ ब्लॉक स्थित नवनिर्मित शास्त्री भवन में स्थानांतरित किया गया, जहां अभी है. 1958-1959 के समय CSL केंद्रीय शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करता थ, बाद में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन आया और वर्तमान में संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत काम कर रहा है.

8.5 लाख से ज्यादा किताबें, 29 हजार से ज्यादा दस्तावेज

केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय में वर्तमान में तकरीबन 8.5 लाख से ज्यादा का संग्रह है. जो हिंदी-अंग्रेजी समेत भारत और विश्व की अन्य भाषाओं में हैं. इसके एरिया स्टडीज डिवीजन में भारत के किसी छोटे जिले या कस्बे से संबंधित दस्तावेज भी खोजे जा सकते हैं. पुस्तकालय की सबसे प्रमुख धरोहर वो 6500 दस्तावेज माने जाते हैं जो दुर्लभ हैं. इनमें से कुछ दस्तावेज 1702 से भी पुराने हैं. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के दस्तावेजों का विशाल संग्रह भी है. चार मंजिला लाइब्रेरी तकरीबन 5500 वर्ग मीटर में फैली है.

क्यों किया जा रहा शिफ्ट

केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय जिस शास्त्री भवन में है, उसे सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत तोड़ा जाना है. यहां कॉमन सेंट्रल सचिवालय भवन बनना है. सरकार का तर्क है कि वह केंद्र सरकार के 51 मंत्रालयों और विभागों को आधुनिक कार्यालय परिसरों में समेटना चाहती है. ऐसा इसलिए क्योंकि मौजूदा भवन 50 से 60 साल पुराने हो चुके हैं. उनमें जगह की कमी सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक संस्कृति मंत्रालय ने लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त जगह की मांग की है, लेकिन फिलहाल कर्तव्य भवन में उसे सिर्फ दो कमरे आवंटित किए गए हैं, जहां लाइब्रेरी को स्थानांतिरत नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने अब मामले का स्वत: संज्ञान लेकर सरकार से जवाब मांगा है.



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