Breast Cancer: हर 20 महिलाओं में 1 को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, पहाड़ों में बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टर ने दी खास सलाह

Breast Cancer: हर 20 महिलाओं में 1 को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, पहाड़ों में बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टर ने दी खास सलाह


नैनीताल: स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच महिलाओं को जागरूक करने के लिए नैनीताल में अभियान चलाया जा रहा है. अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है. इसी कड़ी में नैनीताल में पिंक रैली समेत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को बीमारी के लक्षण, जांच और समय पर इलाज के प्रति जागरूक किया जा रहा है.

वहीं इस मौके पर नैनीताल पहुंचे केजी मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के प्रोफेसर एवं विशेषज्ञ डॉ. आनंद मिश्रा ने कहा कि स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर में शामिल है. उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें और शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें. उनका कहना है कि बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होती है, इलाज के विकल्प उतने ही बेहतर रहते हैं.

हर 20 महिलाओं में एक को खतरा?

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा गंभीर विषय है और जागरूकता के माध्यम से इसकी रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने महिलाओं को समय पर जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रिस्क असेसमेंट कराने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर के कुछ मामले जेनेटिक कारणों से जुड़े होते हैं, जबकि परिवार में पहले किसी सदस्य को ब्रेस्ट कैंसर होने पर जोखिम बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को बीमारी के लक्षणों को लेकर सतर्क रहना चाहिए. कई बार महिलाएं शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं और जब तक डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, तब तक बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है. ऐसे में समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण है.

पहाड़ों में भी बढ़ रही चिंता

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले चिंता का विषय बन रहे हैं. हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों से छह महीने के भीतर करीब 25 महिलाओं को कीमोथेरेपी दिए जाने की जानकारी सामने आई है. नैनीताल समेत अन्य पर्वतीय जिलों में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही है. डॉक्टरों के अनुसार, पहाड़ों में जागरूकता की कमी, शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना, देर से जांच और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा न मिलना बीमारी के गंभीर होने की वजह बन सकता है। खास चिंता की बात यह है कि कम उम्र की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं.

शुरुआती स्टेज में इलाज आसान

डॉ. मिश्रा ने कहा कि अगर ब्रेस्ट कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इलाज के बेहतर विकल्प उपलब्ध होते हैं. कई मामलों में शुरुआती स्टेज पर सर्जरी समेत अन्य उपचार के माध्यम से मरीज को स्वस्थ किया जा सकता है. वहीं, बीमारी बढ़ने पर इलाज लंबा और जटिल हो सकता है. उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि 20 वर्ष की उम्र के बाद अपने स्तनों में किसी भी असामान्य बदलाव को लेकर सजग रहें और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच व स्क्रीनिंग कराएं. परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास होने वाली महिलाओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है.

अफवाहों से दूर रहना जरूरी

डॉ. मिश्रा ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां और अफवाहें भी मौजूद हैं, इन्हें दूर करना जरूरी है. बीमारी के प्रति डर के बजाय जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि महिलाएं समय पर डॉक्टर से संपर्क कर सकें. उन्होंने कहा कि इस बार WHO (World Health Organization) द्वारा जागरूकता अभियान में थीम “Every Story Matters” जैसे संदेश के जरिए यह बताने की कोशिश की जा रही है कि ब्रेस्ट कैंसर से जूझने वाली हर महिला की अपनी कहानी है. कुछ कहानियां प्रेरणा देती हैं, तो कुछ समाज को समय पर जांच और इलाज के लिए जागरूक करती हैं.

नैनीताल में पिंक रैली से जागरूकता का संदेश

अक्टूबर के दौरान नैनीताल में आशा फाउंडेशन की ओर से पिंक रैली समेत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. गुलाबी रंग को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता का प्रतीक माना जाता है. अभियान का उद्देश्य महिलाओं को बीमारी के प्रति जागरूक करना, शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए प्रेरित करना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने का संदेश देना है. डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार जागरूकता, समय पर जांच और शुरुआती उपचार है. महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.



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