Haldi Farming | Best Turmeric Varieties | हल्दी की उन्नत किस्में | हल्दी की खेती कैसे करें |

Haldi Farming | Best Turmeric Varieties | हल्दी की उन्नत किस्में | हल्दी की खेती कैसे करें |


Best Turmeric Varieties: लखीमपुर खीरी में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ हल्दी की खेती की ओर भी ध्यान दे रहे हैं. कम समय में तैयार होने वाली इस फसल की मांग मसाले के साथ कई दूसरे कामों में भी रहती है. अगर किसान हल्दी की खेती की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे जरूरी बात सही किस्म का चुनाव करना है. कृषि वैज्ञानिक ने हल्दी की कुछ ऐसी किस्मों के बारे में बताया है, जिन पर किसान अपने खेत की मिट्टी, मौसम और बाजार की मांग के हिसाब से विचार कर सकते हैं.

जमुनाबाद प्रथम के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. विश्वकर्मा के मुताबिक हल्दी एक साल में तैयार होने वाली फसल है. इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी को अच्छा माना जाता है. किसान किस्म चुनने के साथ खेत में पानी की निकासी का भी ध्यान रखें, क्योंकि ज्यादा समय तक पानी जमा रहने से हल्दी के कंद खराब हो सकते हैं.

इन किस्मों पर लगाएं दांव 

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. विश्वकर्मा के अनुसार हल्दी की खेती के लिए किसान आजाद हल्दी प्रथम, पंत पीतम, नरेंद्र हल्दी-98 और नरेंद्र सरयू जैसी किस्मों पर विचार कर सकते हैं. हालांकि हर खेत और इलाके की स्थिति अलग होती है, इसलिए किस्म का चुनाव स्थानीय मिट्टी, मौसम और बाजार में मांग को देखकर करना बेहतर रहेगा.

खेत में पानी जमा न होने दें

हल्दी की खेती में जल निकासी का खास ध्यान रखना जरूरी है. अगर खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो हल्दी के कंद खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. बारिश के मौसम में यह समस्या ज्यादा हो सकती है. इसलिए किसान बुवाई से पहले ही खेत में पानी बाहर निकालने के लिए नालियों की व्यवस्था कर लें. खेत में अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकलता रहे तो फसल की बढ़वार अच्छी रहने में मदद मिल सकती है. इसके साथ ही मिट्टी को भुरभुरा रखना और जरूरत के अनुसार नमी बनाए रखना भी जरूरी है.

हल्दी की मांग सिर्फ मसाले तक सीमित नहीं

हल्दी का इस्तेमाल सिर्फ खाने में मसाले के तौर पर नहीं होता. इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक और कई घरेलू उत्पादों में भी किया जाता है. हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन इसे खास बनाता है. हालांकि किसी बीमारी के इलाज के लिए केवल हल्दी पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. किसानों के लिए इसका फायदा यह है कि बाजार में हल्दी की मांग अलग-अलग रूपों में रहती है. इसे सूखाकर बेचने के साथ पाउडर बनाकर भी बाजार में उतारा जा सकता है.

खेती में इन बातों का रखें ध्यान

हल्दी की अच्छी फसल के लिए खेत की मिट्टी को भुरभुरा रखना, जरूरत के मुताबिक सिंचाई करना और समय-समय पर खरपतवार हटाना जरूरी है. खेत में पानी जमा होने पर तुरंत उसकी निकासी करनी चाहिए. किसान मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करें तो फसल के लिए बेहतर रहेगा. साथ ही खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से अपने इलाके के हिसाब से सही किस्म और खेती की जानकारी लेना फायदेमंद रहेगा.

हल्दी को पाउडर बनाकर बेच सकते हैं

हल्दी की खुदाई के बाद किसान कंद को साफ करके अच्छी तरह सुखा सकते हैं. इसके बाद इसे सूखी हल्दी के रूप में बेचा जा सकता है. किसान चाहें तो हल्दी का पाउडर तैयार करके पैकिंग के साथ भी बिक्री कर सकते हैं. अगर किसान समूह बनाकर हल्दी की सफाई, सुखाने, पिसाई और पैकिंग का काम करें तो सीधे तैयार उत्पाद बेचने का मौका मिल सकता है. इससे खेती के साथ उत्पाद की कीमत बढ़ाने के रास्ते भी खुल सकते हैं.



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