मेरठः इतिहास विभाग ने रामायण व महाभारत काल से जुड़ी मौखिक परंपराओं, किंवदंतियों को दस्तावेजित करने की पहल, जानें

मेरठः इतिहास विभाग ने रामायण व महाभारत काल से जुड़ी मौखिक परंपराओं, किंवदंतियों को दस्तावेजित करने की पहल, जानें


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Meerut News: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का इतिहास विभाग मेरठ के रामायण व महाभारत कालीन इतिहास को लोकगाथाओं और किंवदंतियों के माध्यम से सहेजेगा. मौखिक परंपराओं को दस्तावेजित कर डॉक्यूमेंट्री बनाई जाएगी. जो बातें स्मृति में होती हैं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाई जाती हैं, वे भी एक आधार मानी जाती हैं. इसलिए इतिहास विभाग की टीम ऐसे लोगों से बातचीत करेगी.

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मेरठ: पौराणिक व ऐतिहासिक दृष्टि से मेरठ काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां आपको विभिन्न ऐसे ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलेंगे. जिनका उल्लेख रामायण कालीन एवं महाभारत कालीन दौर से किया जाता है. इन्हीं सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में संचालित इतिहास विभाग द्वारा विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के पश्चात किद्वंती, लोकगाथाओं के माध्यम से इतिहास को संजोएगा.

हर पहलू का किया जाएगा मंथन चिंतन

लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में संचालित इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि भारतीय संस्कृति में हजारों वर्षों की परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग लिखित रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन लिखित चीजें नष्ट हो सकती हैं. जो बातें स्मृति में होती हैं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाई जाती हैं, वे भी एक आधार मानी जाती हैं. इसलिए इतिहास विभाग की टीम ऐसे लोगों से बातचीत करेगी. जिन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है. इन बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी. इसके पश्चात विभिन्न ऐतिहासिक तथ्य पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा. जिसके आधार पर एक पूरी डॉक्यूमेंट्री फाइल तैयार होगी. उन्होंने बताया इस पहल का उद्देश्य मौखिक परंपराओं और किंवदंतियों को दस्तावेजित करना है.

युवा जान पाए संपूर्ण इतिहास

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जब हम किसी स्थान पर घूमने जाते है. तो वहां के लोग ही यह बताते हैं कि यहां पर यह हुआ था. ऐसे जब हम हस्तिनपुर जाते हैं. तो हस्तिनापुर में आपको वहां के लोगों के माध्यम से पता चलेगा पांडव यहां पूजा अर्चना किया करते थे. पांडव यहां स्नान किया करते थे. इस क्षेत्र में पांडवों के महल हुआ करते थे. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी परंपरा है जो कि कई सदियों से चलती आ रही है. उन्हें ही संरक्षित किया जाएगा. क्योंकि आज बताने वाले व्यक्ति ने अपने पूर्वजों से सुना होगा. उन्होंने उनके पूर्वजों से सुना होगा इसी तरह से हजारों साल का यह इतिहास और सिलसिला चलता आ रहा है. जिसे अब ओरल हिस्ट्री आरलॉजिकल सर्वे के माध्यम से भी प्रमाणित किया जाएगा.

महाभारत कालीन स्थल यहां हैं मौजूद

बताते चले कि जब मेरठ की बात की जाती है तो मेरठ को महाभारत कालीन दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां हस्तिनापुर में आज भी आपको विभिन्न महल और विभिन्न मंदिर देखने को मिलेंगे. जो की महाभारत कालीन बताए जाते हैं. इसी के साथ में मेरठ में गगोल तीर्थ भी है. उल्लेख मिलता है कि यह पर महर्षि विश्वामित्र की तपोस्थली है. भगवान श्री राम लक्ष्मण जी के साथ यहां आए थे. इसी के साथ ही कलयुग के आगाज का भी मेरठ केंद्र माना जाता है. जिसका वर्णन किला परीक्षितगढ़ के रूप में किया जाता है. ऐसे में निश्चित तौर पर एक अच्छा प्रयास है. जिससे कि युवा इन सभी पहलुओं को ऐतिहासिक दृष्टि से समझ पाएंगे. साथ ही शोधार्थियों की भविष्य के लिए भी काफी बेहतर है.



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