Water Tank Pressure Tips: घर की छत पर पानी की टंकी पूरी भरी होने के बाद भी अगर बाथरूम या किचन के नल से पानी बहुत धीरे आता है तो परेशानी सिर्फ टंकी में पानी की कमी की नहीं हो सकती. कई बार इसकी वजह पाइप का छोटा साइज, पाइप लाइन में जरूरत से ज्यादा मोड, अंदर जमा गंदगी या टंकी और नल के बीच ऊंचाई का कम अंतर होता है. ऐसे में केवल नल बदल देने से समस्या खत्म नहीं होती. टंकी से निकलने वाली मुख्य पाइप और पूरे प्लंबिंग सिस्टम को देखना जरूरी है. आमतौर पर टंकी से शुरुआत में चौडे पाइप का इस्तेमाल और आगे जरूरत के हिसाब से पाइप का साइज कम रखना पानी के फ्लो को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है.
हालांकि केवल मोटा पाइप लगाने से पानी का प्रेशर अपने आप कई गुना नहीं बढ जाता. ग्रेविटी सिस्टम में पानी का प्रेशर मुख्य रूप से टंकी में पानी के लेवल और नल के बीच ऊंचाई के अंतर पर निर्भर करता है. इसलिए घर की पाइप लाइन में बदलाव करने से पहले प्लंबर से उसकी सही जांच करवाना बेहतर है.
टंकी से निकलने वाली मुख्य पाइप का साइज क्यों है जरूरी
ओवरहेड टंकी से पानी घर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने वाली मुख्य पाइप बहुत पतली हो तो एक साथ कई नल खोलने पर पानी का फ्लो कम महसूस हो सकता है. इसलिए घर की जरूरत और पाइप लाइन के डिजाइन के हिसाब से मुख्य सप्लाई लाइन का सही साइज चुनना जरूरी है. कई घरेलू सिस्टम में टंकी के आउटलेट से अपेक्षाकृत चौडी पाइप रखी जाती है और आगे अलग-अलग ब्रांच में जरूरत के अनुसार उसका साइज कम किया जाता है. 1 से 1.5 इंच जैसे साइज इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन हर घर के लिए यही साइज सही होगा, ऐसा जरूरी नहीं है. यह टंकी की ऊंचाई, मंजिलों की संख्या, पानी की जरूरत और एक साथ इस्तेमाल होने वाले नलों पर निर्भर करता है.
रिड्यूसर लगाकर धीरे-धीरे कम किया जा सकता है पाइप का साइज
मुख्य लाइन से अलग-अलग बाथरूम, किचन और दूसरे नलों तक पानी पहुंचाते समय पाइप का साइज जरूरत के अनुसार कम किया जा सकता है. इसके लिए प्लंबिंग में रिड्यूसर का इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के लिए मुख्य पाइप 1.5 इंच की है तो आगे डिजाइन के अनुसार इसे 1.25 इंच, 1 इंच या 3/4 इंच की लाइन में बदला जा सकता है. यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि सिर्फ पाइप को पतला करने से पानी का असली स्थिर प्रेशर नहीं बढता. सही डिजाइन का फायदा यह है कि पाइप में होने वाले अनावश्यक फ्लो लॉस को कम किया जा सकता है और अलग-अलग जगह पर्याप्त पानी पहुंचाने में मदद मिल सकती है.
(इमेज AI)
टंकी की ऊंचाई का पानी के प्रेशर पर पडता है सीधा असर
अगर घर में ग्रेविटी से पानी आता है तो टंकी और नल के बीच ऊंचाई का अंतर बहुत महत्वपूर्ण है. टंकी का पानी जितनी अधिक ऊंचाई से नीचे आता है, उपलब्ध प्रेशर उतना अधिक हो सकता है. यही कारण है कि ऊपरी मंजिल पर मौजूद नल या शावर में कई बार नीचे की मंजिल के मुकाबले पानी का प्रेशर कम महसूस होता है. अगर टंकी और सबसे ऊंचे नल के बीच बहुत कम ऊंचाई है तो केवल पाइप बदलने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी. ऐसी स्थिति में प्लंबर से सिस्टम की जांच कराकर उचित समाधान चुनना चाहिए.
ज्यादा मोड पानी के फ्लो को कर सकते हैं प्रभावित
पाइप लाइन में बार-बार तेज मोड आने पर पानी के बहाव में अतिरिक्त रुकावट पैदा होती है. खासकर बहुत सारे 90 डिग्री एल्बो लगे होने पर फ्लो लॉस बढ सकता है. इसलिए नई पाइप लाइन तैयार करते समय जहां संभव हो, रास्ता सीधा और सरल रखने की कोशिश करनी चाहिए. जरूरत के अनुसार 45 डिग्री फिटिंग या लॉन्ग रेडियस बेंड का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि हर 90 डिग्री एल्बो खराब है, बल्कि बिना जरूरत बहुत ज्यादा फिटिंग लगाने से बचना बेहतर है.
पुरानी पाइप भी बन सकती है धीमे पानी की वजह
अगर घर में काफी पुरानी मेटल पाइप लगी हुई है तो समय के साथ उसके अंदर जंग, मिनरल और दूसरी गंदगी जमा हो सकती है. इससे पाइप का अंदरूनी रास्ता छोटा हो जाता है और नल तक पहुंचने वाला पानी कम हो सकता है. इसलिए बहुत पुराने घर में अचानक पानी का फ्लो कम होने लगे तो केवल टंकी की जांच न करें. पाइप लाइन, वाल्व, नल का एरेटर और दूसरी फिटिंग भी चेक करवाएं. जरूरत होने पर घर के लिए उपयुक्त अच्छी क्वालिटी की CPVC या UPVC पाइप प्लंबर की सलाह से लगवाई जा सकती है.
एयर लॉक की समस्या भी कराएं चेक
कुछ पाइप लाइन में गलत ढलान या डिजाइन के कारण हवा फंस सकती है, जिससे पानी का बहाव प्रभावित हो सकता है. ऐसी समस्या बार-बार हो रही है तो खुद से पाइप काटकर कोई नया वेंट लगाने के बजाय प्लंबर से लाइन की जांच करवाएं. सिस्टम की बनावट के अनुसार सही जगह पर एयर रिलीज या वेंटिंग की जरूरत हो सकती है. गलत तरीके से लगाया गया खुला वेंट पानी के ओवरफ्लो, लीकेज या गंदगी के प्रवेश जैसी दूसरी परेशानी भी पैदा कर सकता है.
टंकी के आउटलेट और सफाई पर भी दें ध्यान
पानी की टंकी के तल में समय के साथ मिट्टी और दूसरी गंदगी जमा हो सकती है. अगर आउटलेट के आसपास कचरा जमा हो जाए तो पानी के बहाव पर असर पड सकता है. इसलिए टंकी की नियमित सफाई जरूरी है. आउटलेट की स्थिति भी ऐसी होनी चाहिए कि तल में जमा गंदगी आसानी से मुख्य पाइप में न पहुंचे. इसके साथ ही वाल्व पूरी तरह खुला है या नहीं और किसी फिटिंग में ब्लॉकेज तो नहीं है, इसकी जांच भी कराएं.
सिर्फ मोटा पाइप लगाना हर समस्या का समाधान नहीं
कम पानी के प्रेशर की असली वजह पता लगाना सबसे जरूरी है. टंकी बहुत नीचे है, पाइप में ब्लॉकेज है, लाइन जरूरत से ज्यादा लंबी है या एक साथ बहुत सारे नल चल रहे हैं तो हर समस्या का समाधान अलग हो सकता है. कई मामलों में सही पाइप डिजाइन से फ्लो बेहतर किया जा सकता है, जबकि बहुत कम ग्रेविटी प्रेशर वाले सिस्टम में उचित प्रेशर बूस्टर पंप की जरूरत पड सकती है. इसलिए पूरी पाइप लाइन बदलने से पहले किसी अनुभवी प्लंबर से सिस्टम की जांच करवाने से बेवजह का खर्च बच सकता है.