₹1000KG बिकती है पहाड़ की ये चाय, MBA पास नीरज ने गांव से शुरू किया ये बिजनेस, आज है करोड़ों का टर्नओवर

₹1000KG बिकती है पहाड़ की ये चाय, MBA पास नीरज ने गांव से शुरू किया ये बिजनेस, आज है करोड़ों का टर्नओवर


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Business Success Story: उत्तराखंड के नीरज बुरांश फूल से गुलाबी चायपत्ती और प्राकृतिक सिल्क के कपड़े बनाते हैं. उनकी चायपत्ती ₹1000 किलो बिकती है और सिल्क ₹80,000 तक जाती है. नाबार्ड से जुड़कर उन्हें सब्सिडी और मुफ्त स्टॉल मिलता है. आज उनका करोड़ों का कारोबार है.

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची में रह रहे नीरज अपने पैतृक गांव उत्तराखंड में कई सारे फूल और कई भेड़ रखे हुए हैं. यह फूल बड़ा ही खास होता है. दरअसल, ये फूल बुरांश है, जिससे गुलाबी चायपती बनती है. जो कि नीले और गुलाबी रंग का होता है. साथ ही जो पीने में काफी स्वादिष्ट लगती है. इसके मात्र 100 ग्राम चाय की कीमत ₹100 तक होती है. यह ₹1000 किलो के भाव बिकती है. इससे वह तगड़ी कमाई कर लेते हैं. आइये जानते हैं नीरज के बारे में.

नीरज ने बताया कि इसके अलावा वह प्राकृतिक सिल्क का कपड़ा भी बनाते हैं. जो कि 80,000 रुपए तक बिकता है. हम लोगों ने भेड पाल रखा है. साथ ही घर पर ही यह सब तैयार किया जाता है. आज उनका खुद का ब्रांड है और पैन इंडिया लेवल पर सप्लाई होता है. सरकार के योजना का उन्हें भी लाभ मिला है. खासतौर पर हम लोग नाबार्ड से जुड़े हुए हैं.

नाबार्ड से जुड़कर मिलते है कई लाभ

उन्होंने बताया कि वह सरकार के नाबार्ड से जुड़े हुए हैं. नाबार्ड में जो बुनकर होते हैं, मतलब जो खुद से हाथ से अपनी चीजों को बनाते हैं. उनके लिए लोन में काफी सब्सिडी मिल जाती है. हमें 90% तक सब्सिडी मिल जाती है. इसके अलावा ऑल ओवर इंडिया में हर जगह अपने स्टॉल लगाने का सरकारी मेले में मौका मिलता है. वह भी एकदम मुफ्त. यह दोनों चीज हमारे बिजनेस को और भी आगे तक ले जा रही है.

नीरज ने बताया कि आज हमारे पास आपको कई तरह के चायपत्ती जैसे बुरांश, कफल, मसाला चायपत्ती यह सारी चीज देखने को मिलेगी. मसाला चाय पत्ती पहाड़ी इलाकों में जो मसाले होते हैं, उनको पीसकर बनाए जाते हैं और यह कफल गुलाबी फूल है, पहाड़ी रीजन में इसकी खेती होती है, हमारा खुद का एरिया है. जहां पर इसकी खेती कर इसको सुखाकर इसको पैकेजिंग का काम करवाते हैं. यह सब गांव की महिलाएं करती हैं हम उनको ट्रेनिंग देते हैं.

उनके चायपत्ती की है जबरदस्त डिमांड 

नीरज ने बताया कि उनकी यह चायपत्ती करीबन ₹1000 किलो बिकती है, लेकिन फिर भी इसकी डिमांड ऐसी है कि हम पूर्ति नहीं कर पाते हैं. दरअसल, ये ऐसा है कि थोड़ा सा डालिए और पी लीजिए. आपको चीनी या कुछ और डालने की जरूरत भी नहीं है. यह हर्बल टी है. हमारे कस्टमर पूरे इंडिया के हर एक स्टेट में हैं. आज सालाना उनका टर्नओवर करोड़ों में है.

40 साल किया नौकरी

40 साल नौकरी किया और एमबीए करने के बाद अच्छी खासी दिल्ली में नौकरी कर रहा था, लेकिन मन में था कि अपना करो जब अपनी जमीन है. ऐसे में गांव में अपनी खेती बाड़ी थी तो क्यों ना इसी को इस्तेमाल किया जाए. वहीं से आइडिया आया कि यह फूल का चाय हम पहाड़ी ही सब क्यों पिये. पूरे देशवासी को यह हर्बल टी पिलाई जाए और फिर यह सिलसिला शुरू हुआ और आज उनके साथ 200 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं. जो आत्मनिर्भर भी हैं.



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