America Tariff : भारत के पास 100 फीसदी टैरिफ से बचने कोई जुगाड़ है या नहीं, AI ने दिखाए 7 रास्ते

America Tariff : भारत के पास 100 फीसदी टैरिफ से बचने कोई जुगाड़ है या नहीं, AI ने दिखाए 7 रास्ते


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भारत के पास 100% टैरिफ से बचने कोई जुगाड़ है या नहीं, AI ने दिखाए 7 रास्ते

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America Tariff on India : इस समय अगर कोई यह सवाल करे कि दुनिया का सबसे खुश इंसान कौन है तो जवाब होगा डोनाल्ड ट्रंप. आखिर हों भी क्यों न, उन्हें अपना मनमाफिक हथियार जो मिल गया है. अमेरिका ने उस कानून को हरी झंडी दे दी है, जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की छूट देता है. अब उनके मन में इस बात पर लड्डू फूट रहे हैं कि भारत को घेरना आसान हो जाएगा. अब ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के पास इस टैरिफ बम से बचने का कोई जुगाड़ है या नहीं.

इस सवाल को जब एआई से पूछा गया तो उसने 7 ऐसे रास्ते सुझाएं हैं जो भारत पर अमेरिका के संभावित टैरिफ के प्रभाव को कम कर सकते हैं. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी भारत पर रूस के साथ कारोबार करने की वजह से टैरिफ और पेनाल्टी लगा चुके हैं. उन्होंने पिछले साल ही भारत पर 25 फीसदी पेनाल्टी लगाई थी और रूस के साथ कारोबार खत्म करने का दबाव डाला था. भारत अभी अपनी जरूरत का करीब आधा हिस्सा तेल रूस से ही खरीदता है और यही बात अमेरिका को नागवार गुजरती है, जिस पर दबाव बनाने की कोशिश एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू कर दी है. भारत के पास अभी क्या-क्या रास्ते हैं, इस पर एक नजर डालते हैं.

सबसे पहला रास्ता तो वही है, जिसके लिए डोनाल्ड ट्रंप इतने लंबे समय से झटपटा रहे हैं. उनकी मंशा है कि भारत दबाव में आकर उनके मनमाफिक ट्रेड डील कर डाले. यही वजह है कि ट्रंप बार-बार टैरिफ की धमकी देते रहते हैं. भारत अगर अमेरिका से ट्रेड डील करता है तो हमारे सामान को अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच मिल सकती है और तब 100 फीसदी टैरिफ से छूट अथवा इसकी दरों में कटौती की संभावना बन सकती है. हालांकि, इस पर आगे बढ़ते समय काफी सावधानी की जरूरत होगी क्योंकि बदले में अमेरिका अपने डेयरी और एग्री प्रोडक्ट को भारतीय बाजार में उतारने का दबाव डाल रहा है.

अमेरिका के 100 फीसदी टैरिफ से बचने का दूसरा तरीका वही है, जो ट्रंप चाहते हैं कि भारत अपना कारोबारी रिश्ता रूस के साथ खत्म कर ले. ट्रंप कई बार खुलेआम कह चुके हैं कि भारत को रूस से तेल खरीद बंद करके अमेरिका, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका जैसे अन्य देशों से खरीदना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो अमेरिका का टैरिफ दबाव तो कम हो जाएगा, लेकिन भारत के लिए तेल खरीदना महंगा पड़ सकता है. वैसे भी भारत अभी करीब 42 देशों से कच्चे तेल की खरीद कर रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रूस की ही है.

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भारत के पास 100 फीसदी टैरिफ के असर को कम करने का एक रास्ता यह भी है कि वह अमेरिका से कुछ उत्पादों पर छूट की अपील कर सकता है. इसमें दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, जरूरी उपकरण आदि शामिल हैं. चूंकि, इन प्रोडक्ट की जरूरत अमेरिका को भी है तो वह अपने नागरिकों के हितों को देखते हुए इन उत्पादों के आयात पर टैरिफ से कुछ राहत दे सकता है. अमेरिका आज भी जेनरिक दवाओं के लिए काफी हद तक भारत पर ही निर्भर है. यही वजह है कि ट्रंप ने पिछली बार भी टैरिफ लगाते समय फार्मा सेक्टर को इससे बाहर रखा था.

भारत ट्रंप के 100 फीसदी टैरिफ के असर को अमेरिकी कंपनियों के लिए निवेश के नियम सरल बनाकर कम कर सकता है. भारत को ऐपल जैसी कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिका को उसकी सप्लाई में संतुलन बनाकर रखना होगा. ऐसे में अमेरिका भी भारत के साथ अपने कारोबारी रिश्ते सुधारने पर जोर दे सकता है. हालांकि, ट्रंप को यह बात काफी अखरती है कि उसकी कंपनियां भारत में आकर निवेश करती हैं. उन्होंने पिछले दिनों अमेरिकी कंपनियों को इस बारे में धमकी भी दी थी. लिहाजा इस रास्ते पर बहुत समझदारी के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा.

ट्रंप ने टैरिफ का सारा मायाजाल रचा ही इसलिए है कि भारत अन्य देशों के बजाय उससे अपना सामान खरीदना शुरू कर दे. अभी अमेरिका को भारत के साथ करीब 90 अरब डॉलर का व्यापार घाटा सहना पड़ता है, जिसे किसी भी कीमत पर कम करना चाहते हैं. ट्रंप की मंशा है कि भारत उससे एलएनजी, कच्चा तेल, एयरक्राफ्ट, रक्षा उपकरण, मशीनरी, एग्री प्रोडक्ट जैसी चीजें खरीदना शुरू कर दे. इन सभी चीजों की खरीद बढ़ती है तो अमेरिका को अपना व्यापार घाटा सुधारने में मदद मिलेगी और वह भारत पर टैरिफ कम कर सकता है.

भारत के पास 6वां रास्ता ये है कि वह अमेरिका को भूलकर अपने कारोबार का डायवर्सिफिकेशन करे और अन्य बड़े देशों के साथ हाथ मिलाए. भारत पहले से ही मुक्त व्यापार समझौतों के जरिये कई देशों के साथ कारोबारी संबंध बढ़ा चुका है. इसमें यूरोपियन यूनियन, यूके, कनाडा, मिडिल ईस्ट और एशियाई देश शामिल हैं. इससे भारत की अमेरिका को सामान बेचने की मजबूरी कम हो जाएगी और उसे टैरिफ से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. भारत मजबूती के साथ इसी विकल्प पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन अमेरिका अभी उसका सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है और इसका पूरी तरह विकल्प खोजना आसान नहीं होगा, इसमें लंबा समय लग सकता है.

भारत के पास अमेरिका के 100 फीसदी टैरिफ से राहत पाने का एक और रास्ता है कानूनी विकल्प. भारत चाहे तो विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ में टैरिफ को चुनौती दे सकता है. हालांकि, यह कानूनी चुनौती का रास्ता है और काफी लंबा पड़ सकता है. यह रास्ता टैरिफ से राहत दिलाने का तात्कालिक समाधान नहीं देता है. यही वजह है कि अभी तक भारत ने डब्ल्यूटीओ में टैरिफ को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी है.

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