सोने-चांदी की कीमतों में आज 5 अक्टूबर को ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिल रहा है. गोल्ड का रेट 147724 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी 490 रुपये उछलकर 226367 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा है. इंटरनेशनल मार्केट की बात करें तो गोल्ड रेट 0.20 फीसदी की तेजी के साथ 4170 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है. चांदी 1.73 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.
अमेरिका-ईरान तनाव का असर सोने-चांदी जैसे बुलियन बाजार पर बना हुआ है. अगर दोनों देशों के बीच टेंशन और बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का रुख कर सकते हैं, जिससे इसकी कीमतों को सहारा मिल सकता है. हालांकि, हाल के दिनों में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है, जिससे बुलियन की कीमतों पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन का असर भी कुछ कम हुआ है.
सोने की कीमतों का आज कितना रेट?
पिछले हफ्ते MCX पर दिसंबर का सोना करीब 2% गिरकर ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 4% टूटकर ₹2.25 लाख प्रति किलो पर आ गई थी. अलग-अलग शहरों में 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के भाव स्थानीय बाजार, टैक्स और अन्य लागतों के कारण थोड़ा अलग हैं. दिल्ली में 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,36,890 प्रति 10 ग्राम है, जबकि 24 कैरेट सोना ₹1,49,320 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा है. जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में भी सोने की कीमतें दिल्ली के समान हैं.
वहीं, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में सोना थोड़ा सस्ता है. इन शहरों में 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,36,740 प्रति 10 ग्राम और 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,49,170 प्रति 10 ग्राम है. यानी दिल्ली के मुकाबले इन शहरों में दोनों कैरेट के सोने की कीमत ₹150 कम है. इसके अलावा, अहमदाबाद और भोपाल में 22 कैरेट सोना ₹1,36,790 प्रति 10 ग्राम और 24 कैरेट सोना ₹1,49,220 प्रति 10 ग्राम के भाव पर है.
किन फैक्टर्स का सोने-चांदी की कीमतों पर असर?
पिछले हफ्ते डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव बना और निवेशकों ने मुनाफावसूली की. आगे भी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड सोने की चाल के लिए अहम रहेंगे. डॉलर या यील्ड में लगातार तेजी आती है तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि इनमें नरमी से सोने को सहारा मिल सकता है.
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने पर सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग बढ़ सकती है. वहीं, चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव रह सकता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी होता है. घरेलू बाजार में निवेशकों की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक और अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगी.