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Nagaur Kharnal Tejaji temple construction: नागौर के खरनाल में लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जन्मस्थली पर लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है. इसमें केवल 99% शुद्धता वाले मकराना के सफेद संगमरमर का उपयोग किया जा रहा है. निर्माण में सीमेंट-बजरी की जगह तांबा-पीतल की इंटरलॉकिंग तकनीक अपनाई जा रही है. अयोध्या के राम मंदिर के शिल्पकार रमजान इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं. मंदिर में सोमनाथ, सांवरिया सेठ और राम मंदिर की वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी. 108 फीट ऊंचे इस तीन मंजिला मंदिर का 40% काम पूरा हो चुका है.
Nagaur: राजस्थान के नागौर जिले में स्थित खरनाल में लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जन्मस्थली पर एक बेहद भव्य और आलौकिक मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. नया बन रहा तेजाजी का यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, नायाब शिल्पकारी और निर्माण तकनीक के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस विशाल मंदिर के निर्माण पर अनुमानित तौर पर करीब 200 करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस मंदिर की सबसे बड़ी और खास विशेषता यह है कि इसके निर्माण में किसी अन्य पत्थर के बजाय केवल और केवल विश्व प्रसिद्ध मकराना के सफेद संगमरमर (मार्बल) का ही उपयोग किया जा रहा है, जो इसकी भव्यता में चार चांद लगा रहा है.
इस पावन मंदिर के निर्माण से कई नामी और कुशल हस्तियां जुड़ी हुई हैं. अयोध्या में भगवान रामलला के भव्य गर्भगृह के निर्माण में अपनी कला का जौहर दिखा चुके मकराना के प्रसिद्ध शिल्पी रमजान इस मंदिर की नक्काशी और पत्थरों को तराशने के काम की मुख्य कमान संभाले हुए हैं. उनकी देखरेख में मंदिर का निर्माण कार्य बहुत ही बारीकी और कलात्मक ढंग से किया जा रहा है. वर्तमान में मंदिर निर्माण का करीब 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है. अब आने वाले दिनों में मंदिर के विशाल गुंबद और ऊपरी हिस्से का काम तेजी से शुरू होने जा रहा है.
मजबूत फाउंडेशन और इंटरलॉकिंग तकनीक
मंदिर की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका निर्माण करीब 32 फीट गहरे और अत्यधिक मजबूत फाउंडेशन के ऊपर किया जा रहा है. इस फाउंडेशन का करीब 25 फीट हिस्सा जमीन के पूरी तरह अंदर है जबकि 7 फीट हिस्सा जमीन से ऊपर है. इस मजबूत बेस से लेकर करीब 20 फीट तक मंदिर का मुख्य ढांचा पूरी तरह तैयार किया जा चुका है. इस मंदिर की सबसे अनोखी बात इसका निर्माण तरीका है. इसमें सीमेंट और बजरी का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. मकराना के मार्बल के बड़े-बड़े टुकड़ों और हिस्सों को तांबे और पीतल की पत्तियों की मदद से इंटरलॉकिंग तकनीक के जरिए मजबूती से आपस में जोड़ा जा रहा है.
भव्य वास्तुकला और एक लाख घनफीट मार्बल का अनुमान
इस भव्य मंदिर में कुल 306 कलात्मक स्तंभ (खंभे) बनाए जाएंगे. तीन मंजिला इस मुख्य मंदिर की कुल ऊंचाई करीब 108 फीट प्रस्तावित की गई है, जिसकी शिखरबद्ध संरचना दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगी. शिल्पी रमजान की सीधी देखरेख में मकराना स्थित विशेष वर्कशॉप में लगभग 100 कुशल कारीगर दिन-रात संगमरमर के पत्थरों को तराशने का काम कर रहे हैं. इसके अलावा खरनाल मंदिर परिसर में भी 15 से 20 कारीगर पत्थरों को करीने से जोड़ने और तांबा-पीतल की इंटरलॉकिंग का काम संभाल रहे हैं. अब तक लगभग 17 से 18 हजार घनफीट मार्बल मकराना से खरनाल पहुंचाया जा चुका है. पूरे मंदिर के निर्माण में कुल मिलाकर लगभग एक लाख घनफीट मार्बल इस्तेमाल होने का अनुमान लगाया गया है.
देश के प्रसिद्ध मंदिरों की दिखेगी अद्भुत झलक
इस मंदिर की वास्तुकला में भारत के कई अन्य प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिरों की विशेषताओं और शैलियों को खूबसूरती से शामिल किया जा रहा है. मंदिर के गर्भगृह को ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर की शैली से प्रेरित होकर तैयार किया जा रहा है, जबकि इसके शिखर में सांवरिया सेठ मंदिर जैसी भव्यता और दिव्यता दिखाई देगी. इसके अलावा, मंदिर के मुख्य द्वार की शानदार डिजाइन में अयोध्या के राम मंदिर की खास झलक देखने को मिलेगी. मंदिर के स्तंभों पर दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली की नक्काशी के साथ-साथ वीर तेजाजी महाराज के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को बेहद खूबसूरती से उकेरा जाएगा.
99% कैल्शियम वाला मार्बल, समय के साथ बढ़ेगी चमक
मुख्य शिल्पी रमजान के अनुसार, इस मंदिर में लगाया जा रहा मकराना मार्बल अत्यंत उच्च गुणवत्ता और शुद्धता वाला है. इस विशेष पत्थर में करीब 99 प्रतिशत कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है, जबकि आयरन या लोहे का अंश इसमें बिल्कुल न के बराबर होता है. इस खास विशेषता के कारण इस सफेद संगमरमर पर कभी भी पीलेपन का असर नहीं पड़ेगा. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि जैसे-जैसे इसकी घिसाई होती है, पानी से सफाई की जाती है और लंबे समय तक उपयोग होता है, वैसे-वैसे इसकी चमक और अधिक बढ़ती जाती है. खरनाल में बन रहा यह तेजाजी मंदिर आने वाले समय में आस्था और वास्तुकला का एक बेजोड़ और ऐतिहासिक केंद्र बनेगा.