Swimming Tradition: ये जंगली फल नदी में डूबता ही नहीं, इसी के सहारे सीखते हैं बच्चे तैराकी

Swimming Tradition: ये जंगली फल नदी में डूबता ही नहीं, इसी के सहारे सीखते हैं बच्चे तैराकी


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Swimming Tradition: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे एक अनोखी परंपरा है जहां बच्चे एक खास जंगली फल ‘तुमडा’ की मदद से तैराकी सीखते हैं. यह फल पानी में नहीं डूबता और बच्चों को तैरने में सहारा देता है, जिससे कई बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई है.

Swimming Tradition: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में ताप्ती नदी के किनारे आज भी तैराकी सीखने की एक ऐसी अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. यहां कभी आधुनिक तैराकी उपकरणों के बजाय एक खास जंगली फल बच्चों का सहारा बनता था. इस फल को स्थानीय भाषा तुमडा कहा जाता है. पानी में तैरने वाले इस फल की मदद से बच्चों को नदी में तैरना सिखाया जाता है. तुमडा फल के दम पर स्थानीय लोग ताप्ती नदी में तैराकी कर सकते हैं और यहां पर सीखी हुई तैराकी राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाती है. आज भी कई लोग अपने बच्चों को तुमड़े बांधकर नदी में तैरना सिखाते हैं क्योंकि यह नदी में डूबता नहीं है जिससे बच्चे तैराकी सीख जाते हैं.

एक्सपर्ट तैराक ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को मोहम्मद यूसुफ ने जानकारी देते हुए बताया कि ताप्ती नदी के घाटों पर तैराकी सीखने वाले बच्चों की शुरुआत तुमडे से होती है. तुमडे को रस्सी या कपड़े की मदद से कमर के पास बांध दिया जाता है. पानी में उतरने के बाद यह फल बच्चे को तैरते रहने में सहारा देता है. शुरुआत में बच्चा इसी के सहारे हाथ-पैर चलाने का अभ्यास करता है. धीरे-धीरे शरीर का संतुलन बनने लगता है और तैराकी का आत्मविश्वास बढ़ता जाता है.

इसी फल से सीखते हैं तैराकी
स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले के समय में ताप्ती नदी ही कई बच्चों के लिए तैराकी का प्राकृतिक प्रशिक्षण केंद्र हुआ करती थी. नदी के पानी में नियमित अभ्यास करते हुए बच्चे तैरने के साथ-साथ पानी की चाल गहराई और शरीर का संतुलन समझना सीखते थे. जब उन्हें भरोसा हो जाता था तो धीरे-धीरे तुमडे का सहारा भी छोड़ दिया जाता था. इस पारंपरिक तरीके की खासियत यह थी कि इसमें किसी महंगे उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती थी. नदी किनारे मिलने वाला यह जंगली फल ही बच्चों के लिए शुरुआती सुरक्षा और अभ्यास का साधन बन जाता था. स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी तरह तैराकी सीखने वाले कई बच्चों ने आगे चलकर बेहतर प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक अपनी पहचान बनाई.

आज भले ही तैराकी सीखने के लिए स्विमिंग पूल प्रशिक्षक और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं लेकिन बुरहानपुर की ताप्ती नदी से जुड़ी तुमडे के सहारे तैराकी सीखने की यह परंपरा स्थानीय संस्कृति और पुराने समय की सीखने की पद्धति की एक अनोखी झलक दिखाती है. यह कहानी बताती है कि संसाधन सीमित हों तो भी हुनर और हौसले के दम पर मंजिल हासिल की जा सकती है.



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