Jyotirlinga Padyatra: 11 हजार KM की पदयात्रा, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का लक्ष्य, 5 महीने से पैदल चल रहे धौलपुर के चंद्रकांत

Jyotirlinga Padyatra: 11 हजार KM की पदयात्रा, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का लक्ष्य, 5 महीने से पैदल चल रहे धौलपुर के चंद्रकांत


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11 हजार KM का संकल्प, 3500 KM पूरे, 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन को निकले चंद्रकांत

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Dholpur Chandrakant Chauhan 12 Jyotirlinga Padyatra: धौलपुर के सैंपऊ उपखंड के मालोनी पंवार गांव निवासी एडवोकेट चंद्रकांत चौहान 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए करीब 11 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले हैं. राजस्थान हाई कोर्ट जयपुर से 27 अप्रैल को शुरू हुई उनकी यात्रा करीब पांच महीने से जारी है और अब तक वे लगभग 3500 किलोमीटर पैदल चल चुके हैं. इस समय चंद्रकांत आंध्र प्रदेश में हैं और श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की ओर बढ़ रहे हैं. वे केदारनाथ, काशी विश्वनाथ और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर चुके हैं. यात्रा के दौरान वे धार्मिक स्थलों के साथ अलग-अलग राज्यों की संस्कृति और लोगों को करीब से समझ रहे हैं. चंद्रकांत पैदल यात्रा के जरिए देहदान, अंगदान, कानूनी अधिकारों और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता का संदेश भी दे रहे हैं. उनका कहना है कि यह यात्रा आस्था के साथ आत्ममंथन और समाज से जुड़ने का माध्यम है.

धौलपुर. राजस्थान के धौलपुर जिला अंतर्गत सैंपऊ उपखंड के मालोनी पंवार गांव निवासी एडवोकेट चंद्रकांत चौहान 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए अनोखी पैदल यात्रा पर निकले हैं. राजस्थान हाई कोर्ट जयपुर से 27 अप्रैल को शुरू हुई उनकी यह यात्रा अब करीब 5 महीने पूरे कर चुकी है. चंद्रकांत चौहान अब तक करीब 3500 किलोमीटर पैदल चल चुके हैं और इस समय आंध्र प्रदेश पहुंच गए हैं. चंद्रकांत चौहान ने अपनी यात्रा के दौरान केदारनाथ, काशी विश्वनाथ और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर लिए हैं.

इसके अलावा वे जगन्नाथ धाम पुरी समेत कई धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों से होकर गुजर चुके हैं. अब उनकी यात्रा आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की ओर बढ़ रही है. पूरी यात्रा करीब 11 हजार किलोमीटर की है और उनका लक्ष्य सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर यात्रा पूरी करना है. चंद्रकांत बताते हैं कि यह यात्रा उनके लिए सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आस्था के साथ आत्ममंथन का है.

अंगदान के लिए भी लोगों को कर रहे हैं जारूक

देश को करीब से समझने और समाज में जागरूकता फैलाने का माध्यम भी मानते हैं. पैदल चलते हुए वे अलग-अलग राज्यों के लोगों से मिल रहे हैं और उनके रहन-सहन, संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझ रहे हैं. यात्रा के दौरान चंद्रकांत चौहान लोगों को देहदान और अंगदान के लिए जागरूक कर रहे हैं. इसके साथ ही वे लोगों को कानूनी अधिकारों की जानकारी देने और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक करने का संदेश भी दे रहे हैं.

मंजिल की चिंता नहीं, लगातार चलते रहना है काम

उनका कहना है कि पैदल यात्रा के दौरान उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों को समझने और लोगों से सीधे जुड़ने का मौका मिल रहा है. चंद्रकांत चौहान का कहना है कि अब उन्हें मंजिल की चिंता नहीं है. उनका काम लगातार चलते रहना है. उनका विश्वास है कि जब भगवान उन्हें जयपुर से इतनी दूर तक लेकर आए हैं, तो आगे का रास्ता भी वही दिखाएंगे मेरा भरोसा रास्ते पर नहीं, रास्ता दिखाने वाले पर है. इसी विश्वास के साथ वे 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं.



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