Last Updated:
Amethi News: अमेठी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मूंज क्राफ्ट से आत्मनिर्भर बन रही हैं. वे मूंज के उत्पाद बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है. आपको बता दें कि मूंज क्रॉप्ट का सामान तैयार करने के लिए महिलाएं पहले नदी किनारे जाती हैं वहां से घास को ले आती है. इसके साथ ही फिर उसकी साफ सफाई करती हैं साफ सफाई के बाद उसे अच्छी तरीके से सुखाकर फिर उसमें नक्काशी करती हैं और करीब एक से दो दिन में अलग-अलग सामान अलग-अलग महिलाएं तैयार करती हैं.
अमेठीः राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह महिलाओं की जिंदगी में एक नया सवेरा ला रहे हैं. जो महिलाएं कभी काम के लिए भटकती थी, पैसों की आर्थिक तंगी थी, आज उन्हीं महिलाओं की किस्मत समूह के उत्पादों के जरिए चमक रही है. महिलाएं अपनी तस्वीर और तकदीर दोनों बेहतर कर रही हैं और उनके बने उत्पाद की डिमांड आज अमेठी के साथ-साथ बाहर भी हो रही. एक जनपद एक उत्पाद के तहत हर जनपद में कुछ ना कुछ खास है. ऐसे में अमेठी जिले में मंच क्राफ्ट का काम महिलाओं की खुशहाली और आर्थिक समृद्धि की पहचान बना है.
मूंज क्राफ्ट करती हैं तैयार
मूंज क्राफ्ट का काम अमेठी मे अपने अलग-अलग उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है. जहा घंटे की मेहनत और नकाशी के जरिए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दर्जनों उत्पाद तैयार करती हैं. इन उत्पादों में कुर्सी मेज से लेकर रोटी का डब्बा पेनबॉक्स डिजाइनिंग कप पूजा की आसानी सहित अन्य चीजें शामिल है. खास बात है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को वित्तीय सहायता भी दी जाती है जिसके जरिए उनका आर्थिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता.
मूंज क्रॉप्ट का सामान तैयार करने के लिए महिलाएं पहले नदी किनारे जाती हैं वहां से घास को ले आती है. इसके साथ ही फिर उसकी साफ सफाई करती हैं साफ सफाई के बाद उसे अच्छी तरीके से सुखाकर फिर उसमें नक्काशी करती हैं और करीब एक से दो दिन में अलग-अलग सामान अलग-अलग महिलाएं तैयार करती हैं.
5 लाख पर 25 प्रतिशत का अनुदान
इस काम को शुरू करने के लिए महिलाओं को कहीं भटकने की जरूरत नहीं बल्कि आसानी से यह काम वे शुरू कर सकती हैं. इसके लिए उन्हें बिना किसी गारंटी के 5 लख रुपए की धनराशि पर 25 छूट मिल जाएगी महिलाओं को अपने रोजगार की शुरुआत करने के लिए 11 महिला सदस्यों का नाम उनका आधार कार्ड बैंक पासबुक मोबाइल नंबर और सभी का निवास प्रमाण पत्र जमा करना होगा. इसके बाद उपायुक्त उद्योग कार्यालय से महिलाएं इस रोजगार के लिए अपनी शुरुआत आसानी से कर सकते हैं. खास बात यह है कि जो उत्पाद तैयार होते हैं वह कभी खराब नहीं होते और सालों साल तक चलते हैं. उनकी कम से कम 200 और ज्यादा से ज्यादा फिर हजार 2000 तक की भी बिक्री आसानी से हो जाती है. ऐसे में महीने में आसानी से 25 से 30 हजार की कमाई घर बैठे की जा सकती है और बिजनेस में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.
नहीं लेना पड़ता है किसी से कर्ज
समूह में जुड़ी एक महिला मंजू मौर्य बताती है कि पहले उन लोगों को पैसों के लेनदेन के लिए दूसरों से कर्ज लेना पड़ता था लेकिन आज स्वयं सहायता समूह के जरिए छोटी-छोटी बचत कर उन्हें जब जरूरत पड़ती है. उन्हें आसानी से एक मुश्त धनराशि मिल जाती है और स्वयं सहायता समूह से उनको अच्छा फायदा हो रहा है और उत्पादों को तैयार कर उनकी बिक्री करे हुए अच्छी कमाई भी कर रही है.
महिला शीला प्रजापति बताती है कि महिलाओं को स्वयं सहायता समूह में जोड़े जाने से कई फायदे हैं. उनकी किस्मत बदल रही है उन्हें फायदा हो रहा है और उन्हें समाज में एक पहचान भी मिली है. जो पहले नहीं उन्होंने कहा कि महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं समूह के जरिए उन्हें अलग-अलग फायदे भी दिए जा रहे हैं. जैसे उन्हें आवास मिल जा रहा है अन्य व्यवस्थाएं दी जा रही है. जिसके कारण समूह के उत्पादों से पैसे और सरकार की योजनाओं का लाभ एक साथ दोनों मिल जा रहा है.
टूल किट भी मिलता है निशुल्क
महिलाओं को टूल किट और प्रशिक्षण के लिए भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. उपयुक्त उद्योग कार्यालय अमेठी में महिलाओं को आवेदन के बाद उत्पाद को तैयार करने वाली टूल किट के साथ-साथ यदि उन्हें अनुभव कम है और उन्हें प्रशिक्षण लेना है इसकी सुविधा पूरी तरीके से निशुल्क उपलब्ध होती है. महिलाएं किसी भी समय अपना आवेदन कार्यालय के कार्य दिवस के दौरान कर सकती हैं.