US Troops Phuket Trip। George H W Bush Carrier Reached Thailand। जंग के मैदान से थाईलैंड पहुंचे 4800 US सोल्‍जर, फुकेट के बीच पर 6 दिन फुल मौज

US Troops Phuket Trip। George H W Bush Carrier Reached Thailand। जंग के मैदान से थाईलैंड पहुंचे 4800 US सोल्‍जर, फुकेट के बीच पर 6 दिन फुल मौज


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George H W Bush Carrier Reached Thailand: छह महीने तक मिडिल ईस्ट में अमेरिकी अभियानों को सपोर्ट करने के बाद USS George H.W. Bush करीब 4,800 सैन्यकर्मियों के साथ थाईलैंड के फुकेट पहुंचा है. अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर का यह पहला पोर्ट कॉल है. 4 से 9 अक्टूबर तक सैनिक आराम के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों, घूमने और फुटबॉल मैच में हिस्सा लेंगे. इससे पहले USS Abraham Lincoln भी सितंबर में करीब 5,000 कर्मियों के साथ थाईलैंड पहुंचा था.

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सभी सैनिक छह दिन के लिए थाईलैंड पहुंचे हैं. (File Photo)

युद्ध के मैदान की उस सुलगती हुई आग, धुएं और आसमान चीरती मिसाइलों की गड़गड़ाहट से अचानक सीधे दुनिया के सबसे खूबसूरत बीच पर उतरने का रोमांच क्या होता है, जरा इन अमेरिकी सैनिकों से पूछिए. पिछले छह महीनों से मिडिल ईस्ट के खतरनाक समंदर में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत मौत का तांडव संभाल रहे दुनिया के सबसे खूंखार एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H.W. Bush ने आखिरकार चैन की सांस ली है. अपने 4,800 जांबाज नाविकों के साथ यह विशालकाय अमेरिकी युद्धपोत सीधे थाईलैंड के फुकेट आइलैंड पर आ धमका है. गोलियों और बारूद की महक से दूर, अब ये खूंखार कमांडोज फुकेट के नीले समंदर के बीच फुटबॉल के मैदान और सांस्कृतिक सैर-सपाटे में मशगूल होने जा रहे हैं. थाइलैंड की धरती पर अमेरिकी फौज का यह हाई-प्रोफाइल जमावड़ा वाकई देखने लायक है.

मिडिल ईस्ट मिशन के बाद फुकेट पहुंचा अमेरिकी युद्धपोत
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H.W. Bush रविवार को थाईलैंड के फुकेट पहुंच गया. इसके साथ करीब 4,800 अमेरिकी सैन्यकर्मी भी आए हैं. छह महीने तक मिडिल ईस्ट में मिशन पर रहने के बाद अब इन्हें आराम का मौका मिला है. कैरियर समुद्र में लंगर डाले हुए है और सैनिक नावों के जरिए तट पर पहुंच रहे हैं. यह फुकेट में कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की पहली पोर्ट कॉल है.

छह महीने तक मिडिल ईस्ट में तैनाती
USS George H.W. Bush एक Nimitz-class एयरक्राफ्ट कैरियर है. अमेरिकी नौसेना के मुताबिक पिछले छह महीनों में इस कैरियर और उसके स्ट्राइक ग्रुप ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी अभियानों को सपोर्ट किया. इसमें Operation Epic Fury और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी से जुड़े मिशन भी शामिल रहे. इन अभियानों का मकसद समुद्री सुरक्षा और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना था.

मार्च में अमेरिका से निकला था युद्धपोत
अमेरिकी नौसेना के मुताबिक George H.W. Bush Carrier Strike Group मार्च में Norfolk और Mayport से रवाना हुआ था. इसके बाद से फुकेट उसकी पहली पोर्ट कॉल है. यानी लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशनल ड्यूटी करने के बाद अब चालक दल को कुछ दिन जमीन पर बिताने का मौका मिला है.

फुकेट में घूमना और फुटबॉल मैच
फुकेट में अमेरिकी सैनिकों के लिए आराम के साथ कई गतिविधियां भी रखी गई हैं. वे स्थानीय समुदाय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. सैनिकों के लिए घूमने के टूर भी आयोजित किए जाएंगे. इसके अलावा अमेरिका और थाईलैंड के बीच फुटबॉल मैच भी होगा. स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक सैनिक 4 से 9 अक्टूबर तक फुकेट में रहेंगे.

थाईलैंड में फिर दिखी अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी
यह हाल के दिनों में थाईलैंड में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की दूसरी बड़ी पोर्ट कॉल है. सितंबर में USS Abraham Lincoln करीब 5,000 नाविकों और मरीन के साथ Laem Chabang पहुंचा था. स्थानीय प्रशासन ने तब अनुमान लगाया था कि अमेरिकी सैन्यकर्मी रोजाना बड़ी रकम खर्च कर सकते हैं. अब George H.W. Bush की मौजूदगी से फुकेट में भी अमेरिकी सैन्यकर्मियों की आवाजाही बढ़ी है.

अमेरिका का अहम सहयोगी है थाईलैंड
थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य साझेदार है. दोनों देशों के बीच औपचारिक रक्षा संधि भी है. ऐसे में अमेरिकी युद्धपोत की फुकेट यात्रा केवल आराम तक सीमित नहीं है. यह दोनों देशों के लंबे सैन्य और रणनीतिक रिश्तों की भी झलक देती है.



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