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Balaghat News: कान्हा नेशनल पार्क (Kanha National Park History) का इतिहास काफी पुराना है. दरअसल यह पूरा क्षेत्र गोंडवाना राजवंश के अधीन था. यहां पर खासतौर से कन्हार मिट्टी पाई जाती थी. कन्हार यानी चिकनी दोमट मिट्टी. साल 1879 में कान्हा के संरक्षण की शुरुआत हुई.
बालाघाट. मध्य प्रदेश देश का सबसे ज्यादा नेशनल पार्क वाला राज्य है. यहां पर कान्हा नेशनल पार्क सहित 11 राष्ट्रीय उद्यान हैं. एमपी में एक जिला है, जहां पर एक राष्ट्रीय उद्यान और एक वन्य प्राणी मनोरंजन क्षेत्र है. दरअसल बालाघाट में 53 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जो एमपी में सबसे ज्यादा है. यहीं वजह है कि यहां पर प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्र है. तीन महीने तक यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए बंद था लेकिन एक अक्टूबर के साथ ही यह क्षेत्र फिर से पर्यटकों के लिए खुल गया. शुरुआती दिनों में वाइल्ड लाइफ को निहारने में पर्यटकों का उत्साह काफी देखने को मिला. यहां पर न सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी सैलानी भी इसके खुलने के पहले दिन से आने लगे हैं लेकिन कान्हा नेशनल पार्क में ऐसा क्या खास है, जो यहां पर सिर्फ देशी ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी आते हैं, आइए जानते हैं.
कान्हा नेशनल पार्क का इतिहास काफी पुराना है. दरअसल यह पूरा क्षेत्र गोंडवाना राजवंश के अधीन ही था. यहां पर खासतौर से कन्हार मिट्टी पाई जाती थी. कन्हार यानी चिकनी दोमट मिट्टी. साल 1879 में ही कान्हा के संरक्षण की शुरुआत की गई. फिर साल 1880 में बालाघाट और मंडला के इस इलाके पर रुडयार्ड किपलिंग ने अपनी किताब जंगल बुक में पेंच नेशनल पार्क के साथ इस इलाके भी जिक्र किया था. साल 1935 में इसे वन्यजीव अभयारण्य बनाया गया.
ऐसे मिला नेशनल पार्क का दर्जा
साल 1947 में भारत आजाद तो हुआ लेकिन तब भी कुछ राज्यों में राजा-महाराजाओं का शासन था. ऐसे में आजादी के बाद के चार सालों तक विजयनगरम के राजा ने कान्हा के क्षेत्र में आकर 30 बाघों का शिकार किया. इसके बाद देश में कई पर्यावरणविदों और प्रेमियों में आक्रोश बढ़ने लगा. इसी के बाद कान्हा को एक जून 1955 को नेशनल पार्क का दर्जा मिल गया. जिसके चलते कान्हा नेशनल पार्क की डायवर्सिटी बची रही.
नेशनल पार्क में चार तरह के वन
कान्हा नेशनल पार्क में घास के मैदान, साल के चौड़ी पत्ती वाले वन और बांस के मिश्रित वन शामिल हैं. एक ही पार्क में चार तरह के वन हैं, जहां कई वन्यप्राणी रहते हैं. कान्हा नेशनल पार्क बाघ, बारहसिंगा, सुस्त भालू, बायसन, पैंगोलिन, लोमड़ी सहित कई दुर्लभ जीवों का घर है. इतना ही नहीं, यहां पर आपको कई ऐसे पक्षी दिखेंगे, जो आपने कभी नहीं देखे होंगे.
तीन गेटों से एंट्री
कान्हा नेशनल पार्क तीन महीनों के बाद फिर से खुल चुका है. यहां पर्यटक खटिया, मुक्की और सरही, इन तीनों पर्यटन द्वारों से कोर क्षेत्र में जा सकते हैं. पार्क के खुलने के साथ ही एक अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले वन्यजीव संरक्षण सप्ताह की शुरुआत भी हुई है. नेशनल पार्क जाने के लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग कर सकते हैं. इसके लिए आपको forest.mponline.gov.in पर जाकर अपनी बुकिंग करनी होगी या फिर टाइगर रिजर्व के गेट पर भी पास मिलते हैं.