काला पानी ने बदल दी जिंदगी, जानिए 7 साल की उम्र से काम करने वाले विनय की कहानी
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Munak Canal Cleaning Campaign: दिल्ली के वजीरपुर गांव के रहने वाले विनय दास पिछले कई सालों से मुनक नहर और आसपास के इलाकों की सफाई कर रहे हैं. बचपन में आर्थिक मुश्किलों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और MA व B.Ed. की पढ़ाई पूरी की. 2016 के आसपास उन्होंने अपने इलाके के बच्चों को मुफ्त पढ़ाना शुरू किया. इसके बाद सफाई अभियान भी शुरू किया. 1 सितंबर 2018 से उनकी टीम हर रविवार मुनक नहर की सफाई कर रही है. इस मुहिम से अब 1600 से ज्यादा बच्चे और युवा जुड़े हैं. करीब 350 एक्टिव वॉलंटियर सफाई अभियान चलाते हैं. टीम करीब 3 किलोमीटर हिस्से में सफाई कर चुकी है.
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की मुनक नहर को देखकर ज्यादातर लोग वहां से गुजर जाते हैं. काला पानी, प्लास्टिक, पूजा सामग्री और चारों तरफ फैला कचरा देखकर लोग नाक पर कपड़ा रख लेते हैं. लेकिन वजीरपुर गांव के रहने वाले विनय दास के लिए यह सिर्फ एक गंदी नहर नहीं है. उनके लिए यह जिम्मेदारी है. पिछले कई सालों से वह हर रविवार अपनी टीम के साथ मुनक नहर और आसपास के इलाकों की सफाई में जुटे हैं. विनय की कहानी भी आसान नहीं रही. उनका बचपन दिल्ली के एक छोटे से 8 बाई 8 के कमरे में बीता. वहां वह पांच भाई-बहनों और माता-पिता के साथ रहते थे. उनके पिता थाने में प्यून थे. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी.
आराम की जिंदगी के बजाय समाजसेवा
ऐसे में विनय ने महज 7 साल की उम्र में पढ़ाई के साथ काम करना शुरू कर दिया. उन्होंने कभी गाड़ियां साफ कीं. कभी झाड़ू-पोछा लगाया. आनंद पर्वत पर सिर पर भारी सामान उठाया. सिलाई का काम भी किया. इसके अलावा STD बूथ से लेकर MNC तक में काम किया. मुश्किलों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज से पढ़ाई की. इसके बाद MA और B.Ed. किया. पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने करियर बनाने का मौका था. लेकिन उन्होंने नौकरी और आराम की जिंदगी के बजाय समाजसेवा का रास्ता चुना.
बच्चों को पढ़ाने की मुहिम
2016 के आसपास विनय ने अपने इलाके की हालत देखी. पार्कों में 12 से 15 फीट तक ऊंचे कूड़े के ढेर लगे थे. गलियों में भी गंदगी फैली थी. बच्चों को भी बेहतर माहौल नहीं मिल पा रहा था. विनय को लगा कि सिर्फ सफाई करने से समस्या खत्म नहीं होगी. बच्चों को शिक्षा और सही माहौल देना भी जरूरी है. इसके बाद उन्होंने झुग्गियों और किराए के घरों में रहने वाले बच्चों को मुफ्त पढ़ाना शुरू किया. धीरे-धीरे बच्चे उनसे जुड़ते गए. इसके साथ सफाई का काम भी शुरू हो गया.
एक दिन मुनक नहर ने बदल दी सोच
हर रविवार पार्क और यमुना किनारे सफाई करते हुए एक दिन विनय की नजर मुनक नहर पर पड़ी. उस समय छठ पूजा के लिए लोग वहां पहुंचे थे. लेकिन नहर का पानी काला था. पानी में प्लास्टिक और पूजा सामग्री तैर रही थी. बदबू भी इतनी ज्यादा थी कि लोग नाक बंद करके खड़े थे. विनय के मुताबिक, उसी दौरान एक बुजुर्ग महिला ने उनसे कहा था कि जिस नहर को कभी लोग मां मानते थे, आज उसमें पैर डालने से भी डर लगता है. यह बात विनय के मन में बैठ गई. इसके बाद उन्होंने मुनक नहर की सफाई को भी अपनी मुहिम का हिस्सा बना लिया. 1 सितंबर 2018 से उनकी टीम लगातार हर रविवार सफाई अभियान चला रही है.
150 बच्चों से शुरू हुआ था सफर
शुरुआत में करीब 150 बच्चे उनके साथ थे. आज 1600 से ज्यादा बच्चे और युवा इस मुहिम से जुड़ चुके हैं. इनमें करीब 350 एक्टिववॉलंटियर हैं. ये वॉलंटियर छोटे-छोटे समूहों में सफाई अभियान चलाते हैं. यह काम उनके लिए सिर्फ कचरा उठाना नहीं है. विनय बच्चों को समझाते हैं कि वे जो कर रहे हैं, वह सेवा है. कई बार बच्चे खुद अपने आसपास के लोगों को कूड़ा नहीं फैलाने के लिए समझाते हैं.
कई बार जिंदगी भी खतरे में पड़ी
मुनक नहर की सफाई पार्क साफ करने जितनी आसान नहीं है. गंदे पानी में कांच, सीरिंज, सड़े हुए जानवर और दूसरी खतरनाक चीजें भी मिलती हैं. कई बार सफाई के दौरान विनय के पैर में चोट लगी. संक्रमण भी हुआ. एक बार कचरे से भरा बोरा खींचते समय उसमें से कोई केमिकल निकल गया. इससे विनय के हाथों पर छाले पड़ गए. करीब 15 दिन तक वह ठीक से हाथ में कोई चीज नहीं पकड़ पाए. वह बताते हैं कि कई बार लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया. कुछ लोगों ने कहा कि सरकार का काम वह क्यों कर रहे हैं. कुछ लोगों ने उन्हें राजनीति से जोड़ने की कोशिश भी की. लेकिन उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा.
अपना स्कूल बनाने का सपना
विनय की टीम अब तक मुनक नहर के करीब 3 किलोमीटर हिस्से में सफाई अभियान चला चुकी है. हाल के दो अभियानों में करीब 50 मीट्रिक टन कचरा निकाले जाने का दावा है. विनय के मुताबिक, इसका रिकॉर्ड MCD में दर्ज है. सफाई के साथ टीम पौधारोपण भी करती है. लगाए गए पौधों की करीब तीन महीने तक देखभाल की जाती है. अब विनय का अगला सपना 1500 बच्चों के लिए ऐसा स्कूल बनाना है, जहां पढ़ाई के साथ बच्चों को पर्यावरण का रक्षक भी बनाया जाए. फिलहाल करीब 500 बच्चे इस दिशा में उनके साथ जुड़े हैं.