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Nepal Menstrual Leave for Women: नेपाल की बालेन सरकार ने तय किया है कि वो अपने देश में महिलाओं को पीरियड लीव देंगे. इससे संबंधित प्रस्ताव रखा गया है और जल्द ही संशोधन के बाद इसे लागू भी किया जाएगा.
बालेन शाह.
काठमांडू: नेपाल सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों को पीरियड लीव देने का प्रस्ताव रखा है. इसके लिए वह सिविल सेवा अधिनियम 1992 में संशोधन करने जा रही है. सरकार ने संघीय सिविल सेवा से जुड़े कानूनों में संशोधन और समेकन बिल में मासिक धर्म अवकाश को भी शामिल किया है. यह बिल इसी हफ्ता संघीय संसद सचिवालय में पंजीकृत किया गया. अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो नेपाल उन चंद देशों में शामिल हो जाएगा जो महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म पर छुट्टी देते हैं.
दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में यह व्यवस्था पहले से है. ज्यादातर देशों में ऐसी छुट्टी नहीं दी जाती. भारत में केंद्र सरकार के सिविल सेवा नियमों में अलग से पीरियड लीव का प्रावधान नहीं है. मार्च, 2026 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में अनिवार्य मासिक धर्म को लेकर अवकाश की नीति लागू करने से इनकार कर दिया था. अदालत ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर सकती है. कुछ राज्यों में सीमित छूट दी जाती है. बिहार और ओडिशा में सरकारी कर्मचारियों को महीने में दो दिन का मासिक धर्म अवकाश मिलता है.
महिलाओं को मिलेगी पीरियड लीव
नेपाल के बिल के मुताबिक महिला कर्मचारियों को अन्य कर्मचारियों की तरह आकस्मिक छुट्टी, गृह अवकाश, बीमारी की छुट्टी, अध्ययन अवकाश और असाधारण अवकाश मिलती रहेगी. इसके अलावा उन्हें मासिक धर्म अवकाश, मातृत्व अवकाश, प्रसव अवकाश और मातृत्व देखभाल अवकाश भी मिलेगा. बिल में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मासिक धर्म के दौरान कितने दिन की छुट्टी मिलेगी या किन शर्तों पर यह दी जाएगी. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब नेपाल की सिविल सेवा में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
किन-किन देशों में मिलती है छुट्टी?
साल 2007 में सिविल सेवा अधिनियम में संशोधन करके 45 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था. इसमें से 33 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए. सरकारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक तीनों स्तर की सरकारों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों की संख्या मार्च, 2026 के मध्य तक 30 प्रतिशत हो गई है. 2008 में यह आंकड़ा सिर्फ 8 प्रतिशत था. नेपाल सरकार का यह प्रस्ताव महिलाओं को कार्यस्थल पर बेहतर सुविधा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. नेपाल से पहले जापान, इंडोनेशिया, ताइवान, जाम्बिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और स्पेन में ऐसा नियम लागू है.