Market Outlook : 8 हफ्ते से लगातार गिर रहा निफ्टी, क्या अगले हफ्ते संभलेगा बाजार?

Market Outlook : 8 हफ्ते से लगातार गिर रहा निफ्टी, क्या अगले हफ्ते संभलेगा बाजार?


नई दिल्‍ली. छुट्टियों के कारण छोटे रहे इस कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा. निफ्टी और सेंसेक्‍स गिरावट रही. निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के लाल निशान में बंद हुआ. साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया. इस गिरावट के बाद अब रिटेल से लेकर बड़े निवेशकों तक के मन में यही सवाल गूंज रहा है कि क्या अगले हफ्ते बाजार संभलेगा या गिरावट का यह सिलसिला अभी और गहराएगा?

अब अगले सप्ताह निवेशकों की निगाहें आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही (क्यू2) के कॉरपोरेट नतीजों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर रहेंगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो भारतीय बाजार में तेज राहतभरी तेजी देखने को मिल सकती है. वहीं दूसरी ओर, आरबीआई की नीति, महंगाई पर उसका दृष्टिकोण और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों तथा वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे.

पूरे सप्‍ताह कमजोर रहा बाजार

पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी की शुरुआत पहले कारोबारी दिन से ही दिखाई दी. सोमवार को सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत गिरा, जबकि अगले दो सत्रों में भी कमजोरी बनी रही. गुरुवार को सूचकांक में 0.79 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की गई. विश्लेषकों के अनुसार यह गिरावट बाजार में जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है.

आरएसआई आया 31.06 पर

तकनीकी दृष्टि से देखें तो निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक साप्ताहिक आरएसआई (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) लगभग 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और बाजार में कमजोर मोमेंटम को दर्शाता है. हालांकि आरएसआई अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी देखने को मिल सकती है.

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए निकट अवधि में 22,800 और 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा. इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है. वहीं नीचे की ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख समर्थन (सपोर्ट) माने जा रहे हैं.

वैश्विक वजहों से बाजार सुस्‍त

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार की धारणा पर वैश्विक कारकों का प्रभाव सबसे अधिक है. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स बढ़ने, महंगाई को लेकर चिंताओं और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क बना रखा है. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो रहा है.

मजबूत घरेलू फंडामेंटल्स बन सकते हैं बाजार की ढाल

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. अगस्त में देश की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (IIP) सुधरकर 8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जुलाई में 7.4 प्रतिशत थी. इस दौरान विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर में 9 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई.

ये 4 बड़े ट्रिगर्स तय करेंगे बाजार का रुख

अगले हफ्ते बाजार संभलेगा या नहीं, इसका फैसला मुख्य रूप से इन चार वैश्विक और घरेलू घटनाक्रमों से तय होगा-

  • आरबीआई पॉलिसी (RBI MPC Policy): घरेलू स्तर पर सबसे बड़ा इवेंट भारतीय रिजर्व बैंक की पॉलिसी बैठक है. ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंक का रुख, महंगाई को लेकर उसका आउटलुक और आर्थिक ग्रोथ के अनुमान घरेलू वित्तीय बाजारों को नई दिशा देंगे.
  • दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजे: चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट अर्निंग्स का दौर शुरू हो रहा है. कंपनियों के वित्तीय नतीजे और मैनेजमेंट की कमेंट्री यह तय करेगी कि सेक्टर-विशेष में खरीदारी लौटेगी या नहीं.
  • कच्चा तेल: भू-राजनीतिक मोर्चे पर यदि मध्य पूर्व में तनाव घटता है, तो भारतीय बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है. राहत की बात यह है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की सप्लाई सुधरने के बाद ब्रेंट क्रूड अपने ऊपरी स्तरों से नीचे आया है, जिससे ऊर्जा कीमतों का दबाव कुछ घटा है.



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