प्रेत योनि में भटकेगी आत्मा, सुहागिनों के श्राद्ध में न करना ये गलती
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Married Women Shradh Remedy : इन दिनों पितृ पक्ष चल रहा है. इसे पूर्वजों की आत्मिक शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है. सुहागिन या सौभाग्यवती स्त्री के श्राद्ध का अलग नियम होता है. अगर इनका श्राद्ध शास्त्र के हिसाब से न किया जाए तो परिजनों को अनेक समस्याओं, बाधाओं और पितृ दोष का सामना करना पड़ता है. लोकल 18 से हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित मनोज मिश्रा बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अपनी दिवंगत सौभाग्यवती माता, दादी या पत्नी का श्राद्ध उनके शरीर त्यागने की सामान्य तिथि पर करता है तो उस धार्मिक अनुष्ठान का कोई लाभ नहीं मिलेगा. सही तिथि पर श्राद्ध न होने से पितृ अतृप्त रह जाते हैं. उनकी आत्मा प्रेत योनि में भटकती है.
हरिद्वार. हिंदू धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाला पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति आत्मिक शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय होता है. इन 16 दिनों में तर्पण, पिंडदान और हवन से नाराज पितरों को प्रसन्न किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, दिवंगत आत्माओं की मुक्ति के लिए विशेष नियम निर्धारित किए गए हैं. अगर सुहागिन या सौभाग्यवती स्त्री के श्राद्ध में शास्त्र अनुसार कार्य न किया जाए तो परिजनों को अनेक समस्याओं, बाधाओं और पितृ दोष का सामना करना पड़ता है. लोकल 18 ने इस बारे में हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित मनोज मिश्रा से बात की. पंडित मनोज मिश्रा बताते हैं कि जो स्त्रियां अपने पति के जीवित रहते हुए संसार त्याग देती हैं उन्हें सौभाग्यवती या सुहागिन कहा जाता है.
शुरू हो जाएगी लड़ाई
पंडित मनोज मिश्रा कहते हैं कि ऐसी मातृ शक्तियों का श्राद्ध करने के लिए शास्त्रों में आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को निर्धारित किया गया है. अगर कोई व्यक्ति अपनी दिवंगत सौभाग्यवती माता, दादी या पत्नी का श्राद्ध उनके शरीर त्यागने की सामान्य तिथि पर करता है तो उस धार्मिक अनुष्ठान का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है. शास्त्रों के अनुसार, सही तिथि पर तर्पण, श्राद्ध आदि न होने से पितृ अतृप्त रह जाते हैं और उनकी आत्मा प्रेत योनि में भटकती है, जिससे वंशजों के मांगलिक कार्यों में अड़चनें आती रहती हैं. कार्यों में रुकावट, घर में लड़ाई झगड़ा और दूसरी कई बाधाएं बनी रहती हैं.
तभी मिलेगी मातृ ऋण से मुक्ति
पंडित मनोज मिश्रा बताते हैं कि इस विशेष नियम का प्रमाण हिंदू धर्म के कई धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से मिलता है. महानवमी के श्राद्ध की पूरी जानकारी गरुड़ पुराण समेत दूसरी धार्मिक ग्रंथों में मिलती है. सौभाग्यवती स्त्रियों के श्राद्ध के लिए नवमी ही सबसे सही तिथि होती है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन गंगा घाट पर पिंडदान, तर्पण और सुहागिन को भोजन कराने के साथ सुहाग सामग्री दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं. विधि-विधान से किया गया यह श्राद्ध मातृ ऋण से मुक्ति दिलाता है और कुल को सुख, समृद्धि और सौभाग्य आदि का वरदान प्राप्त होता है.