मुनस्यारी: उत्तराखंड के पहाड़ों में आज भी कई ऐसे हुनर हैं, जो पीढ़ियों से एक परिवार से दूसरे परिवार तक पहुंच रहे हैं. पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में ऊन से कपड़े तैयार करने का काम भी इन्हीं में शामिल है. यहां के परिवार और खासकर महिलाएं हाथ से बुनाई कर शॉल, टोपी, स्वेटर और मफलर जैसे कई गर्म कपड़े तैयार करती हैं. इन कपड़ों की खासियत सिर्फ इनकी गर्माहट नहीं, बल्कि इनके पीछे छिपी मेहनत और पारंपरिक बुनाई भी है.
मुनस्यारी का दरकोट गांव ऊनी हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है. यहां स्थानीय परिवार अंगोरा खरगोश और भेड़ की ऊन से अलग-अलग तरह के उत्पाद तैयार करते हैं. महिलाएं हाथ से चलने वाले करघों पर इनकी बुनाई करती हैं. यही वजह है कि इन ऊनी उत्पादों में पहाड़ी हस्तशिल्प की अलग झलक दिखाई देती है.
अंगोरा की मुलायम ऊन से तैयार होते हैं कपड़े
स्थानीय जानकार संजय शाह जगाती बताते हैं कि यहां तैयार होने वाले ऊनी उत्पादों में मुख्य रूप से अंगोरा खरगोश की मुलायम ऊन का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ उत्पादों में पहाड़ी बकरी से मिलने वाली ऊन भी इस्तेमाल होती है. अंगोरा ऊन काफी महीन, हल्की और मुलायम होती है. इसी वजह से इससे तैयार कपड़े पहनने में आरामदायक होते हैं और ठंड के मौसम में गर्माहट देते हैं. ऊन के प्राकृतिक रंगों की वजह से कई उत्पादों में धूसर, भूरा और क्रीम जैसे रंग भी देखने को मिलते हैं.
शॉल से लेकर टोपी और दस्ताने तक बनते हैं
अंगोरा ऊन से यहां कई तरह के गर्म कपड़े तैयार किए जाते हैं. इनमें शॉल, टोपी, स्वेटर, मफलर, दस्ताने और दूसरे ऊनी कपड़े शामिल हैं. इसकी मुलायम बनावट के कारण अंगोरा से बने उत्पाद आरामदायक महसूस होते हैं. हालांकि किसी उत्पाद की गुणवत्ता उसमें इस्तेमाल ऊन के मिश्रण और बुनाई पर भी निर्भर करती है.
700 रुपये से शुरू कीमत
इन ऊनी उत्पादों की कीमत उनके आकार, डिजाइन, ऊन की गुणवत्ता और हाथ से की गई बुनाई के आधार पर अलग-अलग होती है. सामान्य ऊनी टोपी और छोटे उत्पाद करीब 700 से 1000 रुपये से शुरू होते हैं. वहीं हाथ से तैयार शॉल, स्वेटर और अच्छी गुणवत्ता वाले अंगोरा उत्पादों की कीमत हजारों रुपये तक जाती है. खरीदारी करते समय ग्राहक को यह जरूर पूछ लेना चाहिए कि उत्पाद में किस तरह की ऊन इस्तेमाल हुई है और उसमें ऊन का मिश्रण कितना है. इसके साथ ही आकार, बुनाई और कीमत की जानकारी भी पहले ले लेनी चाहिए.
दरकोट जाकर सीधे खरीद सकते हैं सामान
मुनस्यारी घूमने आने वाले पर्यटक दरकोट गांव पहुंचकर स्थानीय परिवारों से सीधे इन ऊनी उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं. इससे उत्पाद तैयार करने वाले स्थानीय परिवारों और कारीगरों को सीधे फायदा मिलता है. जो लोग मुनस्यारी नहीं आ सकते, वे उपलब्धता, डिजाइन और कीमत की जानकारी के लिए 7078880336 पर WhatsApp के जरिए संपर्क कर सकते हैं.
कई परिवारों के लिए रोजगार का जरिया
दरकोट गांव में ऊन से कपड़े तैयार करना सिर्फ पुरानी परंपरा नहीं है, बल्कि कई परिवारों के लिए रोजगार का साधन भी है. स्थानीय लोग पहाड़ में रहकर आसपास उपलब्ध संसाधनों और पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं. एक जिला एक उत्पाद जैसी पहलों के जरिए भी स्थानीय उत्पादों को बाजार और पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे में मुनस्यारी के ये ऊनी कपड़े वहां की संस्कृति और पारंपरिक हुनर के साथ स्थानीय लोगों के स्वरोजगार की भी पहचान बन रहे हैं.