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Afghanistan Gold Reserve : दुनिया के सबसे गरीब देशों में शुमार अफगानिस्तान की धरती के गर्भ में बड़ा खजाना दबा पड़ा है. अफगानिस्तान के पास सोने की खदानें तो है ही हैं, साथ ही इसके पास लोहा, तांबा, कोबाल्ट, सीसा, जस्ता और लिथियम के भी विशाल भंडार हैं. खनिज निकालने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने की वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं. हाल ही में तखार प्रांत में एक सोने की खदान धसने से 5 लोग मारे गए.
अफगानिस्तान की एक सोने की खदान में चल रहा खनन का काम. (फाइल फोटो : रॉयटर्स)
नई दिल्ली. अफगानिस्तान के तखार प्रांत में एक सोने की खदान ढहने से हुई पांच मजदूरों की मौत हो गई है. इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अफगानिस्तान जमीन में दबे सोने के भंडारों की ओर खींचा है. 2021 में सत्ता में लौटने के बाद तालिबान प्रशासन ने अफगानिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से कमाई बढ़ाने पर जोर दिया है. सरकार खनन क्षेत्र को बढ़ाकर सरकारी राजस्व और रोजगार दोनों बढ़ाना चाहती है. इसी वजह से देश के कई हिस्सों में खनन गतिविधियां बढ़ी हैं. और साथ ही बढ़े हैं हादसे. ऊंचे-बंजर पहाड़, दशकों का युद्ध और दुनिया के सबसे गरीब देशों में शुमार अफगानिस्तान की धरते के नीचे सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि आज की आधुनिक दुनिया को चलाने वाले कई दुर्लभ मिनरल्स भी दबे पड़े हैं.
अफगानिस्तान के पास जमीन के नीचे लगभग 2.7 टन (करीब 2,698 किलोग्राम) से अधिक का प्रमाणित स्वर्ण भंडार मौजूद है. ये ही वो सोना है, जिसे निकालने के लिए तालिबान रात-दिन जुटा हुआ है. जहां तक अफगानिस्तान सरकार के पास गोल्ड रिजर्व की बात है तो वह 21.87 मीट्रिक टन स्वर्ण भंडार (Monetary Gold Reserves) मौजूद है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार पिछले कई वर्षों से अफगानिस्तान का गोल्ड रिजर्व स्थिर बना हुआ है.
सोने के वो तीन ठिकाने, जहां दिन-रात चल रही खुदाई
अफगानिस्तान में सोने के भंडार देश के अलग-अलग दुर्गम इलाकों में बिखरे हुए हैं, जहां तालिबान प्रशासन अर्थव्यवस्था को खड़ा करने के लिए तेजी से खनन करवा रहा है-
- बदख्शां प्रांत (Badakhshan): उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित यह प्रांत सोने का सबसे बड़ा केंद्र है. यहां के शिवा (Shiawa) और वेका दुरी (Weka Dur) इलाकों में सोने के भंडार हैं. यहां अब दिन-रात पहाड़ों का सीना चीरकर सोना निकालने में हजारों मजदूर जुटे हैं.
- तखार प्रांत (Takhar): उत्तरी तखार का चाह आब जिला सोने की खानों के लिए जाना जाता है. यहां के शाह मस्तान और समती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सोना निकाला जाता है. हालिया खदान हादसा भी इसी शाह मस्तान इलाके में हुआ है.
- गजनी प्रांत (Ghazni): दक्षिण-पूर्व में स्थित जरकशान (Zarkashan) इलाका सोने और तांबे के मिश्रित और विशाल भंडारों के लिए दुनिया भर में मशहूर है.
सिर्फ सोना नहीं, 95 लाख करोड़ का दबा है महाखजाना
अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदगी के समय अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के एक सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि अफगानिस्तान के मध्य और दक्षिणी इलाकों में करीब एक ट्रिलियन डॉलर (करीब 95 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा के प्राकृतिक खनिज दबे हुए हैं.
इस बंजर जमीन के भीतर लोहा, तांबा, कोबाल्ट, सीसा, जस्ता, कोयला और बेशकीमती रत्नों के विशाल भंडार मौजूद हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स’पृथ्वी के सबसे बड़े भंडारों में से एक हैं. आज की तारीख में स्मार्टफोन, टीवी, हाइब्रिड इंजन, कंप्यूटर, लेजर तकनीक और सैटेलाइट सिस्टम बनाने के लिए इन खनिजों की जरूरत होती है.
लीथियम का बडा भंडार
खनिजों की इस लंबी फेहरिस्त में सबसे बड़ा गेमचेंजर लीथियम (Lithium) है. भूवैज्ञानिकों का अनुमान है कि अफगानिस्तान में दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम भंडार मौजूद हो सकता है. आज जब पूरी दुनिया इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है, तब रिचार्जेबल बैटरी बनाने के लिए लिथियम सफेद सोना बन चुका है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस लिथियम का सही दोहन हो, तो अफगानिस्तान ऊर्जा के क्षेत्र में वही हैसियत हासिल कर सकता है जो कभी कच्चे तेल के मामले में सऊदी अरब के पास थी.