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Jhansi News: झांसी का डीआरएम कार्यालय कभी बेहद बड़े रेल प्रशासनिक क्षेत्र का केंद्र माना जाता था. झांसी से निकलने वाली रेल लाइनें अलग अलग दिशाओं में जाती थीं. ग्वालियर की तरफ जाने वाला मार्ग महत्वपूर्ण था. बुंदेलखंड के कई हिस्से भी झांसी के रेल नेटवर्क से जुड़े थे. कानपुर, बांदा, मानिकपुर जैसे इलाकों तक पहुंचने वाले रेल सेक्शन का संबंध भी झांसी के रेलवे प्रशासन से रहा. जैसे जैसे रेल नेटवर्क का विस्तार हुआ वैसे वैसे झांसी की भूमिका भी बढ़ती गई. इसी वजह से यहां का डीआरएम कार्यालय बड़े रेल नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण स्थान रखता था. उस समय झांसी के डीआरएम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्टेशनों की संख्या आज के मुकाबले काफी ज्यादा बताई जाती है.
झांसीः आज झांसी का डीआरएम कार्यालय एक तय रेल मंडल की व्यवस्था देखता है. लेकिन झांसी के रेलवे इतिहास में एक ऐसा दौर भी रहा है जब यहां से चलने वाला रेल प्रशासन आज के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़े इलाके तक फैला हुआ था. जानकारों के मुताबिक पुराने समय में झांसी के डीआरएम का अधिकार क्षेत्र इतना विस्तृत था कि इसे एशिया के बड़े रेलवे प्रशासनिक क्षेत्रों में गिना जाता था. उस समय झांसी सिर्फ ट्रेनों के रुकने या गुजरने वाली जगह नहीं थी. यहां से कई रेल मार्गों से जुड़े प्रशासनिक काम देखे जाते थे.
अलग-अलग दिशाओं में निकलती थी रेलगाड़ियां
झांसी से निकलने वाली रेल लाइनें अलग अलग दिशाओं में जाती थीं. ग्वालियर की तरफ जाने वाला मार्ग महत्वपूर्ण था. बुंदेलखंड के कई हिस्से भी झांसी के रेल नेटवर्क से जुड़े थे. कानपुर, बांदा, मानिकपुर जैसे इलाकों तक पहुंचने वाले रेल सेक्शन का संबंध भी झांसी के रेलवे प्रशासन से रहा. जैसे जैसे रेल नेटवर्क का विस्तार हुआ वैसे वैसे झांसी की भूमिका भी बढ़ती गई. इसी वजह से यहां का डीआरएम कार्यालय बड़े रेल नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण स्थान रखता था. उस समय झांसी के डीआरएम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्टेशनों की संख्या आज के मुकाबले काफी ज्यादा बताई जाती है. रेल लाइनों का फैलाव भी काफी बड़ा था. यानी जिस झांसी को आज एक रेल मंडल के मुख्यालय के रूप में देखा जाता है उसका रेलवे प्रशासनिक प्रभाव किसी समय इससे कहीं ज्यादा विस्तृत था.
धीरे धीरे रेल सेक्शन की प्रशासनिक जिम्मेदारी कम हुई
समय के साथ रेलवे की व्यवस्था में कई बड़े बदलाव हुए. प्रशासन को बेहतर तरीके से चलाने के लिए रेलवे जोन बढ़ाए गए. नए मंडल बनाए गए. पहले से मौजूद बड़े प्रशासनिक क्षेत्रों को अलग अलग हिस्सों में बांटा गया. इसका असर झांसी के पुराने रेल क्षेत्र पर भी पड़ा. धीरे धीरे कई रेल सेक्शन झांसी के प्रशासन से अलग हो गए. कई स्टेशन दूसरे रेल मंडलों के अंतर्गत चले गए. आज झांसी रेल मंडल उत्तर मध्य रेलवे का हिस्सा है. इसका मुख्यालय झांसी में है. मौजूदा मंडल के अंतर्गत ग्वालियर. बांदा. चित्रकूटधाम कर्वी. ललितपुर. महोबा. मुरैना. उरई जैसे प्रमुख स्टेशन आते हैं. लेकिन पुराने झांसी रेल प्रशासन की कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
आज भी यह सवाल दिलचस्प है कि जिस समय झांसी का कार्यक्षेत्र इतना बड़ा था उस समय इसके अधीन कुल कितने स्टेशन आते थे. किन किन रेल सेक्शन का संचालन झांसी से होता था. रेलवे के पुनर्गठन के बाद पुराने झांसी क्षेत्र का कौन सा हिस्सा किस मंडल में चला गया. आज का डीआरएम कार्यालय एक सीमित रेल मंडल की जिम्मेदारी संभालता है. इसके बावजूद झांसी के रेलवे इतिहास में उसका पुराना प्रशासनिक विस्तार एक महत्वपूर्ण अध्याय है. यह इतिहास दिखाता है कि झांसी लंबे समय तक सिर्फ बुंदेलखंड का प्रमुख रेलवे स्टेशन नहीं रहा. यह आसपास के बड़े रेल नेटवर्क के प्रशासन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है.