Khadra Essa US News | ₹48 करोड़ का इनाम और काम महिलाओं की ट्रेनिंग… कौन है खदरा ईसा, जिसे तलाश रहा अमेरिका

Khadra Essa US News | ₹48 करोड़ का इनाम और काम महिलाओं की ट्रेनिंग… कौन है खदरा ईसा, जिसे तलाश रहा अमेरिका


सीरिया में एक्टिव एक महिला जिहादी कमांडर को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है. सोमालिया में जन्मी और डच नागरिक बताई जाने वाली खदरा ईसा को अमेरिकी एजेंसियों की वॉन्टेड लिस्ट में डाला है. उसे ‘उम्म कका अल-सोमाली’ के नाम से जाना जाता है. अमेरिकी विदेश विभाग ने उसके बारे में जानकारी देने वाले को 50 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 48 करोड़ रुपये) इनाम देने का ऐलान किया है. इससे पहले अप्रैल 2025 में भी उसके बारे में जानकारी देने के लिए इनाम की घोषणा की गई थी.

अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, खदरा ईसा का संबंध इस्लामिक स्टेट से जुड़े एक महिला संगठन से रहा है. उसे संगठन में महिलाओं को धार्मिक और वैचारिक प्रशिक्षण देने वाली प्रमुख शरिया ट्रेनर के तौर पर देखा जाता है. अमेरिका का आरोप है कि उसने न केवल संगठन की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम किया, बल्कि भर्ती, प्रशिक्षण और हिंसक गतिविधियों से जुड़े फैसलों में भी भूमिका निभाई.

कौन है खदरा ईसा?

खदरा ईसा का नाम सीरिया में इस्लामिक स्टेट से जुड़े महिला नेटवर्क को लेकर सामने आया है. अमेरिका के मुताबिक वह खतीबा नुसायबा से जुड़ी रही है और उसे महिला सदस्यों को शरिया तथा संगठन की विचारधारा का प्रशिक्षण देने वाली प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में बताया गया है.

अमेरिकी विदेश विभाग के नोटिस में दावा किया गया है कि ईसा ने ‘आईएसआईएस की उस चरमपंथी विचारधारा की शिक्षा दी, जो आत्मघाती अभियानों और नागरिकों की हत्या को उचित ठहराती थी’. उसने महिला सदस्यों की भर्ती की और उन्हें ऐसे आदेश दिए जिनके नतीजतन कई हमले और हत्याएं हुईं. विदेश विभाग के मुताबिक, उसने ‘एक ऐसे समूह का नेतृत्व किया, जिसने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के जरिये शरिया कानून लागू किया.’

अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम क्यों रखा?

अमेरिकी विदेश विभाग ने इसी साल 14 सितंबर को ईसा पर 50 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की है. यह पहली बार नहीं जब अमेरिका ने उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए इनाम की पेशकश की है. इससे पहले अप्रैल 2025 में भी उसके ठिकाने या पहचान से जुड़ी जानकारी देने वाले के लिए इनाम की घोषणा की गई थी.

50 लाख डॉलर का इनाम यह दिखाता है कि अमेरिकी एजेंसियां उसे जिहादी नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली व्यक्ति के रूप में देखती हैं. अमेरिका ऐसे मामलों में न्याय के लिए इनाम (Rewards for Justice) जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों से जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है.

कभी बस हमलों तक सीमित थीं महिलाएं

आतंकवादी संगठनों में महिलाओं की भूमिका हमेशा एक जैसी नहीं रही है. लंबे समय तक कई जिहादी संगठनों ने महिलाओं को मुख्य रूप से ऐसे अभियानों में इस्तेमाल किया, जहां सुरक्षा जांच से बचने की संभावना ज्यादा मानी जाती थी.

महिला आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल के कई उदाहरण सामने आ चुके हैं. 1985 में लेबनान में सीरियन सोशल नेशनलिस्ट पार्टी से जुड़ी सना मेहैदली ने आत्मघाती हमला किया था. 1991 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) की महिला सदस्य धनु ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आत्मघाती हमले में निशाना बनाया था.

वहीं कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी ने भी 1990 के दशक में महिला आत्मघाती हमलावरों का इस्तेमाल किया. शुरुआत में हमास महिलाओं को ऐसे हमलों में इस्तेमाल करने से बचता था, लेकिन बाद में उसने भी अपनी रणनीति बदली.

बोको हराम ने भी खूब भरे महिला हमलावर

महिला आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल का एक बड़ा उदाहरण नाइजीरिया का बोको हराम रहा है. कॉम्बैटिंग टेररिज़्म सेंटर के एक अध्ययन में अप्रैल 2011 से जून 2017 के बीच 238 आत्मघाती हमलों में 434 हमलावरों की पहचान की गई थी. इस अध्ययन के मुताबिक इनमें कम से कम 56 प्रतिशत महिलाएं थीं.

लेकिन इन मामलों में महिलाओं की भूमिका ज्यादातर हमले को अंजाम देने तक ही सीमित रही. यानी उन्हें विस्फोटक ले जाने या लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि संगठन के रणनीतिक फैसलों, प्रशिक्षण, भर्ती या प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर उनकी मौजूदगी कम दिखाई देती थी. यहीं से जिहादी संगठनों में महिलाओं की भूमिका को लेकर एक अलग बदलाव दिखाई देने लगा.

ISIS में भी महिलाओं को बड़ा रोल

इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में फरवरी 2014 में अल-खंसा ब्रिगेड के गठन की घोषणा की थी. यह पूरी तरह महिलाओं से बना संगठन था. इसका काम महिलाओं की निगरानी, नियमों को लागू करना और संगठन की विचारधारा के मुताबिक सामाजिक नियंत्रण बनाए रखना था.

समय के साथ कुछ जिहादी संगठनों में महिलाओं को केवल हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सदस्य के बजाय संगठन की आंतरिक व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाने लगा.

यही बदलाव खदरा ईसा के मामले को भी महत्वपूर्ण बनाता है. अमेरिकी आरोपों के अनुसार, उसकी भूमिका केवल किसी अभियान में हिस्सा लेने तक सीमित नहीं थी. उसे महिलाओं को वैचारिक और धार्मिक प्रशिक्षण देने, सदस्यों की भर्ती और संगठनात्मक गतिविधियों में भूमिका निभाने वाली व्यक्ति के रूप में पेश किया गया है.

जिहादी संगठनों में बढ़ रही महिलाओं की भूमिका?

आतंकवाद पर शोध करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव बताता है कि कुछ जिहादी संगठन अपनी जरूरत और परिस्थितियों के हिसाब से महिलाओं की भूमिका को बदल रहे हैं. पहले महिलाओं को अक्सर सुरक्षा व्यवस्था में कम संदेह पैदा करने वाले सदस्य के तौर पर देखा जाता था. इसलिए उन्हें संदेश पहुंचाने, सामान ले जाने या आत्मघाती हमलों जैसे अभियानों में इस्तेमाल किया जाता था.

अब कुछ संगठनों में महिलाओं को भर्ती, प्रशिक्षण, विचारधारा के प्रचार, नियम लागू कराने और संगठन के रोजमर्रा के कामकाज में भी जिम्मेदारी दी जा रही है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर जिहादी संगठन में महिलाओं की भूमिका समान है, लेकिन खदरा ईसा जैसे मामलों से यह संकेत मिलता है कि कुछ नेटवर्क में महिलाओं को पहले की तुलना में ज्यादा औपचारिक जिम्मेदारियां दी गईं.

खदरा ईसा का मामला क्यों अहम है?

खदरा ईसा पर अमेरिका की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सिर्फ एक वॉन्टेड आतंकी की तलाश का मामला नहीं है. यह उन बदलावों पर भी रोशनी डालता है, जिनके तहत आतंकी संगठन महिलाओं को अपनी संरचना में अलग-अलग भूमिकाएं देने लगे हैं.

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार ईसा एक ऐसी महिला थी जो संगठन की विचारधारा को आगे बढ़ाने, महिलाओं को प्रशिक्षित करने और नए सदस्यों की भर्ती जैसे कामों में शामिल थी. अगर ये आरोप पुष्ट होते हैं, तो यह मामला इस बात का उदाहरण होगा कि जिहादी संगठन महिलाओं को केवल हमलों के लिए इस्तेमाल करने के बजाय संगठन के अंदर जिम्मेदारियां भी सौंप रहे हैं.



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