दुनिया की राजनीति में नेताओं की फॉर्मल बैठकों और भारी-भरकम कूटनीतिक बयानों की खबरें तो रोज आती हैं, लेकिन कभी-कभी बंद कमरों के भीतर की ऐसी अनसुनी कहानियां सामने आ जाती हैं जो हर किसी को हैरान कर देती हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी अनोखी बॉन्डिंग का एक ऐसा ही दिलचस्प वाकया दुनिया के सामने रखा है. पुतिन ने बताया कि जब भारत में हुए BRICS सम्मेलन के दौरान वे और शी जिनपिंग बिना किसी ट्रांसलेटर के एक कमरे में अकेले रह गए, तो दोनों ने बिना एक-दूसरे की भाषा जाने भी इशारों और चंद शब्दों में एक-दूसरे की पूरी बात समझ ली.
भारत में पीएम मोदी के वेलकम रूम में क्या हुआ था?
मॉस्को के पास आयोजित ‘वाल्दाई डिस्कशन क्लब’ के मंच से जब पुतिन ने ये किस्सा सुनाया, तो वहां मौजूद विदेशी मेहमान और पत्रकार मुस्कुराए बिना नहीं रह सके. पुतिन ने कहा कि भले ही वो मैंडरिन भाषा नहीं जानते और जिनपिंग रशियन नहीं बोलते, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों के बीच भाषा की कोई दीवार नहीं है.
पुतिन ने इस घटना का जिक्र करते हुए वाल्दाई क्लब के मंच पर बहुत ही दोस्ताना अंदाज में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको एक बहुत साधारण सा उदाहरण देता हूं. हमारे बीच भाषा की कोई दिक्कत नहीं है. मैं अभी तक चीनी भाषा नहीं बोल पाता हूं और मेरे दोस्त, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अभी तक रूसी भाषा नहीं बोलते हैं’.
उन्होंने बताया कि ‘हम दोनों भारत में एक साथ थे और उस वेटिंग एरिया में अकेले रह गए, जहां दुनिया भर के लीडर्स कार्यक्रम के मेजबान यानी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने से पहले इकट्ठा होते हैं. पीएम मोदी हर नेता का स्वागत कर रहे थे और फिर वो मेन हॉल में आगे बढ़ रहे थे. इसी दौरान राष्ट्रपति शी और मैं एक कमरे में अकेले रह गए, सिर्फ हम दोनों, बिना किसी ट्रांसलेटर के’.
पुतिन-जिनपिंग ने कैसे समझी एक-दूसरे की बात?
पुतिन ने बताया कि ‘सबसे दिलचस्प बात थी कि जैसे ही उन्होंने या मैंने एक-दो शब्द बोले, हम बिना किसी अनुवादक के एक-दूसरे की बात समझ गए, जबकि हम एक-दूसरे की भाषा नहीं जानते थे. तो अब आप ही बताइए, क्या हमारे बीच कोई दीवार या रुकावट है? बिल्कुल नहीं, कोई रुकावट नहीं है’.
पुतिन का ये बयान सिर्फ एक मजेदार अनुभव नहीं है, बल्कि वो दुनिया के सामने इस बात का सबूत रखना चाहते हैं कि चीनी राष्ट्रपति से उनके रिश्ते कितने बेहतरीन हैं. जब नेता बिना ट्रांस्लेटर के भी एक-दूसरे की भावना और मंशा को समझ लें, तो ये दिखाता है कि दोनों देशों के रणनीतिक रिश्ते किस मुकाम पर पहुंच चुके हैं. पुतिन इससे पहले पीएम मोदी को लेकर भी ऐसा ही बयान दे चुके हैं.
पुतिन के पोते-पोती बोलते हैं मैंडरिन
बातचीत के दौरान पुतिन का चिर-परिचित मजाकिया अंदाज भी देखने को मिला. उन्होंने मुस्कुराते हुए चुटकी ली कि उनके अपने पोते-पोतियां उनके लिए चीनी अनुवादक का काम करेंगे. दरअसल, पुतिन पहले भी ये खुलासा कर चुके हैं कि उनके परिवार के छोटे बच्चे धाराप्रवाह यानी एकदम फ्लुएंट मैंडरिन बोलते हैं.
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