Dhaicha Farming: डैचा की खेती बनी किसानों के लिए फायदे का सौदा, खाद से लेकर ईंधन और बीज बेचकर कमा रहे मुनाफा

Dhaicha Farming: डैचा की खेती बनी किसानों के लिए फायदे का सौदा, खाद से लेकर ईंधन और बीज बेचकर कमा रहे मुनाफा


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Dhaicha Farming in Bharatpur: भरतपुर जिले में किसान पारंपरिक फसलों के साथ अब ऐसी फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं. जिनसे खेती की लागत कम करने के साथ अतिरिक्त आमदनी भी हासिल हो सके इन्हीं में डैचा की फसल किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है. जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बाजरा और अन्य फसलों के साथ डैचा की खेती कर रहे हैं. इन दिनों डैचा की फसल पकने के कगार पर है.

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भरतपुर: भरतपुर जिले में किसान पारंपरिक फसलों के साथ अब ऐसी फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं. जिनसे खेती की लागत कम करने के साथ अतिरिक्त आमदनी भी हासिल हो सके इन्हीं में डैचा की फसल किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है. जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बाजरा और अन्य फसलों के साथ डैचा की खेती कर रहे हैं. इन दिनों डैचा की फसल पकने के कगार पर है और किसान इसकी कटाई में जुटे हुए हैं.

डैचा की खासियत यह है कि इसका उपयोग कई तरह से किया जा सकता है. डैचा की हरी फसल को खेत में मिलाकर जैविक खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और खेत की उर्वरता सुधारने में मदद मिलती है. यही वजह है कि किसान इसे हरी खाद के रूप में भी महत्वपूर्ण मानते हैं.

किसान इन लकड़ियों का इस्तेमाल घरेलू ईंधन के रूप में करते
वहीं डैचा के पौधे पकने के बाद इसकी लकड़ियां भी उपयोगी होती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में किसान इन लकड़ियों का इस्तेमाल घरेलू ईंधन के रूप में करते हैं. इससे घर की ईंधन संबंधी जरूरतें पूरी होती है और अलग से ईंधन खरीदने का खर्च भी कम होता है. डैचा की फलियों में बनने वाले बीज भी किसानों के लिए आमदनी का जरिया हैं.

किसान फलियों से बीज निकालकर उन्हें बाजार में बेचते
फसल तैयार होने के बाद किसान फलियों से बीज निकालकर उन्हें बाजार में बेचते हैं. इससे किसानों को मुख्य फसल के अलावा अतिरिक्त आय प्राप्त होती है. किसानों का कहना है कि डैचा की खेती जमीन के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है. यही कारण है कि भरतपुर में किसान इसे खेती के एक उपयोगी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.



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