पर्सनल लोन लेते वक्त 90% लोग करते हैं ये गलतियां! कहीं आप भी तो नहीं फंस रहे इस जाल में

पर्सनल लोन लेते वक्त 90% लोग करते हैं ये गलतियां! कहीं आप भी तो नहीं फंस रहे इस जाल में


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Personal Loan Common Mistakes : पर्सनल लोन लेने वाले ज्‍यादातर लोग केवल इस बात पर खुश हो जाते हैं कि बैंक उन्हें बड़ा अमाउंट ऑफर कर रहा है, जबकि पर्दे के पीछे छिपी ब्याज दरें, भारी-भरकम प्रोसेसिंग फीस और कागजी शर्तें आगे चलकर भारी पड़ जाती हैं. लेकिन, अधिकतर लोग इन चीजों पर ध्‍यान ही नहीं देते.

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पर्सनल लोन लेने से पहले पूरी पूछ-परख करनी चाहिए. (Photo : Canva)

नई दिल्‍ली. किसी इमरजेंसी में पैसा का तुरंत जुगाड़ करने के लिए पर्सनल लोन बहुत काम आता है. पर्सनल लोन लेने के लिए न कुछ गिरवी रखना पड़ता है और न ही कोई कागज बैंक वालों को देना होता है. यानी अप्‍लाई करते ही झटपट पैसा आपके खाते में आ जाता है. लेकिन, पर्सनल लोन लेते वक्‍त आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए. अगर आपने भी वो गलतियां कर दी, जो ज्‍यादातर लोग करते हैं तो फिर आपको यह कर्ज चुकाने में पसीने छूट सकते हैं.

पहली गलती तो ज्यादातर लोग यह करते हैं कि वे टीवी या सोशल मीडिया पर चलने वाले विज्ञापनों में कम ब्याज की बात सुनते ही लोन लेने का मन बना लेते हैं. कम ब्याज दर का मतलब हमेशा सस्ता लोन बिल्कुल नहीं होता. बैंक अक्‍सर कम ब्याज दर का लालच देकर भारी प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, डॉक्यूमेंटेशन फीस और एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट वसूल लेते हैं. इससे लोन की कॉस्‍ट बहुत ऊपर चली जाती है.

जरूरत से ज्यादा लोन

दूसरी सबसे आम गलती यह होती है कि बैंक से बड़ी लोन लिमिट मिलते ही लोग अपनी जरूरत भूल जाते हैं. मिसाल के तौर पर, अगर आपको केवल ₹3 लाख की जरूरत है और बैंक आपकी अच्छी सैलरी देखकर ₹8 लाख का प्री-एप्रूव्ड लोन ऑफर कर देता है, तो ज्यादातर लोग पूरा ₹8 लाख ले लेते हैं. यह अतिरिक्त ₹5 लाख कोई मुफ्त का तोहफा नहीं है, बल्कि इस पर भी आपको हर महीने मोटा ब्याज और टैक्स चुकाना पड़ेगा. इसलिए हमेशा अपने मासिक घरेलू खर्चों और बजट का बारीकी से आकलन करें और सिर्फ उतना ही पैसा उठाएं, जिसकी ईएमआई आप बिना किसी तनाव के हर महीने चुका सकें.

ईएमआई कम रखना

लोन लेते वक्त ज्‍यादातर लोग अक्सर मासिक ईएमआई जितनी कम हो सके उतनी कम रखते हैं. बैंक इसके लिए लोन की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 5 या 7 साल कर देते हैं. पहली नजर में यह सौदा बहुत लुभावना लगता है क्योंकि हर महीने कम पैसे कटते हैं, लेकिन हकीकत में होता इससे नुकसान है. अवधि जितनी ज्यादा बढ़ेगी, आप बैंक को मूलधन से कहीं ज्यादा ब्याज चुका बैठेंगे.

प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज

जब भी किसी के पास भविष्य में सालाना बोनस, पीएफ की रकम या जमीन-जायदाद से कोई एकमुश्त पैसा आता है, तो वह सबसे पहले अपना लोन बंद करना चाहता है. लेकिन लोन एग्रीमेंट साइन करते वक्त लोग यह पूछना ही भूल जाते हैं कि क्या वे समय से पहले लोन चुका सकते हैं या नहीं. आईसीआईसीआई बैंक समेत कई प्रमुख वित्तीय संस्थान पार्ट-पेमेंट या फोरक्लोजर पर 2 से 5 फीसदी तक का पेनल्टी चार्ज वसूलते हैं. कई लोन में तो पहले एक या दो साल तक लोन बंद करने पर पूरी तरह पाबंदी होती है.

कई बैंकों में अप्लाई

तुरंत पैसों की चाहत में लोग कई फिनटेक ऐप्स और बैंकों की वेबसाइट पर जाकर एक ही दिन में कई पर्सनल लोन के लिए आवेदन डाल देते हैं. हर एक आवेदन के साथ बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट की ‘हार्ड इन्क्वायरी’ करता है, जिससे बैंकों की नजर में आपकी छवि एक जोखिम भरे और कर्ज के लिए उतावले ग्राहक जैसी बन जाती है. इससे आपकी वित्‍तीय साख खराब हो जाती है.



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