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Jitan Ram Manjhi Birthday: गया के महकार गांव में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का जन्मदिन बेहद भावुक अंदाज में मनाया गया. इस दौरान मांझी ने अपने माता-पिता की प्रतिमा के सामने केक काटकर जन्मदिन मनाया. इसके बाद मीडिया से बात करते हुए वे माता-पिता को याद कर भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े.
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केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का जन्मदिन इस बार बेहद भावुक अंदाज में मनाया गया. अपने पैतृक गांव गया के महकार पहुंचे मांझी ने माता-पिता की प्रतिमा के सामने केक काटकर जन्मदिन मनाया. इसके बाद जब वे मीडिया से बात करने लगे तो माता-पिता का जिक्र करते-करते उनकी आंखों से आंसू छलक आए. इस दौरान उन्होंने कहा कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके माता-पिता के आशीर्वाद और संघर्ष का सबसे बड़ा योगदान है. मांझी ने कहा कि दुनिया में माता-पिता से बढ़कर किसी इंसान के लिए कोई दूसरा नहीं हो सकता. माता-पिता का जिक्र करते हुए वह अचानक भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि उनके जीवन में जो कुछ भी हासिल हुआ, उसके पीछे माता-पिता का आशीर्वाद है.
मांझी ने रामायण की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता को सबसे पहले प्रणाम करने की परंपरा अपने आप में बताती है कि उनका स्थान कितना ऊंचा है. उन्होंने कहा कि माता-पिता ही उनके लिए सबसे बड़े हैं. इस मौके पर उनके पुत्र और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन और बहू विधायक दीपा मांझी भी मौजूद थीं. पूरे गांव में जश्न का माहौल रहा और कार्यकर्ताओं ने मांझी को बधाई दी.
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनने का सपना नहीं देखा था
अपने राजनीतिक जीवन को याद करते हुए मांझी ने कहा कि उन्होंने कभी मुख्यमंत्री बनने या केंद्र सरकार में मंत्री बनने का सपना तक नहीं देखा था. लेकिन जीवन में ऐसे मौके आए और वह बिहार के मुख्यमंत्री बने, बाद में केंद्र सरकार में मंत्री भी बने. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में देवी-देवताओं की पूजा को महत्व नहीं दिया, बल्कि माता-पिता और कर्म को सबसे ऊपर माना. उनका कहना था कि ईमानदारी से कर्म करने वाला व्यक्ति आगे बढ़ता है.
बीमारी के बाद माता-पिता के चरणों में पहुंचे
बता दें कि मांझी का जन्म 6 अक्टूबर 1944 को गया जिले के महकार गांव में हुआ था. संसद की आधिकारिक प्रोफाइल में उनके पिता का नाम रामजीत राम मांझी और मां का नाम सुकुमारी देवी दर्ज है. मांझी ने अपनी भावुकता की वजह बताते हुए कहा कि बीमारी के बाद उन्हें लगा कि शायद जिंदगी का बहुत समय बाकी नहीं है. इसी भाव के साथ वह अपने माता-पिता के चरणों में जन्मदिन मनाने पहुंचे हैं. माता-पिता की प्रतिमा के सामने उन्होंने अपने परिवार और परिजनों के स्वस्थ और सुरक्षित रहने की कामना की.
जन्मदिन पर पौधारोपण का संदेश भी
बता दें कि जुलाई में भी महकार में माता-पिता और पूर्वजों की प्रतिमाओं के अनावरण के दौरान मांझी भावुक हुए थे और उन्होंने माता-पिता को जीवन में सबसे बड़ा स्थान बताया था. इस बार मांझी के जन्मदिन के मौके पर महकार में पौधारोपण भी किया गया. उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने जन्मदिन समारोह को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कार्यकर्ताओं से पौधे लगाने की अपील की.
फार्म हाउस में लगाया पेड़
मांझी ने भी इस मौके पर एक फार्म हाउस में पौधा लगाया. इस तरह 82वें वर्ष में प्रवेश के मौके पर मांझी का जन्मदिन सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रहा. महकार में माता-पिता की प्रतिमा के सामने उनका भावुक होना उनके निजी जीवन, संघर्ष और उस सोच को सामने ले आया, जिसमें वह माता-पिता और कर्म को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत बताते हैं.