Russia Ukraine Aftermath : रूस ने तोड़ी यूक्रेन की ‘रीढ़’, टुकड़े-टुकड़े हुआ जेलेंस्की का ईगो, क्या है ‘साउथ ब्रिज’ वाला खेल?

Russia Ukraine Aftermath : रूस ने तोड़ी यूक्रेन की ‘रीढ़’, टुकड़े-टुकड़े हुआ जेलेंस्की का ईगो, क्या है ‘साउथ ब्रिज’ वाला खेल?


रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध में अब एक ऐसा खतरनाक और नया मोड़ आ गया है, जिसने न सिर्फ कीव की रफ्तार थाम दी है बल्कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के उस ईगो को भी भारी झटका दिया है, जिसके दम पर वो अब तक मॉस्को को ललकारते आ रहे थे. रूस की रिफाइनरियों को भारी नुकसान पहुंचाने के बाद 2 अक्टूबर की रात रूसी सेना ने ऐसा जवाब दिया है कि कीव कांप उठा है. कीव के मेयर इतने घबराए हुए हैं कि वो चीख-चीख कर बता रहे हैं कि ‘हमारा शहर टुकड़े-टुकड़े हो रहा है’.

रूस ने यूक्रेन की किस कमजोर नस पर किया अटैक?

रूसी सेना ने कीव के सबसे महत्वपूर्ण और लाइफलाइन माने जाने वाले ‘साउथ ब्रिज’ पर बेहद विनाशकारी ड्रोन स्ट्राइक कर दी. इस हमले के बाद उठती आग और धुएं की लपटों ने पूरे कीव शहर को दहला दिया है. कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को के मुंह से निकले शब्द ‘हमारा शहर टुकड़े-टुकड़े हो रहा है’, केवल एक नेता का बयान नहीं हैं, बल्कि ये उस लाचारी और खौफ की गवाही दे रहे हैं जिसने इस वक्त पूरे यूक्रेन को अपनी गिरफ्त में ले रखा है.

‘साउथ ब्रिज’ पर स्ट्राइक: सिर्फ लोहा-सीमेंट नहीं, ढहा दी कीव की लाइफलाइन

साउथ ब्रिज पर हुआ धमाका सिर्फ एक बुनियादी ढांचे का नुकसान नहीं है, बल्कि ये यूक्रेन की राजधानी कीव की रीढ़ की हड्डी पर सीधा अटैक है. भूगोल के लिहाज से समझें तो कीव शहर को ‘नीपर नदी’ दो हिस्सों में बांटती है, पूर्वी किनारा और पश्चिमी किनारा. 2022 के युद्ध से पहले कीव की कुल 30 लाख की आबादी में से एक-तिहाई से अधिक लोग पूर्वी किनारे पर रहते थे, जबकि सारे बड़े सरकारी दफ्तर, मंत्रालय, बड़ी कंपनियां और रोजगार के केंद्र पश्चिमी किनारे पर स्थित हैं.

रोजाना करीब 5 लाख लोग काम-काज के सिलसिले में बाएं से दाएं किनारे का सफर तय करते हैं. साउथ ब्रिज इस आवाजाही की सबसे मजबूत कड़ी था, जिस पर से होकर गाड़ियां और मेट्रो ट्रेनें गुजरती थीं.

  1. आवाजाही पर ब्रेक: इस हमले के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से साउथ ब्रिज को गाड़ियों, मिनी बसों और मेट्रो रेल के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है.
  2. शहर में आर्थिक पैरालाइसिस: 5 लाख लोगों का संपर्क मुख्य शहर से अचानक कट गया है. सड़कों पर किलोमीटर लंबा जाम है और कीव की दैनिक आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप पड़ गई हैं.
  3. लॉजिस्टिक्स का संकट: पुल टूटने से यूक्रेनी सेना और राहत सामग्री की सप्लाई लाइन भी बुरी तरह प्रभावित हुई है.

मेयर का छलका दर्द, ‘टुकड़े-टुकड़े’ होता कीव

साउथ ब्रिज पर हुए इस हमले के तुरंत बाद कीव की ‘डिफेंस काउंसिल’ को अचानक एक इमरजेंसी क्राइसिस मीटिंग बुलानी पड़ी. बैठक से बाहर निकले मेयर विटाली क्लिट्स्को के चेहरे पर साफ तौर पर खौफ और बेबसी देखी जा सकती थी. उन्होंने खुले तौर पर माना कि शहर इस वक्त ‘बेहद डरावनी और नाजुक स्थिति’ में पहुंच गया है.

मॉस्को अब सीधा कीव के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेट डेटा सेंटर्स, लॉजिस्टिक्स और पावर ग्रिड्स को निशाना बना रहा है. हाल ही में डेटा सेंटर्स पर हुए हमलों के कारण कीव के कई बड़े इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया. जब किसी देश की राजधानी में इंटरनेट न रहे, पुल बंद हो जाएं, और सड़कें जाम हो जाएं, तो सरकार का कंट्रोल अपने आप कमजोर पड़ने लगता है. यही वजह है कि इसे जेलेंस्की के ईगो पर सबसे करारी चोट माना जा रहा है.

पुतिन का ‘न्यू ऑर्डर’: सर्दियों से ठीक पहले बैकफुट पर धकेला

यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि पुलों और डेटा सेंटर्स पर ये अचानक हुआ बर्बर हमला कोई मामूली घटना नहीं है. दरअसल, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में अपनी वायु सेना और ड्रोन विंग पर लगी सभी पाबंदियों को खत्म करने का नया फरमान जारी किया था. इस ‘न्यू ऑर्डर’ के पीछे पुतिन की एक बहुत बड़ी रणनीतिक चाल छिपी हुई है.

  • सर्दियों को हथियार बनाना: पिछले साल की सर्दियों में कीव के ‘ट्रोईशचिना’ जैसे इलाकों में लोग शून्य से नीचे के तापमान में बिना हीटिंग और बिजली के हफ्तों रहने को मजबूर थे. पुतिन जानते हैं कि सर्दियों की शुरुआत से ठीक पहले अगर ऊर्जा और यातायात ढांचे को तोड़ दिया जाए, तो यूक्रेन का मनोबल खुद-ब-खुद टूट जाएगा.
  • सस्ते और घातक ड्रोन्स का इस्तेमाल: रूस अब गर्मियों से ही रोजाना दर्जनों की संख्या में तेज, सस्ते और जेट-संचालित ड्रोन्स दाग रहा है. यूक्रेन के पास मौजूद महंगे पश्चिमी एयर डिफेंस सिस्टम इन सस्ते ड्रोन्स की बौछार के आगे थक रहे हैं.

खारकीव से लेकर रिहायशी इलाकों तक तबाही का मंजर

रूस का ये आक्रामक रुख सिर्फ पुलों तक सीमित नहीं है. शुक्रवार की सुबह रूसी ड्रोन ने कीव में एक बहुमंजिला इमारत की ऊपरी मंजिलों पर हमला बोला, जिससे वहां भयंकर आग लग गई. इस हादसे में एक नागरिक की मौत हुई और कई घायल हुए.

वहीं यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव में रूस ने ‘गाइडेड बम’ से हमला किया. इस हमले में 2 लोगों की जान चली गई और 32 से ज्यादा लोग खून से लथपथ हो गए. रिहायशी इमारतों पर गिरते बम ये साफ संदेश दे रहे हैं कि रूस अब किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है.

जेलेंस्की का पलटवार: रूस की रिफाइनरियों पर हमला और पुतिन का 1% जीडीपी नुकसान

क्या जेलेंस्की इस दबाव के आगे पूरी तरह झुक गए हैं? जवाब है, नहीं. यूक्रेन भी इस खेल में चुपचाप बैठने को तैयार नहीं है. यूक्रेनी ड्रोन्स ने रूस की सीमा में काफी अंदर घुसकर वोल्गोग्राड स्थित ‘ल्यूकऑयल’ की विशाल तेल रिफाइनरी और समारा रीजन के एक तेल ठिकाने को धमाके से उड़ा दिया. इन पलटवारों ने रूस को भी तगड़ा जख्म दिया है.

खुद राष्ट्रपति पुतिन ने स्वीकार किया है कि यूक्रेनी ड्रोन्स द्वारा रिफाइनरियों पर किए गए हमलों से रूस को अपनी जीडीपी का 1 प्रतिशत सीधा नुकसान उठाना पड़ा है. दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शुमार रूस के अपने ही शहरों में पेट्रोल पंपों पर किलोमीटर लंबी लाइनें लग रही हैं.

क्या जेलेंस्की का ईगो ही बन रहा है यूक्रेन की तबाही का कारण?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यही है कि जेलेंस्की का पश्चिमी देशों के दम पर युद्ध जारी रखने का ईगो अब यूक्रेन की आम जनता पर भारी पड़ रहा है. ‘साउथ ब्रिज’ केवल एक पुल नहीं था, वो कीव की शांति और सामान्य जीवन की आखिरी उम्मीद जैसा था.

रूस ने इस पुल को तोड़कर ये साबित कर दिया है कि वो जब चाहे कीव को एक झटके में पूरी तरह काट सकता है. रूस का दावा है कि वो सिर्फ उन्हीं जगहों को निशाना बना रहा है जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी सेना कर रही थी, जैसे कीव का पुल, इज्मैल बंदरगाह, माइकोलाइव का डेटा सेंटर और ओडेसा जा रहे मालवाहक जहाज.

आज कीव की सड़कों पर पसरा खौफ, धुएं का गुबार और थमी हुई जिंदगी इस बात का सबूत है कि ‘साउथ ब्रिज’ के खेल में रूस ने यूक्रेन की चाल को मात दे दी है. अब देखना ये होगा कि रीढ़ टूटने और ईगो चकनाचूर होने के बाद जेलेंस्की बातचीत की मेज पर आते हैं या यूक्रेन को तबाही के और गहरे गढ़े में धकेलते हैं.



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