Mahalaxmi Vrat 2026: आज से महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ, 15 दिनों तक चलती है पूजा, धन-धान्य से भरेगा घर! जानें विधि, मुहूर्त, विसर्जन का दिन

Mahalaxmi Vrat 2026: आज से महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ, 15 दिनों तक चलती है पूजा, धन-धान्य से भरेगा घर! जानें विधि, मुहूर्त, विसर्जन का दिन


Mahalaxmi Vrat 2026: 15 दिनों के महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ आज 19 सितंबर शनिवार से हुआ है. हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत शुरू होता है और आ​​श्विन माह के कृष्ष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक चलता है. महालक्ष्मी व्रत में 15 दिनों तक धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी की पूजा होती है, उसके बाद विसर्जन होता है. उनकी कृपा से व्यक्ति को धन, संपत्ति, सुख, वैभव आदि की प्राप्ति होती है. इसमें व्रती को एक सूत्र पहनना होता है, जिसे अंतिम दिन उतारकर अलग करते हैं.

महालक्ष्मी व्रत 2026 मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत के लिए भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि की शुरूआत 18 सितंबर को दोपहर 01:00 पी एम से हुआ है और आज 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी. उदयाति​थि के अनुसार, आज से महालक्ष्मी व्रत करना उत्तम है.

आज सुबह 07 बजकर 40 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट के बीच पूजा कर सकते हैं. इस समय शुभ-उत्तम मुहूर्त रहेगा. आज का ब्रह्म मुहूर्त 04:34 ए एम से 05:21 ए एम तक और अभिजीत मुहूर्त 11:50 ए एम से दोपहर 12:39 पी एम तक रहेगा.

महालक्ष्मी व्रत का समापन 2026

इस बार आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 07:59 ए एम से शुरू हो रही है और इसका समापन 4 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर होगा. ऐसे में 15 दिनों वाले महालक्ष्मी व्रत का समापन 3 अक्टूबर शनिवार को होगा.

महालक्ष्मी व्रत 2026 पूजा विधि

स्कंदपुराण के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से आश्विन कृष्ण अष्टमी तक प्रत्येक दिन 16 अंजलि कुल्ले करके प्रात:काल में स्नान आदि से निवृत हो जाएं.

उसके बाद साफ वस्त्र धारण करें. फिर माता लक्ष्मी की मूर्ति की स्थापना लकड़ी की एक चौकी पर करें. अक्षत्, चंदन, फूल, माला, धूप, दीप आदि से उनका पूजन करें.

अब लक्ष्मी जी की मूर्ति के पास 16 सूत्र वाले डोरे में 16 गांठ लगा दें. उसे हल्दी से रंग दें. फिर प्रत्येक गांठ की पूजा लक्ष्म्यै नम: मंत्र से करें. फिर लक्ष्मी जी की पूजा करें.

पूजा के बाद धनं धान्यं धरां हर्म्यं कीर्तिमायुर्यश: श्रियम्। तुरगान् दन्तिन: पुत्रान् महालक्ष्मि प्रयच्छ मे।। मंत्र को पढ़कर उस डोरे को दाएं हाथ में बांध लें. लगातार 15 दिनों तक उस डोरे को दूर्वा और गे​हूं अर्पित करें.

आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन व्रत रखें. मिट्टी के हाथी पर माता महालक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करे दें. फिर विधिपूर्वक पूजा करें.

हाथ में हरी दूर्वा के 16 पल्लव और 16 अक्षत् लेकर महालक्ष्मी व्रत कथा सुनें. उसके बाद उसका विसर्जन कर दें.

महालक्ष्मी व्रत का महत्व

जो व्यक्ति महालक्ष्मी व्रत करता है, उसके पास दरिद्रता नहीं रहती है. लक्ष्मी की कृपा से वह धन संकट की स्थिति से बाहर आ जाता है. उसके धन, अन्न, भोजन, जमीन, भवन, प्रसिद्धि, आयु, सफलता में बढ़ोत्तरी होती है. इसके अलावा उसे वाहन, शक्ति, राजसी ठाट-बाट, पुत्र-पुत्री आदि की प्राप्ति होती है.



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