कहीं ये गलती करके पितरों को नाराज तो नहीं कर रहे? पंडित ने बताया बचने का उपाय
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Pitru Paksha: हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष का काफी महत्व बताया गया है. इस दौरान लोग अपने पितरों का अर्पण करते हैं. लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका ध्यान अगर नहीं रखा गया तो पितर नाराज हो सकते हैं. उन्हीं में से एक के बारे में आज आपको बताने वाले हैं.
हरिद्वार: हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष केवल तर्पण का पर्व नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और मर्यादा बनाए रखने का धार्मिक अनुष्ठान है. भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाले पितृ पक्ष के दिनों में घरों में दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और पूर्वजों के चित्रों को नमन कर उनका स्मरण किया जाता है. शास्त्रों में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के कड़े नियम बनाए गए हैं तो वहीं पितरों के स्थान और उनकी तस्वीरों का भी विशेष महत्व है.
कई बार अनजाने में की गई छोटी-सी गलती से पूरे अनुष्ठान का फल नष्ट हो जाता है. पितरों पूर्वजों के चित्रों पर पुरानी मालाओं और सामग्रियों की उपेक्षा पितृ दोष का कारण बन सकती है. शास्त्रों के नियमों की जानकारी देते हुए हरिद्वार के पंडित मनोज मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि पूर्वजों की तस्वीर पर साल भर रहने वाली माला और पितरों के स्थान पर रखी गई पूजन सामग्री को अगले वर्ष में होने वाले पितृ पक्ष के आगमन से पहले ही हटा लेना अनिवार्य है.
यहां विसर्जित करना चाहिए माला
पंडित मनोज ने बताया कि पितरों के चित्र से उतारी गई माला को भूलकर भी कूड़ेदान या घर के बाहर नहीं फेंकना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार पितरों के चित्र पर लगी फूल या प्लास्टिक की माला को गंगा या किसी पवित्र नदी, नहर और बहते हुए साफ पानी में ही विसर्जित किया जाना चाहिए.
पिंडदान और तर्पण का नहीं होगा लाभ
पंडित मनोज मिश्रा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पितरों, पूर्वजों की तस्वीर पर लगी पुरानी माला का अनादर करता है या तस्वीर पर लगी माला अगले वर्ष के पितृपक्ष तक नहीं हटाई जाती है तो पूरी श्रद्धा से किए गए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण का कोई लाभ नहीं होता है. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होने के बजाय नाराज हो जाते हैं, जिससे परिवार में कलह, आर्थिक तंगी, मांगलिक कार्य और वंश वृद्धि में बाधा बनी रहती हैं.
पंडित मनोज मिश्रा आगे बताते हैं कि पितृ पक्ष के समय में पितरों की तस्वीर पर नई माल अर्पित करें और पुरानी माला को श्रद्धा के साथ गंगा या बहते हुए साफ पानी में प्रवाहित कर दें ऐसा करने से पितरों का संपूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.