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Mumbai Double Decker Bridge : मुंबई में नाहुर-ऐरोली के बीच एक नया डबल डेकर ब्रिज बनाने को बीएमसी ने हरी झंडी दिखाई है. इस ब्रिज पर 1354 करोड़ रुपये खर्च होंगे. अभी गोरेगांव से ऐरोली जाने पर करीब दो घंटे लग जाते हैं. नया पुल बन जाने से यही सफर बस 20 मिनट में पूरा हो जाएगा.
डबल-डेकर ब्रिज नाहुर और ऐरोली के बीच रोड के ऊपर बनाया जाएगा. (Photo : AI)
नई दिल्ली. मायानगरी मुंबई के गोरेगांव से ऐरोली जाने वाले वाहन चालकों की इस रूट का भयंकर ट्रैफिक खूब इम्तिहान लेता है. पीक आवर्स के दौरान बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में लोग क्लच-ब्रेक दबाते-दबाते खूब परेशान होते हैं. समय के साथ तेल की भी खूब खपत होती है. लेकिन, आने वाले समय में करीब दो घंटे का यह सफर केवल 20 मिनट में पूरा हो जाएगा. न लंबे सिग्नल का झंझट होगा और न ही नाहुर-ऐरोली के पुराने जाम में फंसने का डर. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने इस पूरे रूट की तस्वीर बदलने के लिए 1,354.52 करोड़ रुपये से एक डबल-डेकर केबल-स्टेड ब्रिज बनाने की योजना बनाई है. वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (VJTI) को इस प्रोजेक्ट की फैसिबिलिटी स्टडी का काम दिया गया है.
यह महत्वाकांक्षी डबल-डेकर ब्रिज नाहुर और ऐरोली के बीच रोड के ऊपर बनाया जाएगा. लगभग 1.6 किलोमीटर लंबा यह केबल-स्टेड ब्रिज नाहुर रेलवे स्टेशन के पास से शुरू होकर ऐरोली टोल प्लाजा के पास कनेक्ट होगा. इसके बनने के बाद गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) की अंडरग्राउंड सुरंगों से पश्चिमी उपनगरों की तरफ से निकलने वाले वाहन पुराने नाहुर-ऐरोली फ्लाईओवर पर चढ़े बिना सीधे इस नए ब्रिज पर आ जाएंगे. इससे न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि वाहनों की रफ्तार भी बिना किसी रुकावट के बनी रहेगी.
चार क्लोवरलीफ आर्म्स भी बनेंगे
इस डबल डेकर ब्रिज का फायदा ठाणे और नवी मुंबई के अन्य इलाकों को भी मिलेगा. इस डबल-डेकर पुल के डिजाइन में चार विशेष क्लोवरलीफ आर्म्स शामिल किए गए हैं. इन लूप्स की बदौलत ठाणे और वाशी की ओर से आने वाले वाहन सीधे इस रूट से जुड़ सकेंगे और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड की टनल के जरिए गोरेगांव पहुंच जाएंगे. इससे समूचे इलाके के ट्रैफिक नेटवर्क को एक नया विकल्प मिलेगा.
VJTI करेगा फैसिबिलिटी स्टडी
इस डबल डेकर ब्रिज को अक्टूबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता और सुरक्षा मानकों की बारीक जांच के लिए बीएमसी ने वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (VJTI) को नियुक्त किया है. इस काम के लिए इंस्टीट्यूट को 6 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. प्रोजेक्ट को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है और यह जीएमएलआर प्रोजेक्ट के अंतिम और सबसे अहम चरण के रूप में बनेगा.