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Jharkhand Child Trafficking Case: झारखंड में बच्चों की चोरी के मामलों में गुलगुलिया गिरोह के बाद अब साहिबगंज के तीनपहाड़ गिरोह की संलिप्तता सामने आने से चिंता बढ़ गई है. तीनपहाड़ गिरोह का बांग्लादेश कनेक्शन भी सामने आया है. ऐसे में पुलिस के सामने अब चुनौती सिर्फ इन गिरोहों का पर्दाफाश करना नहीं, बल्कि त्योहारी सीजन में बच्चों को इनके संभावित खतरे से बचाना भी है. आशंका जताई जा रही है कि त्योहारों के दौरान राजधानी रांची समेत दूसरे शहरों में भी ऐसे गिरोह सक्रिय हो सकते हैं. पूरी खबर विस्तार से आगे पढ़िये.
गुलगुलिया और तीनपहाड़ गिरोह पर झारखंड पुलिस की नजर, त्योहारों में बच्चा चोरी की आशंका से अलर्ट
रांची. झारखंड में तीनपहाड़ गिरोह और गुलगुलिया गिरोह समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी बनकर उभरा है. खासकर इस गिरोह की पहचान चोरी और पॉकेटमारी करने वाले गैंग के तौर पर थी. लेकिन, इन दोनों गिरोह के द्वारा बच्चों की भी चोरी किए जाने के अपराध में नाम आने के बाद यह एक बड़ा खतरा सामने है. इस मामले को लेकर आईजी ऑपरेशन नरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इसे लेकर पुलिस सतर्क है, लेकिन इसके साथ ही त्योहारी सीजन में बच्चों की चोरी की घटनाएं बढ़ने की आशंका है. इस बात का अंदेशा है कति त्योहारों के दौरान कई गिरोह राजधानी में सक्रिय हो सकते हैं, जिसे देखते हुए सभी जिलों के एसपी की निर्देशित किया गया है. वहीं लोगों से भी अपील की गई है कि बच्चों को भीड़ भाड़ वाले इलाके में अकेला न छोड़ें और विशेष तौर से बच्चों के अभिभावक सतर्क रहें, ताकि इस तरह के खतरे को टाला जा सके.
बता दें कि रांची पुलिस ने अंश, आंशिका मामले में गुलगुलिया गिरोह का भंडाफोड़ किया था. वहीं अब छत्तीसगढ़ के विवान के रांची स्टेशन से अगवा होने के मामले में तीन पहाड़ गिरोह को भी डिकोड किया गया. बच्चों के अपहरण में तीन पहाड़ गिरोह और गुलगुलिया गैंग का कुछ एक ही तरह का पैटर्न है. ये दोनों गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की ही चोरी किया करते है, ताकि ज्यादा खोजबीन न हो सके.
दोनों गिरोह का एक जैसा पैटर्न
गुलगुलिया गिरोह छोटे बच्चों से जहां भीख मंगवाने और चोरी की घटनाओं में इस्तेमाल किया करता है. जबकि तीनपहाड़ गिरोह का भी कुछ इसी तरह का पैटर्न होता है. ये भी बच्चों से चोरी और पिक पॉकेटिंग करवाता है. तीनपहाड़ गिरोह ज्यादातर छोटे बच्चों के मोबाइल की पॉकेटमारी करवाता है. तीनपहाड़ गिरोह चोरी के ज्यादातर मोबाइल को बांग्लादेश में बेचा करता है. दोनों गिरोह के गुर्गे एक जगह स्थिर नहीं रहते, बल्कि कुछ ही दिनों में अपना स्थान बदल लेते हैं.
लड़कियों को देह व्यापार में धकेलते हैं
वहीं, चाइल्ड ट्रैफिकिंग के लिए कार्य करने वाले बैजनाथ ने बताया कि बच्चों की चोरी करने वाले ये दोनों गिरोह काफी खतरनाक है. दोनों गिरोह बच्चों को अपराध की दुनिया में धकेल देते हैं, जबकि लड़कियों का सौदा इनके द्वारा किया जाता है. चोरी या अपहृत की गई बच्चियों को देह व्यापार के काले धंधे में धकेल दिया जाता है. उन्होंने बताया कि बच्चा चोरी की सबसे ज्यादा घटना भीड़ भाड़ वाले स्थानों में होती है. इनमें मेला,स्टेशन, बाजार, पिकनिक स्पॉट और धार्मिक स्थल भी शामिल होते हैं. उन्होंने बताया कि त्योहारी सीजन में इस तरह के मामलों में वृद्धि होने की आशंका बनी रहती है.
वरिष्ठ पत्रकार ने क्या कहा?
वरीय पत्रकार शंभू नाथ चौधरी ने बताया कि गुलगुलिया के बाद अब तीनपहाड़ गिरोह की संलिप्तता बच्चों की चोरी मामले में सामने आई है. ऐसे में जरूरी है कि पुलिस मुख्यालय तीनपहाड़ के गिरोह ओर सख्त एक्शन ले, वहीं जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि तीनपहाड़ी को अपराधमुक्त बनाया जा सके.
त्योहारी सीजन में अलर्ट रहें
बहरहाल, दोनों गिरोहों के मामलों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस और समाज के सामने एक बड़ी चुनौती रखी है. गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के साथ यह भी जरूरी है कि उनके नेटवर्क, बच्चों की भर्ती और कथित तस्करी के रास्तों की जांच हो. खासकर त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशन, बाजार और मेले जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी और जन-जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.