UPSC Story: कमाल हैं गोरखपुर की 3 बहनें, दिन में बेचती हैं चाय, रात में करती हैं UPSC की तैयारी

UPSC Story: कमाल हैं गोरखपुर की 3 बहनें, दिन में बेचती हैं चाय, रात में करती हैं UPSC की तैयारी


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UPSC Story: गोरखपुर में दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी के गेट के सामने 3 सगी बहनें चाय का स्टॉल चलाती हैं. वर्तिका, वंदिता और अवंतिका नाम की ये तीनों बहनें यूपीएससी सीएसई पास करके आईएएस अफसर बनना चाहती हैं. पिता को पैरालिसिस होने के बाद से वे चाय बेचने के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं.

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UPSC Inspiring Story: ये तीनों बहनें सरकारी अफसर बनने की तैयारी में जुटी हैं

नई दिल्ली (UPSC Story). जिंदगी की राहें हमेशा आसान नहीं होतीं. अचानक से संकट आने पर अच्छे-अच्छों के हौसले डगमगा जाते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से ऐसी प्रेरणादायक और रोंगटे खड़े करने वाली कहानी आई है, जो साबित करती है कि इरादे मजबूत हों तो गरीबी और लाचारी भी कदमों की धूल बन सकती है. महराजगंज की 3 सगी बहनों- वर्तिका, वंदिता और अवंतिका ने आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकट के आगे घुटने टेकने के बजाय खुद अपनी किस्मत की लकीरें लिखने का फैसला किया है.

ये बहनें गोरखपुर में दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के गेट के सामने चाय का स्टॉल चलाती हैं. साथ ही देश की सबसे कठिन परीक्षा यानी UPSC को क्रैक करने का सपना भी संजो रही हैं. इन बहनों का सफर साबित करता है कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं होती. सुबह से शाम तक टी स्टॉल संभालना, मुस्कुराते हुए सर्व करना और फिर देर रात तक ऑनलाइन क्लास लेकर सिविल सर्विसेज की पढ़ाई करना.. इन बेटियों की दिनचर्या हर उस युवा के लिए सबक है जो छोटी-छोटी असफलताओं से घबरा जाते हैं.

संकटों से घिरा परिवार तो खोल ली चाय की दुकान

इन तीनों बहनों की जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी. उनके पिता रामसकल उपाध्याय महराजगंज की एक कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे. परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी थी. लेकिन 2017 में अचानक आए पैरालिसिस अटैक ने सब बदल दिया. पिता की नौकरी छूट गई, इलाज में जमापूंजी और गांव के खेत तक बिकने की नौबत आ गई. घर का खर्च चलाना और पिता के लिए हर महीने 5-6 हजार रुपये की दवाइयों का प्रबंध करना मुश्किल हो गया. बड़े भाई शिवम की पढ़ाई भी बीच में छूट गई और उन्हें टेलीकॉलर का काम संभालना पड़ा.

बेटियों ने संभाली जिम्मेदारी

परिवार को संभालने के लिए दूसरी बेटी वंदिता ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना और छोटी-मोटी नौकरियां करना शुरू किया. लेकिन उससे बात नहीं बनी. तब बहनों ने चाय की दुकान खोलने का फैसला किया. शुरुआत में मां माधुरी को समाज का डर था कि ‘लोग क्या कहेंगे?’ इसलिए उन्होंने मना कर दिया. लेकिन हालात नहीं सुधरे तो तीनों बहनों ने महज 8000 रुपये जोड़कर DDU गेट के सामने ‘बिलीवर बिस्ट्रो’ नाम से चाय का स्टॉल शुरू कर दिया. लोग उनकी चाय और मैगी के साथ-साथ उनके जज्बे के भी कायल हैं.

दिनभर स्टॉल संभालना और रात में IAS-IPS की तैयारी

इन बहनों का डेली रूटीन बेहद प्रेरक है. बड़ी बहन वर्तिका (22) बीएससी कर चुकी हैं और घर पर रहकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. वह सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करती हैं, परिवार और छोटी बहनों को संभालती हैं. फिर 5-6 घंटे पढ़ाई करती हैं. उनका सपना देश की जानी-मानी आईएएस अधिकारी बनना है. वंदिता (21) और सबसे छोटी बहन अवंतिका (19) DDU से बीए फर्स्ट ईयर की छात्रा हैं. वे सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक यूनिवर्सिटी गेट के सामने स्टॉल संभालती हैं.

तीनों बहनों को बनना है सरकारी अधिकारी

दुकान से लौटने और घर के छोटे-मोटे काम निबटाने के बाद ये तीनों बहनें रात में 12 बजे से लेकर 2-3 बजे तक यूट्यूब और ऑनलाइन माध्यमों से अपनी पढ़ाई और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करती हैं. वंदिता का सपना पुलिस सेवा में जाकर IPS बनने का है, जबकि अवंतिका बड़ी बहन की तरह आईएएस अधिकारी बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं. माता-पिता को अपनी बेटियों पर गर्व है कि उन्होंने बुरे वक्त में परिवार को टूटने नहीं दिया. बड़ी बहन ने आईएएस सृष्टि देशमुख को अपना आदर्श बताया है.



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