Bahubali Truck News: देशभर में आजकल एक ट्रक की बहुत चर्चा है या यूं कहें कि एक ‘महाट्रक’ लगातार खबरों में बना हुआ है. 308 पहिए वाला ये बाहुबली ट्रक ओडिशा के पारादीप से करीब 5 महीने पहले यूपी के लखीमपुर खीरी के लिए निकला था, लेकिन अभी तक अपनी मंज़िल पर नहीं पहुंच पाया है. वजह है इसका आकार और इसपर लदा करीब 200 टन का वजन जिसके चलते ये चींटी की चाल से रास्ता तय कर रहा है. एक दिन में ये ट्रक बामुश्किल 15-20 किलोमीटर ही चल पाता है जिसकी वजह से ये अभी तक अपनी मंज़िल पर नहीं पहुंचा है.
ओडिशा से झारखंड और बिहार होता हुआ ये महाट्रक उत्तर प्रदेश पहुंचा तो लगा कि अब तो रास्ता आसान है लेकिन लेकिन यहां तो हर मोड़ पर नई मुसीबत इंतजार कर रही थी. बाहुबली ट्रक बनारस पहुंचा तो देखने वालों की भीड़ लग गई. डाफी इलाके में पहुंचा तो ऐसा फंसा कि निकलने में घंटो लग गए. दरअसल रास्ते पर पड़े टोल को पार कराने के लिए खेत में खास रास्ता बनाया गया था, लेकिन ये ट्रक जैसे ही उस पर उतरा उसके छह पहिए दलदल में धंस गए. घंटों की मशक्कत के बाद पहिए बाहर निकले गए.
आगे और भी कठीन हो गया रास्ता
इसके बाद मोहनसराय में फुटओवर ब्रिज इस महाट्रक की ऊंचाई के आगे छोटा पड़ गया, तो ब्रिज को काटकर दो हाइड्रा क्रेन की मदद से ऊपर उठाना पड़ा. तब जाकर ट्रक आगे बढ़ पाया. लेकिन बनारस में महाट्रक की मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई. आगे हरहुआ रिंग रोड पर भी ऊंचाई का पेंच फंस गया. जब ट्रक पुल के नीचे से गुज़रते हुए एक बीम से टकरा गया और बीम का एक हिस्सा टूट गया. ट्रक को तुरंत रोककर रास्ता बदला गया.
45 घंटों तक बनारस में फंसा रहा ये महाबली
308 पहियों वाला ये महाट्रक अब बनारस में आकर ऐसा फंसा है कि आगे बढ़ने के लिए सड़क से ज्यादा जुगाड़ की जरूरत पड़ रही है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2 अक्टूबर तक ये हरहुआ-संदहा वाले इलाके में ही अटका हुआ है और अभी गाजीपुर तक नहीं पहुंच पाया है. बनारस पहुंचने के बाद इसका सामना सबसे पहले डाफी टोल से हुआ, जहां करीब 45 घंटे की मशक्कत के बाद इसे निकाला गया. फिर कोइरजपुर अंडरपास के पास रात में रोका गया.
मोहनसराय में फुटओवर ब्रिज इसकी ऊंचाई के आगे छोटा पड़ गया, तो ब्रिज को काटकर दो हाइड्रा क्रेन की मदद से ऊपर उठाना पड़ा. आगे हरहुआ रिंग रोड पर भी ऊंचाई का पेंच फंस गया. 2 अक्टूबर को तो बॉयलर पुल के नीचे निकले बीम से टकरा गया और बीम का एक हिस्सा टूट गया. ट्रक को तुरंत रोककर रास्ता बदला गया. यानी बनारस में महाट्रक का हाल कुछ ऐसा है… मंजिल लखीमपुर है, लेकिन बनारस कह रहा है—पहले मेरी पहेलियां तो सुलझाओ!
बनारस में ऐसा उलझा कि…
308 पहियों वाला महाट्रक बनारस पहुंचा तो लगा कि अब मंजिल का रास्ता साफ होगा, लेकिन यहां तो हर मोड़ पर नई मुसीबत इंतजार कर रही है. कभी पुल छोटा पड़ गया, कभी रास्ता संकरा और कभी खुद सड़क ही इस बाहुबली का वजन नहीं संभाल पाई. डाफी में तो हाल ये हुआ कि महाट्रक के छह पहिए दलदल में धंस गए और उसे निकालने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ी. यानी ये महाट्रक सिर्फ 308 पहियों पर नहीं चल रहा बल्कि हर कदम पर रास्ते के साथ दो-दो हाथ भी कर रहा है.
सड़क भी जोड़ ले रहा है हाथ
अब जरा सोचिए ट्रक में करीब 41 मीटर लंबी मशीन और उसके नीचे 308 पहिए लेकर सड़क पर निकलेंगे तो सड़क खुद कहेगी भाई, मेरे बस की बात नहीं! इस महाट्रक की सबसे बड़ी समस्या है इसका साइज़. करीब 7 मीटर चौड़ा और करीब 100 फीट लंबा ट्रेलर सामान्य सड़क से नहीं निकल सकता. कहीं सड़क संकरी मिली, कहीं बिजली के खंभे, पेड़ और तार रास्ते में आए, कहीं साइनेज और होर्डिंग हटाने पड़े, तो कहीं फुटओवर ब्रिज रास्ते में खड़ा मिल गया. यूपी के चंदौली में तो चार दिन तक ट्रक लगभग ठिठका रहा और एक नया रास्ता बनाकर ट्रक को आगे निकाला गया. बारिश ने भी रफ्तार रोक दी. कई जगह ट्रैफिक रोकना पड़ा और ब्रिज तक को काटना पड़ा. यानी इस महाट्रक के लिए रास्ता पहले बनता है… फिर ये ट्रक चलता है.
इस महाट्रक पर लदा क्या है?
इस महाट्रक पर बेल्जियम से आया एक विशाल इंडस्ट्रियल वेसल यानी वैक्यूम बॉयलर है.
- ये वेसल करीब 41 मीटर लंबा और करीब 200 टन वजनी है.
- इसका सफर अप्रैल 2026 में बेल्जियम से शुरू हुआ, जहां से समुद्र के रास्ते करीब एक महीने में ये ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंचा.
- पारादीप से इसे इस खास मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादा गया.
- इस वेसल को यूपी के लखीमपुर खीरी के कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल्स के नए बायोपॉलिमर प्लांट में ले जाया जा रहा है.
- यहां गन्ने से PLA यानी Polylactic Acid बनाया जाना है, जिससे बायोप्लास्टिक तैयार होगा.
इसकी मेंटनेंस में 60 के करीब लोग
308 पहियों वाला ये बाहुबली सामान्य पेट्रोल पंप पर जाकर लाइन में लगकर टंकी फुल नहीं करवा सकता. इसके लिए डीजल की सप्लाई ट्रक के पास ही पहुंचाई जाती है. यानी जहां महाट्रक रुकता है, वहां उसके लिए ईंधन की भी पूरी व्यवस्था पहुंचती है.
- ये महाट्रक रोजाना करीब 200 लीटर डीजल की खपत कर रहा है.
- इसकी रफ्तार भी इतनी धीमी है कि रास्ता साफ होने पर करीब 20 किलोमीटर और मुश्किल रास्तों पर सिर्फ 10 से 12 किलोमीटर तक ही रोज चल पाता है.
- ऐसे में ये सिर्फ किलोमीटर ही नहीं खा रहा है बल्कि डीजल भी लगातार पी रहा है.
- अब तक इसके ईंधन पर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने की बात सामने आई है.
- इस ट्रक के साथ करीब 60 लोगों की टीम लगातार चल रही है, जो इसकी मेंटेनेंस का ख्याल रखती है.
- स्टाफ के रहने, सोने और खाने-पीने का इंतज़ाम भी ट्रक में ही है.
चलता फिरता तमाशा
लेकिन सड़क पर चलता ये ट्रक अब सिर्फ ट्रांसपोर्ट का साधन नहीं रहा… चलता-फिरता तमाशा बन गया है.जहां ये रुकता है, वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती है. ओडिशा हो, झारखंड हो, बिहार हो या अब यूपी जहां से ट्रक गुज़र रहा है लोग सड़कों पर जमा हो जाते हैं, सेल्फी खींचने लगते हैं , कंटेंट क्रिएटर्स की भी चांदी हो गई है. इस वजह से ट्रक की रफ्तार और धीमा हो गई है. क्योंकि प्रशासन को ट्रक के लिए तो रास्ता बनाना ही पड़ रहा है साथ ही भीड़ को भी काबू में करना पड़ रहा है.
जमकर बन रहे सोशल मीडिया पर रील
सड़क पर ये महाट्रक धीरे-धीरे चल रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी रफ्तार काफी तेज है! जहां-जहां ये ट्रक पहुंचता है, वहां कैमरे पहले पहुंच जाते हैं! चंदौली में ट्रक के रुकने की खबर मिली तो आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से लोग पहुंच गए. लोगों ने ट्रक के साथ ही डांस की रील्स बनानी शुरू कर दीं. बनारस में तो इसका क्रेज और बढ़ गया. लोग घंटों का सफ़र तय करके इस ट्रक के साथ रील बनाने पहुंच गए. रील बनाने के लिए लोग सड़क किनारे घंटों खड़े रहे.