Ground Report: ना पानी और ना बैठने की व्यवस्था, खुले आसमान के नीचे बसें; सीधी के नए बस स्टैंड पर उठे सवाल

Ground Report: ना पानी और ना बैठने की व्यवस्था, खुले आसमान के नीचे बसें; सीधी के नए बस स्टैंड पर उठे सवाल


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Sidhi New Bus Stand Ground Report: सीधी शहर में लंबे समय से संचालित पुराने सोनांचल बस स्टैंड से अब बसों की आवाजाही पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है. जिलेभर में संचालित होने वाली बसों का संचालन अब न्यू बस स्टैंड यानी श्याम प्रसाद मुखर्जी बस स्टैंड से किया जा रहा है. प्रशासन के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर दक्षिणी रूट पर चलने वाली बसों और यात्रियों पर पड़ा है. वहीं पुराने बस स्टैंड से जुड़े फुटपाथ व्यापारियों और बस ऑपरेटरों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है. बस संचालकों का आरोप है कि जिस न्यू बस स्टैंड से अब 350 से ज्यादा बसों का संचालन होना है. वहां पर्याप्त व्यवस्थाएं तक नहीं हैं. आखिर क्यों बस स्टैंड बदलने के फैसले को लेकर उठ रहे हैं सवाल? आइए रिपोर्ट के माध्यम से समझते हैं.

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सीधी में नए बस स्टैंड को लेकर दिक्कत

Sidhi New Bus Stand Ground Report: सीधी शहर में अब तक दो बस स्टैंड से बसों का संचालन किया जा रहा था. इनमें पुराना सोनांचल बस स्टैंड शहर के बीचों-बीच होने के कारण यात्रियों के लिए लंबे समय से प्रमुख केंद्र बना हुआ था. दक्षिणी दिशा के रूट पर जाने वाली बसों के अलावा रात्रिकालीन बसों और सुबह करीब 9 बजे तक कई बसों का संचालन भी इसी बस स्टैंड से होता था. लेकिन अब जिला प्रशासन ने पुराने बस स्टैंड से बसों की आवाजाही पर रोक लगा दी है. प्रशासन के इस फैसले के बाद जिलेभर की बसों को न्यू बस स्टैंड यानी श्याम प्रसाद मुखर्जी बस स्टैंड से संचालित किया जा रहा है. बस स्टैंड बदलने के फैसले का सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ा है, जो शहर के पुराने बस स्टैंड से बस पकड़ने के आदी रहे हैं. खासकर दक्षिणी रूट पर जाने वाले यात्रियों को अब न्यू बस स्टैंड तक पहुंचना पड़ रहा है. इससे अतिरिक्त दूरी और आने-जाने के खर्च का असर यात्रियों पर पड़ने की बात सामने आ रही है. वहीं पुराने बस स्टैंड के आसपास लंबे समय से कारोबार कर रहे फुटपाथ व्यापारियों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा होने की बात कही जा रही है.

न्यू बस स्टैंड में बसों के खड़े होने के लिए सिर्फ 12 खांचे बने
बसों की आवाजाही बंद होने से यहां आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में कमी आई है, जिसका सीधा असर छोटे दुकानदारों और फुटपाथ कारोबारियों पर पड़ रहा है. सबसे बड़ा सवाल न्यू बस स्टैंड की व्यवस्थाओं को लेकर उठाया जा रहा है. बस संचालकों का कहना है कि सीधी जिले में प्रतिदिन 350 से अधिक बसों का संचालन होता है, लेकिन न्यू बस स्टैंड में बसों के खड़े होने के लिए सिर्फ 12 खांचे बनाए गए हैं.

नए बस स्टैंड में सुविधाओं के अभाव की बात आई सामने
ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में बसों का संचालन किस तरह व्यवस्थित किया जाएगा. बस संचालकों के मुताबिक न्यू बस स्टैंड में पर्याप्त शेड, पार्किंग, यात्रियों के बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है. उनका कहना है कि बसें खुले आसमान के नीचे संचालित हो रही हैं. यात्रियों के लिए पेयजल, बैठने की जगह, पर्याप्त शेड और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. बस संचालकों का कहना है कि बसों को नए स्थान पर शिफ्ट करने से पहले वहां यात्रियों और बसों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाना चाहिए था.

पुराने बस स्टैंड की जगह पर शॉपिंग कॉम्लेक्स बनाए जाने का प्लान
दूसरी तरफ प्रशासन की ओर से पुराने बस स्टैंड की खाली होने वाली जमीन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना बताई जा रही है. बस स्टैंड बदलने के फैसले के बाद ऑटो संचालकों को जरूर इसका सीधा फायदा मिलता दिखाई दे रहा है. पुराने बस स्टैंड की जगह अब बसों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को न्यू बस स्टैंड तक पहुंचने के लिए ऑटो का सहारा लेना पड़ रहा है. एक तरफ प्रशासन शहर के विकास और पुराने बस स्टैंड की जमीन के बेहतर उपयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ बस ऑपरेटर, यात्री और फुटपाथ कारोबारी नई व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

बहरहाल सीधी में न्यू बस स्टैंड से शुरू की गई नई व्यवस्था आने वाले दिनों में किस तरह जमीन पर काम करती है. यह देखने वाली बात होगी. फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है 350 से ज्यादा बसों के संचालन के लिए न्यू बस स्टैंड में पर्याप्त जगह और यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना. क्योंकि बस स्टैंड सिर्फ बसों के आने-जाने की जगह नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों की रोजमर्रा की आवाजाही का प्रमुख केंद्र होता है.



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