ताइवान जलडमरूमध्य के पानी में एक बार फिर से जंग की बू तैरने लगी है. चीनी चालबाजियों को हमेशा चुपचाप सहन करने वाले ताइवान ने इस बार समुद्र के बीचों-बीच ऐसा सबक सिखाया है कि बीजिंग के होश उड़ गए. ताइवान की समुद्री सीमा में घुसपैठ कर रही एक चीनी बोट ने शुरुआत में ताइवानी चेतावनियों को बेहद हल्के में लिया, लेकिन जैसे ही ताइवान के कोस्ट गार्ड ने उस पर घातक से हमला बोला, चीनी घुसपैठियों को जान बचाकर उल्टे पैर भागना पड़ा. ये घटना केवल दो जहाजों की झड़प भर नहीं है, बल्कि इसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस गणित की हवा निकाल दी है, जिसमें वो ताइवान की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे थे.
ताइवानी वॉटर कैनन का हमला, समुद्र में चीन पर हुआ अटैक
चीन अकसर अपने छोटी नाव भेजकर अपने पड़ोसियों की लिमिट चेक करता रहता है. इस बार उसने ताइवान के साथ ऐसा ही किया. ये घटना ताइवान के अधिकार क्षेत्र वाले समुद्री इलाके की है. ताइवान के जल क्षेत्र में अवैध रूप से एक चीनी मछली पकड़ने वाली नाव दाखिल हो गई. ताइवानी कोस्ट गार्ड ने लाउडस्पीकर पर चेतावनी देते हुए बोट को तुरंत पीछे हटने को कहा. चीनी चालक दल ने इस चेतावनी को नजरअंदाज किया और आगे बढ़ता रहा.
इसके बाद ताइवान के जांबाज कोस्ट गार्ड ने बिना देरी किए बोट पर तेज दबाव वाली वॉटर कैनन से सीधा अटैक कर दिया. पानी की इस प्रचंड बौछार का हमला इतना खतरनाक था कि चीनी नाव की खिड़कियां और ढांचा हिल गया. पानी के इस करारे हमले से चीनी बोट पर अफरा-तफरी मच गई और चालक दल बोट को मोड़कर ताइवानी सीमा से बाहर भाग खड़ा हुआ.
ताइवान ने इस सख्त कार्रवाई से पूरी दुनिया को संदेश दे दिया है कि वो अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.
चीनी ‘ग्रे-जोन टैक्टिक्स’ और ताइवान का करारा जवाब
चीन लंबे समय से ताइवान को उकसाने के लिए ‘ग्रे-जोन टैक्टिक्स’ का इस्तेमाल करता आ रहा है. इसमें बिना किसी घोषित युद्ध के अपनी नागरिक, व्यापारिक या फिशिंग बोट्स को ताइवान की सीमाओं में भेजा जाता है, ताकि ताइवान की सैन्य तत्परता और प्रतिक्रिया देने की क्षमता को आंका जा सके.
चीन को लगता था कि ताइवान सीधा हमला करने से डरेगा, लेकिन इस बार ताइवान ने चीनी मंशा को भांपते हुए बिना हिचकिचाहट के हमला बोल दिया. इससे चीन का वो आकलन पूरी तरह गलत साबित हो गया कि ताइवान दबाव में झुक जाएगा.
कहां गलत हो गई ट्रंप की गणित?
इस पूरे बवाल के बीच सबसे बड़ा मैसेज वाशिंगटन के लिए है. अमेरिका और ताइवान के बीच होने वाली 14 अरब डॉलर की हथियारों की डील लंबे समय से अटकी हुई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मेगा डिफेंस पैकेज को ये सोचकर रोक रखा था कि वो इसका इस्तेमाल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यापारिक बातचीत में एक ‘नेगोशिएटिंग चिप’ यानी मोलभाव के मोहरे की तरह करेंगे. ट्रंप का गणित ये था कि हथियार रोककर वो चीन को खुश रखेंगे और ताइवान को भी अपने इशारों पर नचाएंगे. उन्हें ना जान क्यों पूरा कॉन्फिडेंस है कि चीन और ताइवान के बीच कोई जंग नहीं होने वाली लेकिन समुद्र में हुई इस लेटेस्ट घटना ने ट्रंप के इस गणित को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है.
ताइवान ने दिखा दिया कि भले ही अमेरिका उसे हथियार देने में देरी करे, वो अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी हरी झंडी का इंतजार नहीं करेगा. चीन के साथ शी-ट्रंप की ‘घनिष्ठ मित्रता’ के दावों के बावजूद, जमीन और समुद्र पर चीन का आक्रामक रुख जरा भी कम नहीं हुआ है.
क्या अमेरिका ने ताइवान पर हमले का खतरा कम आंका?
जैसे-जैसे वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बैकडोर कूटनीति तेज हुई है, ऐसा लगा कि अमेरिका ने ताइवान पर चीन के आक्रमण के जोखिम को कम आंकना शुरू कर दिया है.
पहले जहां शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को 2027 तक ताइवान पर सैन्य कब्जे के लिए तैयार रहने का अल्टीमेटम दिया था, वहीं अब अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना है कि चीन 2028 से पहले ऐसा कोई हमला नहीं करेगा. अमेरिका के इस बदले हुए आकलन के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं.
- शी जिनपिंग द्वारा सेना में ‘सफाई’: हाल के दिनों में शी जिनपिंग ने अपनी ही सेना और कम्युनिस्ट पार्टी के टॉप कमांडरों और मंत्रियों को अचानक पदों से हटाकर बर्खास्त कर दिया है. इस आंतरिक उथल-पुथल की वजह से चीनी सेना फिलहाल किसी बड़े युद्ध के लिए तैयार नहीं दिखती.
- 2028 ताइवान चुनावों पर दांव: बीजिंग उम्मीद कर रहा है कि ताइवान में 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में कोई चीन-समर्थक पार्टी सत्ता में आ जाए, जिससे बिना गोली चलाए काम बन जाए.
2028 का चुनाव: KMT बनाम DPP की खतरनाक जंग
ताइवान की घरेलू राजनीति इस वक्त दो विरोधी विचारधाराओं में बंटी हुई है, जो इस पूरे क्षेत्रीय तनाव का सेंटर हैं.
- कुओमिंतांग (KMT – बीजिंग समर्थक रुख): ताइवान की प्रमुख विपक्षी पार्टी KMT चीन के साथ बातचीत और व्यापारिक रिश्तों का समर्थन करती है. KMT की अध्यक्ष चेंग ली-वुन ने खुद चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. चीन को उम्मीद है कि 2028 में KMT जीती, तो ताइवान का विलय आसान हो जाएगा.
- डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP – संप्रभुता की पैरोकार): सत्तारूढ़ DPP पार्टी ताइवान की आजादी और संप्रभुता से रत्ती भर समझौता करने को तैयार नहीं है. चीनी नाव पर वॉटर कैनन का हमला इसी DPP सरकार की सख्त नीति का नतीजा है.
अगर 2028 में DPP दोबारा चुनाव जीत जाती है, तो चीन के कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद हो जाएंगे और 2028 के बाद चीन का ताइवान पर सीधा सैन्य हमला करने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा.
Taiwan hit a Chinese fishing boat with a water cannon after it refused repeated orders to leave restricted waters near Dongsha Island.
Then things took a surprising turn:
• 3 radio warnings were ignored.
• Taiwan’s Coast Guard used water cannon to force the boat to move.… pic.twitter.com/WeqKpGGxIA