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Nainital Pink Lady Asha Sharma: नैनीताल की आशा शर्मा ने अपने स्वास्थ्य से जुड़े कठिन दौर को महिलाओं के लिए जागरूकता की मुहिम में बदल दिया. खुद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से गुजरने के बाद उन्होंने महिलाओं को ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया. पिछले कई वर्षों में वह कुमाऊं और गढ़वाल के 50 से 60 गांवों तक पहुंचकर हजारों महिलाओं और छात्राओं से संवाद कर चुकी हैं. अक्टूबर में वह नैनीताल में हर साल पिंक रैली भी आयोजित करती हैं, जिसके जरिए महिलाओं को बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर जांच कराने का संदेश दिया जाता है.
नैनीताल: जिंदगी में मुश्किलें आने पर कई लोग हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने दर्द को ही दूसरों की ताकत बना लेते हैं. नैनीताल की आशा शर्मा ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं. अपने स्वास्थ्य से जुड़े कठिन अनुभवों के बाद उन्होंने महिलाओं को कैंसर के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया. आज वह नैनीताल में ‘पिंक लेडी’ के नाम से पहचानी जाती हैं और वर्षों से महिलाओं के बीच जागरूकता अभियान चला रही हैं.
आशा शर्मा के मुताबिक, उनकी जिंदगी में स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां साल 2011 में शुरू हुईं. अचानक पेट में तेज दर्द होने के बाद उन्होंने डॉक्टर से जांच कराई. जांच में गर्भाशय में करीब 3 सेंटीमीटर की गांठ पाई गई. कुछ समय बाद जब दोबारा जांच हुई तो गांठ का आकार बढ़कर करीब 6 सेंटीमीटर हो चुका था. इसके बाद सर्जरी के समय गांठ का आकार करीब 10 सेंटीमीटर बताया गया और डॉक्टरों को उनका गर्भाशय निकालना पड़ा.
अपने दर्द को बनाया हजारों महिलाओं की आवाज
यह मुश्किल दौर अभी खत्म नहीं हुआ था. आशा बताती हैं कि साल 2002 से ही उनके सीने में दर्द की समस्या थी, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक इसे नजरअंदाज किया और दर्द कम करने के लिए पेनकिलर लेती रहीं. जब परेशानी बढ़ी तो उन्होंने जांच कराई, जिसमें ब्रेस्ट में गांठ का पता चला. इसके बाद वर्ष 2014 में उनकी ब्रेस्ट सर्जरी हुई. आशा के मुताबिक, 6 जनवरी 2014 को उन्होंने तय किया कि उनके सामने आए अनुभव केवल उनकी जिंदगी तक सीमित नहीं रहेंगे. उन्होंने इसे महिलाओं और गरीब वर्ग को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का संकेत माना और इसी सोच के साथ काम शुरू किया. आगे चलकर इसी प्रयास ने ‘पिंक मुहिम’ का रूप लिया.
50-60 गांवों में हजारों महिलाओं को किया जागरूक
आशा शर्मा बताती हैं कि पहाड़ों के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करना आज भी आसान नहीं है. खासकर स्तन और सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों को लेकर जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं समय पर जांच नहीं करा पातीं. इसी वजह से उन्होंने शहर तक सीमित रहने के बजाय गांव-गांव जाकर महिलाओं से संवाद करना शुरू किया. वर्ष 2020 में उन्होंने आशा फाउंडेशन का गठन किया. इसके बाद उन्होंने कुमाऊं और गढ़वाल के अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर महिलाओं और छात्राओं को स्तन कैंसर के लक्षणों, जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व के बारे में जागरूक किया.
उनके मुताबिक, अब तक वह करीब 50 से 60 गांवों तक पहुंच चुकी हैं. वहीं, उनके अभियानों के माध्यम से हजारों महिलाओं और छात्राओं को ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक किया जा चुका है. आशा का कहना है कि आज भी कई ग्रामीण महिलाएं अपने शरीर में होने वाले बदलावों को परिवार या डॉक्टर के सामने बताने में संकोच करती हैं. ऐसे में जागरूकता के साथ महिलाओं को यह समझाना जरूरी है कि किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच जरूर कराएं.
अक्टूबर में निकलती है पिंक रैली
हर साल अक्टूबर महीने में आशा शर्मा की ओर से नैनीताल में पिंक रैली का आयोजन किया जाता है. अक्टूबर को दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है. इसी के तहत शहर में रैली निकालकर लोगों को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक किया जाता है. आशा के मुताबिक इस वर्ष उनकी 8वीं पिंक रैली 3 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी. रैली सुबह 8 बजे मल्लीताल स्थित डीएसए ग्राउंड से शुरू होगी. उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल रैली निकालना नहीं, बल्कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग करना और बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचानने के लिए प्रेरित करना है. अपने संघर्ष को सामाजिक जागरूकता की मुहिम में बदलने वाली आशा शर्मा के प्रयासों को सुष्मा स्वराज स्त्री शक्ति सम्मान और हिमालय नारी शक्ति सम्मान जैसे सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है. उनकी कहानी यह बताती है कि व्यक्तिगत मुश्किलों के बावजूद कोई व्यक्ति अपने अनुभवों को समाज के लिए जागरूकता और उम्मीद का माध्यम बना सकता है.