लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 10 राज्य सभा सीटों पर होने वाले चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने ट्विस्ट पैदा कर दिया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जब से कहा है कि वह अपना तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारेंगे तब से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा और बीजेपी की मौजूदा स्ट्रेंथ के हिसाब से आठ सीटों पर बीजेपी और दो सीटों पर सपा के उम्मीदवार जीतने चाहिए. सपा ने रामगोपाल यादव और प्रसिद्ध उद्योगपति धनराज नथवानी का नॉमिनेशन करवा दिया है और अगले एक दो दिनों में तीसरे उम्मीदवार के उतारे जाने की बात कही जा रही है.
बीजेपी के आठ और सपा के 2 प्रत्याशियों की जीत तय
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं. 10 राज्यसभा की सीटें खाली हुई. एक राज्यसभा को सदस्य को चुनाव जीतने के लिए 37 विधायकों का वोट चाहिए. मौजूदा वक्त में बीजेपी के 256 विधायक हैं. वहीं सपा के पास कागजों में 101 विधायक हैं. हालांकि इसमें से दो विधायकों चार विधायकों को सपा अपना नहीं मानती है, जिसमें पूजा पाल, आशुतोष समेत दो और विधायक सपा छोड़ चुके हैं. इस हिसाब से सपा के विधायकों की संख्या 101 से घटकर 97 रह जाती है. इसमें कांग्रेस के दो विधायकों को जोड़ दें तो यह नंबर 99 हो जाता है. समाजवादी पार्टी ने जिन दो प्रत्याशियों का नॉमिनेशन कराया है उनके जीतने के लिए कुल 74 विधायकों के वोट की जरूरत होगी. अब सपा के पास 74 वोट खर्च करने के बाद 99 में 25 वोट बचते हैं.
दूसरी तरफ हर उम्मीदवार बीजेपी को अपने आठ उम्मीदवारों को जीत दिलाने के लिए 37 वोटों के हिसाब से 296 वोटों की जरूरत होगी. इसमें 256 बीजेपी के विधायक हैं. 13 अपना दल के, नौ आरएलडी के, 6 सुभाषपा और 5 निषाद पार्टी के हैं. इसे दो रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के दो विधायकों को भी जोड़ा जा रहा है. इस वक्त यूपी विधानसभा की छह सीटें खाली है, जिसमें से कुछ विधायकों की मौत हो गई है और कुछ ने अलग-अलग वजहों से सीटें छोड़ी हैं. इन छह विधायकों में तीन असंबद्ध हैं, जिसमें अभय सिंह, राकेश सिंह और मनोज पांडे हैं. पूजापाल के बारे में समाजवादी पार्टी ने लिखकर नहीं दिया.
इस हिसाब से एनडीए के पास अभी 297 वोट हैं. यानी उनके आठ उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे. बीजेपी आठ से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतार नहीं सकती है. अगर अखिलेश यादव ने तीसरे कैंडिडेट का अनाउंसमेंट कर दिया जिसका वो इशारा अपने खास लोगों से कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ इंतजाम हो रहा है, क्योंकि उन्हें आठ वोटों का इंतजाम करना है. इससे उनके पास दो उम्मीदवारों को जीत दिलाने के बाद भी 33 वोट हो जाएंगे, जिसके दम पर उनके तीसरे उम्मीदवार के भी जीतने की भी गारंटी हो जाएगी.
आठ वोट कहां से जुटाएंगे अखिलेश यादव? समझें पूरा गणित
चर्चा है कि अखिलेश यादव राज्य सभा चुनाव में अपने तीसरे उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए करीब-करीब आठ वोटों का इंतजाम करने की कगार पर हैं. दरअसल, ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के छह विधायक हैं. इसमें से चार विधायक 2022 का चुनाव जीतने के बाद से ही अपनी गाड़ियों में समाजवादी पार्टी का झंडा लगाना शुरू कर दिया था. ओपी राजभर के बेटे अरुण राजभर भी टीवी चैनल पर इस बात को स्वीकार चुके हैं. ऐसे में माना जाता है कि ये चार विधायक भले ही टेक्निकली सुभासपा के हैं, लेकिन इनका आकर्षण आज भी समाजवादी पार्टी के प्रति है.
इसके अलावा चर्चा है कि राज्य सरकार में मंत्री संजय निषाद की पार्टी के दो विधायक भी अखिलेश यादव के संपर्क में हैं. वहीं यह भी कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री जयंती चौधरी की पार्टी आरएलडी के 9 विधायकों में भी कुछ सपा के संपर्क में हैं. दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा और आरएलडी ने सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था.
ऐसे में सपा ने अपनी पार्टी के नेताओं को सहयोगी दलों के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतार दिया था. इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव उद्योगपति धनराज नथवानी को अपने साथ लेकर इसलिए आए हैं ताकि वह अपने प्रभाव से कुछ विधायकों को एनडीए पाले से इधर ला पाएं. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अखिलेश यादव अपने तीसरे उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर लेंगे.
अखिलेश यादव का प्लान फेल करने का बीजेपी के पास प्लान क्या?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत पूरी बीजेपी के पास अखिलेश यादव के तीसरे उम्मीदवार का दांव फेल करने का एक मौका है. कहा जा रहा है कि अगर बीजेपी अपनी तरफ से एक किसी और बड़े उद्योगपति को उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार देती है, जिसका प्रभाव सपा प्रत्याशी नथवानी से ज्यादा हो तब खेल में और भी बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल सकता है.
इसके अलावा बीजेपी अगर अपने सहयोगी दलों के विधायकों को टूटने से रोक लेती है तो भी अखिलेश यादव की सारी प्लानिंग धरी रही जाएगी. हालांकि अब तक की कहानी में सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि बीजेपी विधायकों के क्रॉस वोटिंग नहीं करने पर भी सपा एनडीए के छोटे घटक दलों के विधायकों के दम पर अपने तीसरे उम्मीदवार की जीत फिक्स करने के प्रयास में जुटी है.