हरिद्वार का सबसे पुराना बाजार, जहां मिलता है जरूरत का हर सामान, पीढ़ियों से चला आ रहा व्यापार आज भी कायम

हरिद्वार का सबसे पुराना बाजार, जहां मिलता है जरूरत का हर सामान, पीढ़ियों से चला आ रहा व्यापार आज भी कायम


हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार की पहचान गंगा घाटों, मंदिरों और साधु-संतों से जरूर है, लेकिन इस शहर की अपनी एक पुरानी कारोबारी पहचान भी है. ज्वालापुर का चौक बाजार इसी पहचान को आज भी संभाले हुए है. पुरानी गलियों और सालों पुरानी दुकानों के बीच यहां आज भी सुबह से शाम तक ग्राहकों की चहल-पहल रहती है. किराना हो या कपड़े, बर्तन, जूते या आयुर्वेदिक दवाइयां, रोजमर्रा की जरूरत का सामान यहां एक ही जगह मिल जाता है.

चौक बाजार को हरिद्वार का सबसे पुराना और बड़ा थोक बाजार माना जाता है. यहां आसपास के ग्रामीण और शहरी इलाकों से लोग सामान खरीदने पहुंचते हैं. बाजार में थोक के साथ रिटेल दुकानें भी हैं. व्यापारियों के मुताबिक, अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण कई सालों से ग्राहकों का भरोसा इस बाजार पर बना हुआ है.

पीढ़ियों से चल रहा कारोबार

बाजार के वरिष्ठ व्यापारी भूषण कुमार बताते हैं कि उनका जन्म 1950 में हुआ था, लेकिन उनके जन्म से पहले से ही उनके दादा-परदादा यहां व्यापार करते थे. उनके मुताबिक ज्वालापुर का चौक बाजार हरिद्वार के सबसे पुराने बाजारों में से एक है, जहां कई पीढ़ियों से व्यापारी अपनी दुकानें चला रहे हैं. भूषण कुमार बताते हैं कि समय के साथ इसी मुख्य बाजार से आसपास कई छोटे-छोटे बाजार भी विकसित हुए, जिससे इसका दायरा और बढ़ता गया. इसके बावजूद आज भी ग्रामीण और शहरी इलाकों से आने वाले लोग थोक में सामान खरीदने के लिए सबसे पहले चौक बाजार का ही रुख करते हैं.

झंडा चौक के नाम से भी थी पहचान

दूसरे व्यापारी पुनीत मेहता बताते हैं कि चौक बाजार का पुराना नाम झंडा चौक बाजार था और इसकी शुरुआत ब्रिटिश हुकूमत के दौर में हुई थी. यहां होलसेल के साथ रिटेल की भी दुकानें हैं. उनके मुताबिक बाजार की खासियत यह है कि यहां सामान की गुणवत्ता अच्छी होने के साथ कीमत भी ग्राहकों के लिए किफायती रहती है. पुनीत मेहता बताते हैं कि बाजार में कई दुकानें ऐसी हैं जो काफी पुराने समय से चल रही हैं. गुप्ता केमिकल, जियालाल और कबूल चंद मेहता जैसी पुरानी और प्रसिद्ध दुकानें भी इसी चौक बाजार का हिस्सा हैं. यहां ग्रॉसरी, कॉस्मेटिक, अचार, मुरब्बा, बर्तन, कपड़े, जूते, आयुर्वेदिक दवाइयां, किराना सामान, घी, चीनी, तेल, रिफाइंड और शक्कर समेत रोजमर्रा की जरूरत का सामान मिलता है. उन्होंने बताया कि पहले बाजार की सड़कें पत्थर की हुआ करती थीं, लेकिन समय के साथ अब यहां की सड़कें सीसी की हो गई हैं.

पहले हुआ करती थी अनाज की मंडी

व्यापारी सौरभ कुमार बताते हैं कि उनका जन्म भी इसी बाजार में हुआ है और उनकी दुकान भी काफी पुरानी है. उनके मुताबिक पहले चौक बाजार में अनाज की मंडी हुआ करती थी. अंग्रेजों के समय से ही यहां आयुर्वेदिक दवाइयों, बर्तनों और दूसरी जरूरत की चीजों की दुकानें चलती आ रही हैं. सौरभ बताते हैं कि समय के साथ बाजार में कई नई होलसेल दुकानें खुलीं. पुराना बाजार होने की वजह से यहां आने वाले ग्राहकों और व्यापारियों के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध भी बने हुए हैं. यही वजह है कि आज भी कई लोग सामान खरीदने के लिए चौक बाजार को ही प्राथमिकता देते हैं. उनके मुताबिक यहां अच्छी क्वालिटी का सामान कम दाम में मिल जाता है. कई बार ग्राहकों को ऐसी चीजें भी इसी बाजार में मिल जाती हैं, जो दूसरी जगह आसानी से नहीं मिलतीं. इसी वजह से ज्वालापुर का चौक बाजार आज भी काफी प्रसिद्ध है.

100 से 150 साल पुरानी है पहचान

व्यापारी निलेश गुप्ता ने Local18 को बताया कि बाजार का पुराना नाम झंडा चौक बाजार रहा है. उनके मुताबिक यह बाजार करीब 100 से 150 साल पुराना है और अंग्रेजों के जमाने से अपनी पहचान बनाए हुए है. निलेश गुप्ता बताते हैं कि बाजार में लगभग हर जरूरत के सामान की होलसेल दुकान है. यहां अच्छी गुणवत्ता का सामान कम दामों में मिलने की वजह से ग्राहक दूर-दूर से भी पहुंचते हैं. उनका कहना है कि कोई ग्राहक एक बार यहां सामान लेने आता है तो उसे अपनी जरूरत का सामान खरीदने के लिए दूसरी जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

पुरानी गलियों में आज भी बनी हुई है रौनक

ब्रिटिश हुकूमत के दौर से जुड़ा यह बाजार आज भी अपनी पुरानी गलियों और दुकानों के साथ अपनी पहचान बनाए हुए है. दिनभर यहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है. रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों से लेकर कपड़े, बर्तन, जूते, किराना और आयुर्वेदिक दवाइयों तक कई तरह का सामान यहां आसानी से मिल जाता है. व्यापारियों का कहना है कि चौक बाजार में लंबे समय से कम मुनाफे और ज्यादा बिक्री के तरीके से कारोबार होता आया है. यही वजह है कि कई दशकों बाद भी ग्राहकों का इस बाजार से जुड़ाव बना हुआ है.



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