यूपी के इस बालाजी मंदिर की कहानी है खास, जानिए कब और कैसे हुई थी स्थापना
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फिरोजाबाद: शिकोहाबाद के भूड़ा नहर पुल के पास स्थित बालाजी धाम मंदिर आसपास के क्षेत्रों में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की स्थापना करीब 1987 में हुई थी और यहां राजस्थान के मेंहदीपुर धाम से लाई गई अखंड ज्योति भी है. मंदिर के महंत के मुताबिक, यहां बालाजी महाराज के साथ भैरो बाबा और प्रेतराज सरकार के मंदिर भी बने हुए हैं.
फिरोजाबाद: यूपी के फिरोजाबाद में एक ऐसा मंदिर है, जिसे लेकर आसपास के कई इलाकों में खास मान्यता है. शिकोहाबाद के भूड़ा नहर पुल के पास स्थित इस मंदिर को बालाजी धाम के नाम से जाना जाता है. यहां हर मंगलवार को बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर में सुबह और शाम बालाजी महाराज की आरती होती है. भक्त अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं.
इस मंदिर की तुलना राजस्थान के प्रसिद्ध मेंहदीपुर बालाजी धाम से भी की जाती है. मंदिर के महंत के मुताबिक, यहां ऊपरी बाधाओं से परेशान लोग भी दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर परिसर में भैरो बाबा और प्रेतराज सरकार के मंदिर भी बने हुए हैं. मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भीड़ ज्यादा रहती है.
शिकोहाबाद के भूड़ा नहर पुल के पास स्थित बालाजी धाम के महंत नरेंद्र शास्त्री ने बताया कि यह मंदिर काफी पुराना और प्रसिद्ध है. मंदिर की स्थापना करीब 1987 में शिकोहाबाद के रहने वाले एक सेठ ने कराई थी. बताया जाता है कि एक दिन सेठ को सपने में भगवान शंकर के दर्शन हुए थे. इसके बाद उन्हें हनुमान मंदिर की स्थापना करने की बात कही गई. इसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया और बजरंगबली की मूर्ति विधि-विधान से स्थापित की गई.
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महंत के मुताबिक, मंदिर में बालाजी महाराज की अखंड ज्योति भी है. यह ज्योति राजस्थान के मेंहदीपुर धाम से लाई गई है. इसी वजह से इस मंदिर की तुलना मेंहदीपुर बालाजी धाम से की जाती है. मंदिर में देश के अलग-अलग हिस्सों से भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यहां रोजाना सुबह और शाम बालाजी महाराज की आरती की जाती है.
मंदिर में मंगलवार और शनिवार को सबसे ज्यादा भीड़ रहती है. महंत के मुताबिक, मंगलवार को सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है और भीड़ सड़क तक पहुंच जाती है. मेंहदीपुर बालाजी की तरह यहां भी भैरो बाबा और प्रेतराज सरकार के मंदिर बने हुए हैं. मान्यता के अनुसार, ऊपरी बाधाओं से परेशान लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं.
मंदिर में जल और विभूति की भी खास मान्यता बताई जाती है. ऊपरी बाधाओं से परेशान भक्त हनुमान जी पर चढ़ाए गए जल और मंदिर की विभूति अपने साथ ले जाते हैं. इसके बाद वे मंदिर की ओर से बताए गए नियमों का पालन करते हैं. मंदिर के महंत के मुताबिक, भक्तों का मानना है कि बालाजी महाराज के दर्शन और पूजा-अर्चना से उन्हें परेशानियों से राहत मिलती है. इसी मान्यता के चलते मंगलवार और शनिवार को यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.