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Chikankari Real Vs Fake: लखनऊ की चिकनकारी भारत की सबसे खूबसूरत और बारीक कढ़ाई कलाओं में से एक मानी जाती है. इसकी नाजुक डिजाइन, महीन धागों का काम और शाही अंदाज इसे खास बनाता है. चिकनकारी के कपड़े, कुर्ते, साड़ियां और दुपट्टे देश-विदेश में काफी पसंद किए जाते हैं. यही कारण है कि मार्केट में कई डूप्लीकेट वर्क बेचे जा रहे.
असली चिकनकारी को तैयार करने में कारीगरों को कई हफ्ते या कभी-कभी कई महीने भी लग जाते हैं. वहीं मशीन से तैयार कढ़ाई कम समय में और कम लागत पर बनकर तैयार हो जाती है. ऐसे में अगर आप भी चिकनकारी कपड़े खरीदने जा रहे हैं, तो असली और नकली का फर्क यहां जान लें. (Thumb Image Credit- @aliabhatt, @priyankachopra Instagram)
क्या होती है असली चिकनकारी? असली चिकनकारी हाथ से की जाने वाली कढ़ाई की एक पारंपरिक कला है. इसमें सुई और धागे की मदद से कपड़े पर सुंदर डिजाइन बनाई जाती हैं. चिकनकारी में बखिया, फंदा, जाली और मुर्री जैसे कई तरह के टांकों का इस्तेमाल किया जाता है. हर कारीगर का काम अलग होता है, इसलिए दो चिकनकारी डिजाइन बिल्कुल एक जैसी नहीं दिखतीं. यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है.
हल्की असमानता होती है पहचान- हाथ से की गई चिकनकारी में टांकों की दूरी, आकार या धागे की पकड़ में हल्का अंतर दिखाई दे सकता है. यह इस बात का संकेत है कि कढ़ाई हाथ से की गई है. दूसरी ओर मशीन से बनी कढ़ाई में हर टांका लगभग एक जैसा और पूरी तरह समान दिखता है.
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कपड़े का पिछला हिस्सा देखें- चिकनकारी की पहचान करने का सबसे आसान तरीका कपड़े को पलटकर देखना है. हाथ की कढ़ाई में पीछे की ओर धागों के छोटे-छोटे जोड़, गांठें और अलग-अलग दिशाओं में जाते धागे दिखाई दे सकते हैं. वहीं मशीन की कढ़ाई का पिछला हिस्सा ज्यादा साफ, व्यवस्थित और लगभग सामने जैसा दिखाई देता है.
कपड़े की बनावट को महसूस करें- असली चिकनकारी में धागों का काम हल्का उभरा हुआ महसूस होता है. इसे छूने पर कढ़ाई की गहराई और बारीकी का एहसास होता है. मशीन से बनी कढ़ाई अक्सर सपाट और सख्त महसूस होती है, क्योंकि इसमें सिंथेटिक धागों का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है.
जाली के काम से पहचानें असलियत- चिकनकारी की सबसे खास तकनीकों में से एक ‘जाली’ वर्क है. इसमें कपड़े के धागों को विशेष तरीके से अलग कर जाल जैसी डिजाइन बनाई जाती है. यह बेहद बारीक हाथ का काम है और मशीन से इसे ठीक उसी तरह बनाना संभव नहीं माना जाता. अगर किसी कपड़े में असली जाली वर्क दिखाई दे, तो यह हस्तनिर्मित चिकनकारी होने का मजबूत संकेत हो सकता है.
सही कपड़े पर भी दें ध्यान- पारंपरिक चिकनकारी आमतौर पर मलमल, कॉटन, जॉर्जेट और चंदेरी जैसे हल्के और मुलायम कपड़ों पर की जाती है. वहीं मशीन वाली कढ़ाई अक्सर सिंथेटिक या मोटे फैब्रिक पर देखने को मिलती है. इसलिए खरीदारी करते समय कपड़े की गुणवत्ता और बनावट को भी जरूर जांचें.