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US Aircraft Carrier: अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है. USS थियोडोर रूजवेल्ट एयरक्राफ्ट कैरियर और USS मैकिन आइलैंड के साथ करीब 9,000 से 10,000 अमेरिकी सैनिक क्षेत्र की ओर रवाना हो रहे हैं. इससे वहां तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी हो सकती है.
USS थियोडोर रूजवेल्ट पश्चिम एशिया में भेजा जा रहा है.
US News Hindi: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब भी जारी है. एक बार फिर समुद्र में अमेरिकी सैन्य ताकत बढ़ने जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दोबारा हमले की सोच रहे हैं. इसी बीच पेंटागन ने पश्चिम एशिया में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भेज दिया है. USS थियोडोर रूजवेल्ट (Theodore Roosevelt) रविवार को सैन डिएगो से रवाना हो चुका है. उसके साथ युद्धपोतों का पूरा ग्रुप और हजारों अमेरिकी सैनिक भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, इस तैनाती के तहत करीब 9,000 से 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैन्यकर्मी पश्चिम एशिया पहुंच सकते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर से बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है?
ईरान की ओर रवाना हुआ रूजवेल्ट
अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर USS थियोडोर रुजवेल्ट 27 सितंबर को कैलिफोर्निया के सैन डिएगो से रवाना हुआ. इसके साथ कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 9 भी तैनात किया गया है. इस समूह में विमानवाहक पोत के अलावा लड़ाकू विमान और सुरक्षा देने वाले दूसरे युद्धपोत शामिल हैं. अमेरिकी नौसेना से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, यह तैनाती लंबे समय तक चल सकती है और जहाज को मिडिल ईस्ट पहुंचने में नवंबर तक का समय लग सकता है.
USS थियोडोर रूजवेल्ट.
इसके अलावा USS मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी क्षेत्र की ओर भेजा जा रहा है. इस समूह में 2,000 से ज्यादा मरीन सैनिक होंगे. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पूरी तैनाती में करीब 7,000 से ज्यादा नौसैनिक और 2,000 मरीन शामिल हो सकते हैं. यानी अमेरिका पश्चिम एशिया में लगभग 9,000 अतिरिक्त सैन्यकर्मी भेज रहा है.
क्या मिडिल ईस्ट में होंगे तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर?
इस समय पश्चिम एशिया में USS जॉर्ज H.W. बुश और USS जॉर्ज वॉशिंगटन मौजूद हैं. USS थियोडोर रूजवेल्ट के पहुंचने पर कुछ समय के लिए क्षेत्र में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर होंगे. हालांकि, इस तैनाती का एक मकसद पहले से मौजूद USS जॉर्ज वाशिंगटन की जगह लेना भी हो सकता है. यह एयरक्राफ्ट कैरियर जापान में तैनात रहता है और अगस्त में पश्चिम एशिया पहुंचा था. इसलिए यह साफ नहीं है कि अमेरिका स्थायी रूप से अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है या पुराने युद्धपोतों की जगह नए जहाज भेज रहा है.