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Fish Farming Business Profit Tips: समस्तीपुर का डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय मछली पालकों को वैल्यू एडिशन का निःशुल्क प्रशिक्षण देगा. जिससे वे मछली उत्पादों से अतिरिक्त आय कमा सकें. यह प्रशिक्षण किसानों को मछली की बीमारियों और उपचार की जानकारी भी देगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी.
अमित कुमार: मछली पालन करने वाले किसानों को अगर बाजार में उनकी मछली की उचित कीमत नहीं मिल रही है तो अब उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है. समस्तीपुर स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए मछली के वैल्यू एडिशन पर विशेष काम किया जा रहा है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों को यह प्रशिक्षण देंगे कि सामान्य रूप से बिकने वाली मछली से किस तरह अलग-अलग खाद्य उत्पाद तैयार कर उसकी कीमत और बाजार की मांग दोनों बढ़ाई जा सकती है. यानी जिस मछली की कीमत बाजार में करीब 150 रुपये है, उसी से वैल्यू एडिशन के जरिए 300 रुपये तक की आमदनी कैसे हासिल की जा सकती है. इस दिशा में किसानों को व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी.
नया प्रोजेक्ट शुरू, किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर से जुड़े महाविद्यालय के मत्स्य विभाग के एचओडी डॉ. पी.पी. श्रीवास्तव ने बताया कि उनके विभाग में एक नए प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य मछली पालन करने वाले किसानों को वैल्यू एडिशन के बारे में समझाना और उन्हें प्रशिक्षित करना है, ताकि वे अपनी आमदनी में बढ़ोतरी कर सकें.
उन्होंने बताया कि मत्स्य उत्पादों से जुड़े खाद्य प्रोडक्ट तैयार करने के लिए सरकार की ओर से प्रोजेक्ट मिला है. इस पर लगातार काम किया जा रहा है. वैज्ञानिकों का प्रयास है कि मछली पालन करने वाले किसान सिर्फ कच्ची मछली बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि उससे अलग-अलग उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आमदनी हासिल करें. उन्होंने कहा कि किसानों के लिए यह सेवा निशुल्क है. इच्छुक किसान विश्वविद्यालय से संपर्क कर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं.
वैल्यू एडिशन के साथ मछली की बीमारी की भी मिलेगी जानकारी
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय में किसानों को सिर्फ मछली के वैल्यू एडिशन की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें मछली पालन से जुड़ी जरूरी बुनियादी जानकारी भी दी जाएगी. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मछलियों में होने वाली विभिन्न बीमारियों के लक्षण पहचानने, समय रहते समस्या समझने और उसके उचित उपचार की जानकारी भी दी जाएगी.
उनका कहना है कि किसान अगर मछली पालन के साथ उसके उत्पादों को तैयार करने, उनकी गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार के अनुसार बेचने की तकनीक सीख लेते हैं तो उनकी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है. विश्वविद्यालय का उद्देश्य किसानों को नई तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है. ऐसे किसान जो मछली पालन करते हैं या इस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहते हैं, वे संबंधित जानकारी और प्रशिक्षण के लिए विश्वविद्यालय के मत्स्य विभाग से संपर्क कर सकते हैं.