DU Student Protest। Delhi South Campus protest। 9:30 बजे PG बंद, सड़क-मेट्रो तक डर… ओ मर्द मत आना पोस्टर संग उतरीं DU छात्राएं

DU Student Protest। Delhi South Campus protest। 9:30 बजे PG बंद, सड़क-मेट्रो तक डर… ओ मर्द मत आना पोस्टर संग उतरीं DU छात्राएं


होमताजा खबरDelhi

9:30 बजे PG बंद, सड़क-मेट्रो तक डर… ओ मर्द मत आना पोस्टर संग उतरीं DU छात्राएं

Last Updated:

DU Student Protest: दिल्ली के साउथ कैंपस इलाके में महिला सुरक्षा को लेकर छात्राओं ने प्रदर्शन किया. सत्य निकेतन के पास छात्राएं पोस्टर लेकर मार्च करती नजर आईं. उन्होंने कैंपस, पीजी, सड़क और मेट्रो में सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. छात्राओं ने स्टॉकिंग, छेड़छाड़ और शिकायतों पर कार्रवाई से जुड़े अनुभव साझा किए. पुलिस पेट्रोलिंग, पिंक बूथ और शिकायत व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए. प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों की मांग की.

Zoom

छात्राओं ने प्रदर्शन किया.

दिल्ली के साउथ कैंपस इलाके में महिला सुरक्षा को लेकर छात्राओं का प्रदर्शन हुआ. सत्य निकेतन के पास दुर्गाबाई देशमुख मेट्रो स्टेशन के आसपास छात्राएं पोस्टर लेकर मार्च करती नजर आईं. प्रदर्शन के दौरान ‘ओ मर्द मत आना’ जैसे संदेश वाले पोस्टर दिखे. छात्राओं ने कहा कि उन्हें कैंपस, पीजी, सड़क और सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा को लेकर डर महसूस होता है. उन्होंने पुलिस व्यवस्था और शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए. प्रदर्शनकारी छात्राओं ने कहा कि कई पीजी में रात करीब 9:30 बजे प्रवेश बंद कर दिया जाता है. इससे उन्हें यह संदेश मिलता है कि रात में बाहर निकलना सुरक्षित नहीं है. छात्राओं ने सवाल उठाया कि सुरक्षा के नाम पर पाबंदियां अक्सर महिलाओं पर क्यों लगती हैं. उनके मुताबिक, पुरुषों पर ऐसी पाबंदियां नहीं दिखाई देतीं.

ऑनलाइन स्टॉकिंग से लेकर सड़क तक डर
छात्राओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टॉकिंग की शिकायतों का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि सड़क पर चलते समय यह डर रहता है कि कोई पीछा कर रहा है. कुछ छात्राओं ने सार्वजनिक जगहों पर अश्लील इशारों और छेड़छाड़ के अनुभव साझा किए. प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण रोजमर्रा की आवाजाही भी कई बार तनावपूर्ण लगती है.

‘कपड़ों पर सवाल क्यों?’
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने कैंपस के अंदर भी महिलाओं के कपड़ों और व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जाने की बात कही. उन्होंने कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी महिलाओं के कपड़ों या समय तय करने से पूरी नहीं हो सकती. छात्राओं ने ‘नो मीन्स नो’ की समझ और सहमति के सम्मान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई. उनका कहना था कि महिलाओं को अपनी आवाज उठाने के लिए डरना नहीं चाहिए.

पुलिस पर भरोसे को लेकर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने पुलिस की भूमिका को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की. कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि शिकायत लेकर जाने पर उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिलती. पिंक बूथ को लेकर भी सवाल उठाए गए. छात्राओं का दावा है कि कुछ जगहों पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का अनुभव संतोषजनक नहीं रहा. उन्होंने रात में पुलिस गश्त और शिकायत व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की.

डूसू चुनाव के दौरान भी छेड़छाड़ के आरोप
कुछ छात्राओं ने डूसू चुनाव के दौरान अश्लील इशारों और परेशान किए जाने के आरोप लगाए. उनका कहना था कि आर्ट्स फैकल्टी के पास मौजूद पिंक बूथ पर शिकायत करने के बावजूद उन्हें कार्रवाई महसूस नहीं हुई. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कॉलेजों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर तेज और भरोसेमंद व्यवस्था जरूरी है. उन्होंने कैंपस के आसपास पुलिस और पीसीआर की मौजूदगी बढ़ाने की मांग भी उठाई.

‘डर से बाहर निकलना चाहती हैं लड़कियां’
प्रदर्शन में छात्राओं ने कहा कि बचपन से लड़कियों को देर रात बाहर नहीं निकलने और सावधान रहने की सलाह दी जाती है. उनका कहना था कि सुरक्षा का पूरा बोझ महिलाओं पर डालने के बजाय समाज को पुरुषों के व्यवहार पर भी सवाल करना चाहिए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे डर के माहौल को बदलने के लिए अपनी आवाज उठा रही हैं. उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों की मांग रखी.



Source link