प्रसूताओं की सेहत से ये कैसा भद्दा मजाक; महालक्ष्मी किट में बांट दिया एक्सपायरी सामान, विभाग में मची खलबली

प्रसूताओं की सेहत से ये कैसा भद्दा मजाक; महालक्ष्मी किट में बांट दिया एक्सपायरी सामान, विभाग में मची खलबली


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Uttarakhand Mahalaxmi Kit Controversy: उत्तराखंड में गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य के लिए बांटी जाने वाली ‘महालक्ष्मी किट’ भारी लापरवाही के चलते सवालों के घेरे में आ गई है. देहरादून के गढ़ी कैंट इलाके में एक धात्री महिला को किट में एक्सपायरी डेट का तेल, क्रीम और खाद्य सामग्री थमा दी गई, जिसकी वैधता कई दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी. इस गंभीर मामले का खुलासा होने के बाद महिला एवं बाल विकास निदेशालय में हड़कंप मच गया है. आनन-फानन में विभाग ने सभी जिलों के कार्यक्रम अधिकारियों को सख्त नोटिस जारी कर एक्सपायरी सामान न बांटने और वितरण प्रणाली सुधारने के कड़े निर्देश दिए हैं.

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मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना में घापला.

देहरादून: उत्तराखंड में जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शुरू की गई ‘महालक्ष्मी किट’ योजना में बड़ी लापरवाही सामने आई है. सिस्टम की घोर अनदेखी के चलते गर्भवती और बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को एक्सपायरी डेट का सामान बांटा जा रहा है, जिससे उनके और नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. हाल ही में देहरादून में ऐसा मामला सामने आने के बाद विभाग के कार्य पर सवाल खड़े हो गए हैं.

जानकारी के अनुसार, 7 सितंबर को देहरादून के गढ़ी कैंट इलाके में एक धात्री महिला को महालक्ष्मी किट का वितरण किया गया था. जब महिला ने घर जाकर किट खोली, तो उसमें रखा तेल, क्रीम और खाद्य सामग्री एक्सपायर्ड निकली. नाम न छापने की शर्त पर पीड़िता ने बताया कि किट में मौजूद सामान की वैधता 30 अगस्त को ही खत्म हो चुकी थी. यानी विभाग द्वारा महिला को पुराना एक्सपायरी सामान थमा दिया गया.

क्या होता है महालक्ष्मी किट में?
महालक्ष्मी किट के अंतर्गत लाभार्थी को करीब 3 हजार रुपये का कुल 23 प्रकार का सामान दिया जाता है. इसमें गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिए 13 आइटम (जैसे- 250 ग्राम सूखी खुमानी, छुआरा, सरसों का तेल, नहाने और कपड़े धोने का साबुन) होते हैं. वहीं, नवजात शिशु के लिए 9 आइटम (शिशु का तेल, साबुन, क्रीम और 2 जोड़ी कपड़े आदि) शामिल होते हैं.

किरकिरी के बाद जागा विभाग, जारी किए कड़े निर्देश
एक्सपायरी सामान बांटने का यह मामला प्रकाश में आने के बाद महिला एवं बाल विकास निदेशालय में हड़कंप मच गया. किरकिरी से बचने के लिए निदेशालय ने 25 सितंबर को सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों (DPO) को एक सख्त लेटर जारी किया है. विभाग ने ‘फर्स्ट इन फर्स्ट आउट’ (FIFO) प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए हैं, जिसका अर्थ है कि जो किट एक्सपायर होने के करीब हैं, उन्हें सबसे पहले बांटा जाए. इसके लिए वितरण और मॉनिटरिंग सिस्टम को तत्काल मजबूत करने को कहा गया है.

पहले भी उठ चुके हैं आंगनबाड़ी के राशन पर सवाल
यह कोई पहला मामला नहीं है जब वितरण और भंडारण में खामियां पाई गई हैं. इससे पहले भी प्रदेश के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले अंडे, सत्तू और हलवे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ चुके हैं. स्थानीय लोग कई बार खराब और एक्सपायरी सामान दिए जाने की शिकायतें कर चुके हैं. अब देखना होगा कि निदेशालय के इन ताजा निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर वितरण प्रणाली में कितना सुधार आता है.



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