ग्राउंड रिपोर्ट: पलवल के जनौली में अधूरा पड़ा रेलवे फ्लाईओवर, 50 गांवों का रास्ता बंद, 20 किमी चक्कर काटने को मजबूर लोग

ग्राउंड रिपोर्ट: पलवल के जनौली में अधूरा पड़ा रेलवे फ्लाईओवर, 50 गांवों का रास्ता बंद, 20 किमी चक्कर काटने को मजबूर लोग


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Palwal Janauli Railway Flyover: कागजों में विकास की रफ्तार भले ही तेज दिखे, लेकिन जमीन पर हकीकत अक्सर गड्ढों और बैरिकेड्स के बीच दम तोड़ती नजर आती है. हरियाणा के पलवल स्थित जनौली में रेलवे फाटक नंबर 568 पर बन रहा रेलवे फ्लाईओवर इसका जीता-जागता उदाहरण है. करीब तीन साल पहले शुरू हुआ निर्माण कार्य अब पूरी तरह ठप पड़ा है, जिसकी सीधी मार रोजाना 50 हजार राहगीरों, किसानों, मजदूरों और कामकाजी लोगों पर पड़ रही है. जेवर एयरपोर्ट और पड़ोसी जिलों को जोड़ने वाला यह अहम संपर्क मार्ग बंद होने से नाराज ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बयां करते हुए प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक रास्ते की मांग की है.

Palwal Janauli Railway Flyover: हरियाणा के पलवल के जनौली में रेलवे फ्लाईओवर का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है. ग्रामीणों के मुताबिक इसका निर्माण 2023 के आखिर में शुरू हुआ था, लेकिन अब काम बंद हो गया है. इस रास्ते से 50 से ज्यादा गांवों के लोग आते-जाते हैं और यह रास्ता दूसरे जिले के साथ-साथ जेवर एयरपोर्ट की तरफ भी संपर्क देता है. रास्ता बंद होने से किसान, मजदूर और आसपास की कंपनियों में नौकरी करने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं. कई कर्मचारी रेलवे फाटक के दोनों तरफ बाइक खड़ी करके पैदल कंपनी तक जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से फ्लाईओवर बनने तक वैकल्पिक रास्ता देने की मांग की है. लोकल 18 से बातचीत में ग्रामीणों ने क्या बताया, आइये जानते हैं.

रोज 50 हजार की आवाजाही, 15 से 20 किमी का अतिरिक्त चक्कर
ग्रामीण बबलू हुड्डा बताते हैं कि यह करीब 25 से 30 गांवों को जोड़ने वाला रास्ता है. अलीगढ़ हाईवे पर जाम लगने की स्थिति में लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं. रोज करीब 50 हजार लोग यहां से सफर करते हैं. रास्ता बंद होने के कारण पलवल, फरीदाबाद या आसपास की फैक्ट्रियों में जाने वालों को 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. दोनों तरफ खेत होने के कारण किसानों के लिए भी आवाजाही मुश्किल हो गई है. रेलवे ने गड्ढे खोदकर बैरिकेड लगा दिए हैं. डीसी और संबंधित अधिकारियों से शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. सरकार से इस मामले में ध्यान देने की मांग की है.

किसानों और मजदूरों पर दोहरी मार, महिलाओं की परेशानी बढ़ी
स्थानीय निवासी रविंद्र सिंह बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी किसान और मजदूरों को हो रही है. दो से तीन महीने पहले फाटक को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिसके बाद बाइक और साइकिल निकालना भी मुश्किल हो गया. किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए करीब 20 किलोमीटर घूमना पड़ रहा है, जबकि मजदूर 10 से 15 किलोमीटर अतिरिक्त सफर कर रहे हैं. मजबूरी में लोग बाइक फाटक के पास खड़ी करके पैदल कंपनियों तक जाते हैं. रेलवे को फ्लाईओवर बनने में देरी हो रही है तो कम से कम वैकल्पिक रास्ता दिया जाना चाहिए. ट्रैक्टर-ट्रॉली, बाइक और पैदल आने-जाने के लिए रास्ता जरूरी है. महिलाओं को भी यहां काफी परेशानी हो रही है.

2026 की डेडलाइन, लेकिन काम पूरी तरह ठप
जनौली निवासी प्रवीण बताते हैं कि मैं रोज बाइक फाटक के पास खड़ी करके आगे जाता हूं. फ्लाईओवर का काम 2023 के आखिर में शुरू हुआ था और दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है. काम पूरा करने का लक्ष्य 2026 बताया गया था, लेकिन अभी काफी काम बाकी है और फिलहाल निर्माण बंद है. रेलवे प्रशासन से बात करने के बावजूद कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं दिया गया. स्थानीय निवासी अजीत बताते हैं कि जिस गति से काम चल रहा है, उससे फ्लाईओवर बनने में काफी समय लग सकता है. फिलहाल निर्माण पूरी तरह बंद है. मेरी मांग है कि कम से कम बाइक निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाए.

फाटक नंबर 568: खेतों तक पहुंचने में डीजल और समय की बर्बादी
किसान विजेंद्र सिंह बताते हैं कि रेलवे क्रॉसिंग के दूसरी तरफ मेरी और करीब 50 किसानों की जमीन है. यह रेलवे फाटक नंबर 568 है, जहां फ्लाईओवर का निर्माण होना है. काम शुरू हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्माण पूरा नहीं हुआ. बैरिकेड लगने के बाद पैदल रास्ता भी बंद हो गया है. किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए करीब 15 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे मजदूरी, डीजल और समय का नुकसान हो रहा है.

आसपास के करीब 50 गांवों से लोग कंपनियों में नौकरी करने आते हैं. कई लोग बाइक फाटक के पास छोड़कर पैदल जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी समाधान नहीं हुआ.



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