50 लाख से ज्यादा कर्मचारी इस वक्त सिर्फ आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. सबको लगता है कि सैलरी बढ़ेगी, पैसे ज्यादा आएंगे. लेकिन एक्सपर्ट कह रहे कि अगर सरकार इस रिपोर्ट को लागू करने में देर कर दे, तो कर्मचारियों को अच्छा-खासा नुकसान भी हो सकता है. खासकर उन कर्मचारियों को जिनका वेतन लेवल-7 पर है.
मान लीजिए नया वेतन 1 जनवरी 2026 से माना जाएगा. लेकिन एरियर यानी पिछला बकाया सिर्फ मूल वेतन पर मिलता है. मकान किराया भत्ता यानी HRA, ट्रैवल अलाउंस, महंगाई भत्ता (DA) पर एरियर नहीं मिलता. यानी देर हुई तो इन भत्तों का फायदा हाथ से निकल जाएगा.
क्या है फार्मूला
लेवल-7 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे ₹44,900 मानकर गणना की गई है. इसमें 7वें वेतन आयोग के अनुसार X शहर के लिए HRA को बेसिक का 24% और TPTA को 7वें CPC की तय दर + DA माना गया है.
आगे अनुमान के लिए DA मई 2027 में 65%, अगस्त 2027 में 67% और जनवरी 2028 में 70% मानते हुए, 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर 2.1 लिया गया है. इसके आधार पर HRA और TPTA की मौजूदा दरों को भी 2.1 गुना किया गया है.
| देरी का समय | अनुमानित कुल नुकसान |
|---|---|
| 17 महीने की देरी | ₹2.29 लाख |
| 20 महीने की देरी | ₹2.69 लाख |
| 25 महीने की देरी | ₹3.32 लाख |
लेवल-7 कर्मचारी को कितना नुकसान
अभी लेवल-7 वाले कर्मचारी का मूल वेतन करीब 44,900 रुपये है. इसमें HRA 24 प्रतिशत और सफर भत्ता जुड़ता है. अगर नया वेतन आयोग 2.1 गुना बढ़ाकर लागू होता है, तो ये भत्ते भी लगभग दोगुने हो जाएंगे. लेकिन जब तक नई दर लागू नहीं होती, तब तक पुरानी कम रकम ही मिलती रहेगी.
मान लीजिए रिपोर्ट मई 2027 में लागू हुई (17 महीने की देरी), तो हर महीने करीब 13,000-13,500 रुपये का नुकसान होगा. 20 महीने की देरी में और ज्यादा, और 25 महीने की देरी (जनवरी 2028) में कुल नुकसान 3.32 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. ये नुकसान सिर्फ भत्तों का है, मूल वेतन का एरियर बाद में मिल जाएगा.
(हालांकि यह सिर्फ अनुमान है, अभी आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही तय होगा कि कितना फिटमेंट फैक्टर होगा, और उसके हिसाब से क्या कैलकुलेशन बैठेगा. यह आंकड़ा अंतिम नहीं.)