salary ko kaise bachayen | salary save tips | how to save salary | सैलरी मिलने के कुछ दिन बाद ही बटुआ हो जाता है खाली? हर महीने ऐसे करें सेविंग

salary ko kaise bachayen | salary save tips | how to save salary | सैलरी मिलने के कुछ दिन बाद ही बटुआ हो जाता है खाली? हर महीने ऐसे करें सेविंग


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Save salary Tips: हर महीने सैलरी आने से पहले कहां खर्च होना है, वो फिक्स हो जाता है और सैलरी आते ही खत्म हो जाता है और आपके हाथ में कुछ नहीं बचता. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो खर्च करने के तरीके में कुछ छोटे बदलाव काफी मददगार हो सकते हैं.

सुल्तानपुर: हर महीने सैलरी आते ही कुछ दिनों तक तो लगता है कि इस बार खर्चों को अच्छे से संभाल लेंगे, लेकिन देखते ही देखते बटुआ और बैंक अकाउंट दोनों खाली होने लगते हैं. घर का खर्च, किराना, बिजली-पानी का बिल, ऑनलाइन शॉपिंग और छोटी-छोटी जरूरतों में पैसा कब निकल जाता है, पता ही नहीं चलता. कई बार कमाई ठीक होने के बावजूद महीने के आखिर में पैसों की कमी महसूस होने लगती है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो खर्च करने के तरीके में कुछ छोटे बदलाव काफी मददगार हो सकते हैं. एक्सपर्ट ने ऐसे ही आसान टिप्स बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी सैलरी को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं.

सैलरी आते ही 20 प्रतिशत अलग रखें
चार्टर्ड एकाउंटेंट मनमोहित सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि आमतौर पर लोगों की मानसिकता होती है कि सैलरी में से जितना पैसा महीने के अंत में बच जाएगा, उसे सेव कर लेंगे. लेकिन इस तरीके से अक्सर बचत नहीं हो पाती. इसलिए सैलरी आते ही कम से कम 20 प्रतिशत रकम अलग रखने की आदत बनाएं. इस रकम को कंटिनजेंसी फंड के तौर पर रखा जा सकता है, ताकि अचानक आने वाले खर्चों में परेशानी न हो. इसके बाद बचे पैसे से घर के जरूरी खर्चों की सूची बनाकर बजट तैयार करें.

छोटे UPI खर्चों पर रखें नजर
आजकल UPI से भुगतान करना बेहद आसान हो गया है. चाय, स्नैक्स, ऑनलाइन ऑर्डर या छोटी-मोटी खरीदारी में कुछ रुपये खर्च होते हैं और इन पर ज्यादा ध्यान भी नहीं जाता. लेकिन महीने के अंत में यही छोटे-छोटे खर्च बड़ी रकम बन जाते हैं, इसलिए हर UPI ट्रांजेक्शन का हिसाब रखें. गैर-जरूरी खर्चों की पहचान करें और महीने की शुरुआत में ही जरूरी और गैर-जरूरी खर्चों की सीमा तय कर लें.

बचत को ऑटोमैटिक बनाएं
बचत को केवल अपनी इच्छा पर न छोड़ें. सैलरी आने की तारीख के अगले दिन RD या Mutual Fund SIP का ऑटो-डेबिट सेट किया जा सकता है. इससे पैसा आपके मुख्य बैंक अकाउंट में लंबे समय तक पड़ा नहीं रहेगा और खर्च होने की संभावना भी कम होगी. हालांकि निवेश करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है.

बटुए और ऑनलाइन शॉपिंग पर लगाएं ब्रेक
बटुए में जरूरत से ज्यादा कैश या एक्टिव डेबिट कार्ड रखने से फिजूलखर्ची बढ़ सकती है, इसलिए बटुए में केवल जरूरी कैश रखें. साथ ही ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स से सेव कार्ड डिटेल्स हटाने से अचानक खरीदारी करने की आदत पर नियंत्रण पाया जा सकता है. महीने की शुरुआत में बजट बनाएं और हर खर्च को उसी सीमा में रखने की कोशिश करें. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके महीने के अंत में पैसों की कमी से बचा जा सकता है.



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