1 अक्तूबर 2026 मार्केट ने फिर रुलाया.सेंसेक्स एक वक्त 1000 पाइंट नीचे गिर गया. स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने वाला शायद ही कोई शख्स होगा, जिसका पोर्टफोलियो इस वक्त ग्रीन में हो. तबाही ही कुछ ऐसी है. सेंसेक्स 18 महीने के निचले स्तर पर है तो निफ्टी एक साल में ही हाई से 13 फीसदी टूट चुका है. तबाही का आलम ये है कि 25 सालों में पहली बार मार्केट लगातार 8वें हफ्ते गिरा. और जो हालात हैं, इसके उबरने के संकेत नहीं दिख रहे हैं. हम आपको 10 पॉइंट में बर्बादी की वजह और फ्यूचर बता रहे हैं.
कहां से आई ये तबाही, और कितनी चलेगी
1. शेयर बाजार में लगातार गिरावट का ऐसा दौर चल रहा है जो पिछले 25 सालों में कभी नहीं देखा गया, यानी बाजार लगातार आठवें हफ्ते नीचे गिरा है. इस बार का सितंबर महीना निफ्टी के लिए 25 साल में सबसे बुरा साबित हुआ है, जहां शेयर लगातार लाल निशान में ही बंद हो रहे हैं.
2. इस हफ्ते बाजार में ऐसी सुनामी आई है कि निवेशकों के करीब 20 लाख करोड़ रुपये पानी में बह गए, यानी उनकी संपत्ति घट गई है. हालत इतनी खराब है कि देश की सबसे बड़ी कंपनियों (निफ्टी) के 12 बड़े शेयर गिरते-गिरते अपने पूरे एक साल (52-हफ्ते) के सबसे निचले और सस्ते स्तर पर आ गिरे हैं.
3. कच्चा तेल की कीमतों में भयंकर आग लगी हुई है और ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. पिछले सिर्फ 6 महीने में इसमें 11% और एक साल के अंदर 77% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिससे हर जगह महंगाई और बढ़ने का डर सता रहा है.
4. पूरी दुनिया के बॉन्ड बाजार यानी जहां सरकारें बाजार से उधारी लेती हैं, उसमें भी लोग अपना पैसा निकाल रहे हैं. इससे अमेरिका में 10 साल वाले बॉन्ड का ब्याज 20 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है. वहीं, 30 साल वाले बॉन्ड का ब्याज 25 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसका सीधा बुरा असर हमारे बाजार पर पड़ा है.
5. विदेशी निवेशकों ने हमारे बाजार से अपना पैसा तेजी से निकालना शुरू कर दिया है और साल 2026 में अब तक उन्होंने 2.50 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले हैं. सिर्फ सितंबर महीने में ही उन्होंने 36,000 करोड़ रुपये निकाले हैं, जिसकी वजह से गाड़ियों वाली कंपनियों के शेयरों में फरवरी 2022 के बाद सबसे बड़ी एक-दिनी गिरावट आ रही है.
6. अमेरिका के डॉलर के सामने हमारा भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है और इसकी कीमत तेजी से गिर रही है. अगर हम इस साल 2026 की शुरुआत से देखें तो रुपया 7% तक टूट चुका है, और केवल एक महीने (सितंबर) में ही इसमें 1% की गिरावट आई है, जिससे विदेशों से सामान मंगाना हमारे लिए महंगा हो गया है.
7. इस साल कंपनियों ने नए शेयर (IPO) लाकर बाजार से बहुत ज्यादा पैसा इकट्ठा किया है। अब तक 100 नए बड़े आईपीओ आ चुके हैं, जिनके जरिए निवेशकों की जेब से 1.13 लाख करोड़ रुपये निकाले गए. इसके साथ ही बड़े निवेशकों के बीच 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील (थोक में शेयरों की खरीद-बिक्री) भी हुई है.
8. कर्ज महंगा होने का डर भी बाजार को काफी डरा रहा है. अमेरिका का केंद्रीय बैंक (फेड) इस साल अपनी ब्याज दरों में दो बार और बढ़ोतरी कर सकता है. इसके साथ ही, भारत में भी यह उम्मीद जताई जा रही है कि हमारा रिजर्व बैंक (RBI) भी अक्टूबर की अपनी मीटिंग में लोन की ब्याज दरें बढ़ा देगा, जिससे आम आदमी की ईएमआई बढ़ सकती है.
9. एक्सपर्ट कह रहे कि अगर फेड ने ब्याज दरों में फिर इजाफा किया तो मान लीजिए कि विदेशी निवेशक फिर पैसा निकालकर ले जाएंगे और शेयर बाजार पर इसका बुरा असर पड़ेगा. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ और फेड चेयरमैन ने ट्रंप की बात मान ली तो बाजार उसे सकारात्मक तौर पर देख सकता है.
10. एक्सपर्ट के मुताबिक- महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में सूखे की आशंका की वजह से निवेशक काफी चिंतित है. क्योंकि इसी वजह से ऑटो सेल्स समेत कई सेक्टर में ग्रोथ में कमी आई है. उसका असर शेयर बाजार पर पड़ रहा है. हाल फिलहाल में इसमें बहुत सुधार होता नहीं दिख रहा है.